सैटेलाइट टाउनशिप पर रोहिणी आचार्य का बड़ा हमला, बोली- किसानों की जमीन हड़पने की हो रही है तैयारी

रोहिणी आचार्य

रोहिणी आचार्य का आरोप, किसान विरोधी है टाउनशिप प्रोजेक्ट

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। रोहिणी आचार्य ने बिहार में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि टाउनशिप विकसित करने के लिए किसानों की कृषि योग्य और बहुफसली जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। उन्होंने इस परियोजना को किसान विरोधी बताते हुए सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

रोहिणी आचार्य का कहना है कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां किसानों के लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में उपजाऊ जमीन पर बड़े पैमाने पर निर्माण होने से किसानों के सामने रोजगार और परिवार की आय का संकट खड़ा हो सकता है।

रोहिणी आचार्य ने जमीन अधिग्रहण पर उठाए सवाल

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनकी आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है। यदि उनकी कृषि भूमि परियोजना के लिए चली जाती है तो केवल जमीन का नुकसान नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव के जरिए किसानों से जमीन लेने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस आरोप पर प्रशासन या सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

उपजाऊ जमीन के बजाय दूसरे विकल्प की मांग

आरजेडी नेता ने विकास परियोजनाओं के लिए बंजर या कम उपजाऊ जमीन को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि कम कृषि उपयोग वाली जमीन उपलब्ध है तो वहां शहरी विस्तार की योजना बनाई जा सकती है। इससे विकास और किसानों के हित के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। रोहिणी आचार्य ने भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों के अधिकारों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

सैटेलाइट टाउनशिप पर किसान हित का मुद्दा

बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप की योजना का उद्देश्य शहरों के आसपास व्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा देना है। लेकिन जिन इलाकों में इसके लिए जमीन की जरूरत होगी, वहां जमीन मालिकों की सहमति और मुआवजे का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है।

रोहिणी आचार्य ने कहा कि विकास की योजनाओं में किसानों की आजीविका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कृषि भूमि कम होने से खेती के साथ-साथ इससे जुड़े स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

पर्यावरण को लेकर भी चिंता

रोहिणी आचार्य ने टाउनशिप परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर निर्माण होने से हरित क्षेत्र कम हो सकता है और स्थानीय जल व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

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शहरी विस्तार के दौरान सड़क, आवास और दूसरी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण से जमीन के इस्तेमाल का स्वरूप बदलता है। ऐसे में परियोजना की योजना बनाते समय पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप की योजना

राज्य सरकार की ओर से बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप को मंजूरी दिए जाने के बाद जमीन का मुद्दा चर्चा में आया है। अलग-अलग स्थानों पर रैयतों और जमीन मालिकों की ओर से जमीन देने को लेकर विरोध की बात सामने आई है।

इसी बीच सरकार ने जमीन मालिकों से बातचीत का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। नगर विकास एवं आवास विभाग की टीम संबंधित इलाकों में जाकर किसानों और रैयतों से बातचीत करेगी।

जमीन मालिकों को विकल्प देने की तैयारी

सरकार की ओर से जमीन मालिकों के सामने अलग-अलग विकल्प रखने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण को लेकर बनी असहमति को बातचीत के जरिए दूर करना बताया जा रहा है।

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जमीन मालिकों की आपत्तियों और उनकी मांगों को समझने के बाद परियोजना से संबंधित आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रभावित जमीन मालिकों के बीच होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण होगी।

किसानों की सहमति और मुआवजा बनेगा अहम मुद्दा

सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में मुआवजा, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों की आजीविका जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। किसानों के लिए जमीन की कीमत केवल बाजार मूल्य तक सीमित नहीं होती, क्योंकि उससे लगातार होने वाली कृषि आय भी जुड़ी रहती है।

यही वजह है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े किसी भी फैसले में प्रभावित परिवारों की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी माना जाता है। रोहिणी आचार्य ने भी सरकार से इसी दिशा में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की मांग की है।

रियल एस्टेट कंपनियों को फायदा पहुंचने का आरोप

रोहिणी आचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना का वास्तविक लाभ किसानों और आम लोगों की बजाय रियल एस्टेट कंपनियों तथा बड़े निजी कारोबारी समूहों को मिल सकता है।

हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और इस संबंध में सरकार की ओर से ऐसी किसी कंपनी या कारोबारी समूह को लाभ पहुंचाने की योजना की पुष्टि नहीं की गई है। परियोजना की वास्तविक रूपरेखा और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े विवरण सामने आने के बाद ही तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।

विकास बनाम किसान हित की बहस

सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर सामने आए राजनीतिक विवाद ने बिहार में विकास और कृषि भूमि संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। सरकार जहां शहरी विस्तार और आधारभूत ढांचे के विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं विपक्ष किसानों की जमीन और आजीविका को लेकर सवाल उठा रहा है।

अब सरकार के सामने चुनौती है कि टाउनशिप परियोजनाओं के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने के साथ प्रभावित किसानों की चिंताओं को भी दूर किया जाए। नगर विकास विभाग की प्रस्तावित बातचीत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

फिलहाल सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। रोहिणी आचार्य के आरोपों के बाद इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि जमीन मालिकों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से जमीन अधिग्रहण और प्रभावित परिवारों को लेकर क्या व्यवस्था तय की जाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट