सीमावर्ती महिलाओं के लिए SSB ने शुरू की 31 दिवसीय सिलाई ट्रेनिंग, 20 युवतियां ले रहीं प्रशिक्षण
अररिया में SSB की 52वीं बटालियन ने SBI के सहयोग से सीमावर्ती 20 महिलाओं और युवतियों के लिए 31 दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शुरू किया।
निष्कर्ष भारत संवाददाता अररिया: सीमावर्ती इलाकों की महिलाओं और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अररिया में एसएसबी की 52वीं बटालियन ने भारतीय स्टेट बैंक(SSI) के सहयोग से नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत 31 दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस प्रशिक्षण में सीमावर्ती क्षेत्र की कुल 20 युवतियां और महिलाएं हिस्सा ले रही हैं।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और युवतियों को सिलाई का हुनर सिखाकर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागी महिलाएं अपने स्तर पर सिलाई का काम शुरू कर सकती हैं और इसे आय का जरिया बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
एसएसबी और एसबीआई की इस पहल को सीमावर्ती क्षेत्रों में कौशल विकास और महिला सशक्तीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
31 दिनों तक महिलाओं को दी जाएगी सिलाई की ट्रेनिंग
नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए इस 31 दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण में महिलाओं को सिलाई से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल तरीके से भी सिलाई का काम सिखाया जाएगा।
प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि कार्यक्रम पूरा होने के बाद महिलाएं सिलाई के हुनर का इस्तेमाल अपने घर या स्थानीय स्तर पर रोजगार शुरू करने के लिए कर सकें।
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए घर के आसपास रोजगार का अवसर मिलने से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने में मदद मिल सकती है। साथ ही, वे अपने परिवार की आय में भी योगदान दे सकेंगी।
20 युवतियां और महिलाएं ले रही हैं प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीमावर्ती क्षेत्र की 20 युवतियां और महिलाएं शामिल हुई हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सिलाई मशीन के इस्तेमाल से लेकर कपड़ों की सिलाई से जुड़ी जरूरी तकनीकों और काम करने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम का लक्ष्य प्रतिभागियों को ऐसा हुनर उपलब्ध कराना है, जिसका इस्तेमाल वे प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी लगातार कर सकें।
महिलाएं चाहें तो अपने घर से सिलाई का काम शुरू कर सकती हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर सिलाई सेंटर या छोटा व्यवसाय शुरू करके भी आय अर्जित करने का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
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SSB कमांडेंट ने बताया जरूरी कदम
कार्यक्रम की शुरुआत के मौके पर 52वीं बटालियन एसएसबी के कमांडेंट मितुल कुमार ने महिलाओं और युवतियों को हुनर सिखाने को नागरिक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की महिलाओं और युवतियों को कौशल प्रशिक्षण देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिलता है।
एसएसबी की ओर से इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को रोजगार से जुड़े कौशल उपलब्ध कराने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

SSB और SBI के अधिकारी रहे मौजूद
सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान एसएसबी के कई अधिकारी और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस अवसर पर 52वीं बटालियन के उप कमांडेंट उदय कुमार और विनोद मीणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
वहीं, भारतीय स्टेट बैंक की ओर से निदेशक किशोर कुमार यादव, संकाय सदस्य श्री राम मोहन, शशांक शेखर, ऋषि कुमार और दीनदयाल समेत अन्य कर्मचारी कार्यक्रम में शामिल हुए।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल महिलाओं को प्रोत्साहित किया और उन्हें प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत कौशल विकास पर जोर
एसएसबी की ओर से चलाए जाने वाले नागरिक कल्याण कार्यक्रमों का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की सुविधाओं और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ना है।
इसी कड़ी में महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। सिलाई जैसे रोजगारपरक कौशल के जरिए महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम करने का अवसर मिल सकता है।
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उन महिलाओं के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकते हैं, जो घर से बाहर जाकर नियमित नौकरी नहीं कर सकतीं, लेकिन किसी हुनर के माध्यम से अपनी आय बढ़ाना चाहती हैं।
महिलाओं को मिलेगा खुद का रोजगार शुरू करने का मौका
सिलाई प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागी महिलाएं अपने हुनर का इस्तेमाल कर अलग-अलग तरीकों से रोजगार शुरू कर सकती हैं। वे घर से कपड़ों की सिलाई, बच्चों के कपड़े तैयार करने, ब्लाउज और अन्य परिधान सिलने जैसे काम कर सकती हैं।
इसके अलावा अनुभव बढ़ने के बाद महिलाएं अपना छोटा सिलाई सेंटर भी शुरू कर सकती हैं। इससे उन्हें नियमित आय का साधन मिल सकता है।
स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने वाली ऐसी पहल परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मददगार साबित हो सकती है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगी सीमावर्ती महिलाएं
सीमावर्ती क्षेत्रों में महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। जब महिलाओं के पास कोई रोजगारपरक हुनर होता है तो उनके लिए आय का अपना साधन तैयार करने की संभावना बढ़ती है।
अररिया में शुरू किया गया यह 31 दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण भी इसी उद्देश्य से जुड़ा है। कार्यक्रम के जरिए 20 युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपने हुनर का इस्तेमाल आगे बढ़ने के लिए कर सकें।
SSB और SBI की इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाओं को सिलाई का हुनर सीखने के साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। 31 दिवसीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन महिलाओं के लिए अपने स्तर पर काम शुरू करने की नई संभावनाएं तैयार होंगी।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
