गोपालगंज में सेप्टिक टैंक में चार मजदूरों की मौत, दम घुटने से हुआ हादसा, एक घायल
गोपालगंज में सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस से चार मजदूरों की मौत
निष्कर्ष भारत, संवाददाता गोपालगंज। जिले के गोपालपुर थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में चार मजदूरों की मौत हो गई। सवनही जगदीश गांव में निर्माणाधीन शौचालय की सेप्टिक टैंक में सेंटिंग खोलने के लिए उतरे मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आ गए। कुछ ही देर में एक-एक कर चारों मजदूर टैंक के अंदर बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। मजदूरों को बचाने के प्रयास में एक अन्य युवक भी जहरीली गैस की चपेट में आया, हालांकि उसे समय रहते बाहर निकाल लिया गया।
सेंटिंग खोलने टैंक में उतरा पहला मजदूर
जानकारी के अनुसार, सवनही जगदीश गांव में एक नए मकान के निर्माण के साथ सेप्टिक टैंक की टंकी बनाई जा रही थी। टंकी की ढलाई पूरी होने के बाद उसके अंदर लगी लकड़ी और बांस की सेंटिंग हटाने का काम होना था। इसी काम के लिए शनिवार की सुबह मजदूर मौके पर पहुंचे थे।
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बताया जाता है कि सबसे पहले बंटी नाम का मजदूर सेंटिंग खोलने के लिए सेप्टिक टैंक के भीतर उतरा। काफी देर तक जब वह बाहर नहीं आया और अंदर से कोई आवाज सुनाई नहीं दी, तो वहां मौजूद मजदूरों को चिंता हुई। इसके बाद उसे देखने के लिए एक-एक कर तीन अन्य मजदूर भी टैंक में उतर गए।
सेप्टिक टैंक में जमा थी जहरीली गैस
सेप्टिक टैंक लंबे समय से बंद था। आशंका है कि बंद रहने के कारण सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस जमा हो गई थी। सेप्टिक टैंक में उतरते ही मजदूर इस गैस की चपेट में आ गए और कुछ ही समय में उनकी हालत बिगड़ गई। चारों मजदूर अंदर ही अचेत होकर गिर पड़े।
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बाहर मौजूद लोगों को जब काफी देर तक किसी की गतिविधि दिखाई नहीं दी तो हादसे की आशंका हुई। इसके बाद गांव में शोर मच गया और आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे। स्थानीय लोगों ने मजदूरों को बाहर निकालने के लिए काफी प्रयास किया।
बचाने पहुंचे युवक की भी बिगड़ी हालत
चार मजदूरों के टैंक के अंदर फंसे होने की जानकारी के बाद सेराज नाम का एक अन्य मजदूर भी उन्हें बचाने के लिए अंदर चला गया। लेकिन जहरीली गैस का असर उस पर भी होने लगा और उसकी हालत बिगड़ गई। वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे तुरंत बाहर निकाल लिया, जिससे उसकी जान बच गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

इस घटना ने मौके पर मौजूद लोगों में दहशत पैदा कर दी। ग्रामीणों को यह समझने में भी काफी परेशानी हुई कि बंद टैंक के अंदर बिना सुरक्षा इंतजाम के उतरना कितना खतरनाक हो सकता है।
दीवार तोड़कर निकाले गए चारों मजदूर
ग्रामीणों ने मजदूरों को बाहर निकालने के लिए टंकी की दीवार तोड़ने का फैसला किया। काफी मशक्कत के बाद सीढ़ी की मदद से चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया। उस समय सभी की हालत गंभीर थी और वे बेहोशी की अवस्था में थे।
परिजन और ग्रामीण उन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर फैलते ही गांव में मातम पसर गया और मृतकों के घरों में चीख-पुकार मच गई।
मृतकों की हुई पहचान
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान सवनही पट्टी गांव निवासी राकेश बैठा (30), मो. गयासुद्दीन के पुत्र जावेद आलम (31), सवनहीं वृत टोला गांव निवासी विश्वनाथ यादव के पुत्र उमेश यादव (34) और शब्बू आलम (18) के रूप में हुई है।
एक साथ चार मजदूरों की मौत से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। मृतकों के परिवारों के लिए यह हादसा गहरा सदमा लेकर आया है। खासकर 18 वर्षीय शब्बू आलम की मौत ने परिवार को झकझोर दिया है।
नाना ने कहा- नाती ही था बुढ़ापे का सहारा
मृतक शब्बू आलम के नाना इस्लाम अंसारी ने बताया कि उनका कोई बेटा नहीं है। उन्होंने अपने नाती को अपने पास रखकर पाल-पोसकर बड़ा किया था। उन्हें उम्मीद थी कि बड़ा होकर शब्बू बुढ़ापे में उनका सहारा बनेगा। लेकिन सेप्टिक टैंक में दम घुटने से उसकी मौत हो गई।
शब्बू की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक, वह कम उम्र में ही मजदूरी कर परिवार की मदद कर रहा था।
परिजनों ने बताई हादसे की वजह
मृतक राकेश बैठा के परिजन विशाल कुमार ने बताया कि नवनिर्मित मकान में शौचालय की सेप्टिक टैंक बनाई गई थी। ढलाई के बाद सेंटिंग खोलने के लिए मजदूर टैंक में गए थे। इसी दौरान एक मजदूर के अंदर फंसने के बाद बाकी मजदूर भी उसे देखने के लिए अंदर उतरते गए और एक-एक कर चारों की जान चली गई।

घटना की जानकारी मिलते ही गोपालपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और सेप्टिक टैंक के अंदर किस तरह की गैस जमा थी, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। शुरुआती तौर पर जहरीली गैस के कारण दम घुटने को हादसे की वजह माना जा रहा है।
यह घटना एक बार फिर बंद और गहरे टैंकों में बिना सुरक्षा इंतजाम के प्रवेश करने के खतरे को सामने लाती है। ऐसे स्थानों के अंदर जमा गैस दिखाई नहीं देती, लेकिन कुछ ही समय में जानलेवा साबित हो सकती है। गोपालगंज के इस हादसे में चार परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया, जबकि एक अन्य मजदूर बाल-बाल बचा।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
