राघोपुर से पटना आने-जाने पर लगेगा टोल? 60-80 का शुल्क की चर्चा से नाराज हुए लोग, बोले- ‘यह जबरदस्ती का नया टैक्स’
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन महासेतु पर प्रस्तावित टोल को लेकर राघोपुर के लोगों में नाराजगी, पटना आने-जाने के लिए ₹60-80 शुल्क लगने की चर्चा।
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना/राघोपुर: बिहार के सबसे चर्चित विधानसभा क्षेत्रों में शामिल राघोपुर में कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन महासेतु के निर्माण से जहां लोगों को सालभर सड़क संपर्क मिलने की बड़ी राहत मिली है, वहीं अब प्रस्तावित टोल टैक्स को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। करीब 3 लाख की आबादी वाले राघोपुर के लोगों के लिए यह पुल पटना और उत्तर बिहार से जुड़ने वाली नई लाइफलाइन बनकर सामने आया है। लेकिन पुल के राघोपुर एप्रोच रोड पर टोल प्लाजा बनाए जाने की तैयारी ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर राघोपुर से बाहर निकलने और पटना आने-जाने के लिए हर बार टोल देना पड़ा, तो यह उनके दैनिक जीवन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाएगा। सूत्रों के अनुसार, कार से यात्रा करने वाले लोगों को ₹60 से ₹80 तक टोल शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि टोल की आधिकारिक दरों की घोषणा अभी नहीं की गई है।

1. राघोपुर एप्रोच रोड पर बन रहा है टोल प्लाजा
गंगा नदी पर पटना के पास बना कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल अब तैयार हो चुका है और इस पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। पुल का औपचारिक उद्घाटन अभी बाकी बताया जा रहा है। इस महासेतु के जरिए पटना, राघोपुर और वैशाली के बीच सड़क संपर्क मजबूत हुआ है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राघोपुर एप्रोच रोड पर टोल प्लाजा तैयार किया जा रहा है। टोल शुरू होने के बाद राघोपुर में प्रवेश करने और वहां से बाहर निकलने वाले वाहनों को शुल्क देना पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था उनके लिए अलग तरह की परेशानी पैदा कर सकती है, क्योंकि राघोपुर के लोगों के पास पटना और आसपास के इलाकों तक पहुंचने के लिए यही नया पुल सबसे आसान और महत्वपूर्ण मार्ग बन गया है।
2. ₹60 से ₹80 टोल की चर्चा से बढ़ी नाराजगी
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कार से पटना की ओर आने-जाने वाले लोगों को ₹60 से ₹80 के बीच टोल टैक्स देना पड़ सकता है। बस, ट्रक और अन्य बड़े वाहनों के लिए शुल्क उनके आकार और श्रेणी के अनुसार अधिक हो सकता है।
हालांकि अभी तक संबंधित विभाग की ओर से टोल की अंतिम और आधिकारिक दरों का सार्वजनिक ऐलान नहीं हुआ है। इसके बावजूद संभावित शुल्क को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।
राघोपुर निवासी पिंटू सिंह का कहना है कि स्थानीय लोगों से सिर्फ पुल के इस्तेमाल के लिए अलग से टोल लेना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि राघोपुर के निवासियों को रोजमर्रा के काम के लिए पटना और दूसरे इलाकों में जाना पड़ता है, ऐसे में बार-बार टोल भुगतान करना उनकी जेब पर असर डालेगा।
वहीं अन्य स्थानीय निवासियों का भी कहना है कि इस मार्ग का सबसे अधिक उपयोग राघोपुर के लोग ही करेंगे। इसलिए वे स्थानीय निवासियों के लिए टोल व्यवस्था में राहत या विशेष प्रावधान की मांग कर रहे हैं।

3. सब्जी, व्यापार और रोजमर्रा के काम पर पड़ेगा असर?
राघोपुर मुख्य रूप से दियारा क्षेत्र रहा है और यहां के कई परिवार खेती और स्थानीय कारोबार से जुड़े हैं। लोगों को सब्जी, अनाज और अन्य उत्पादों को बेचने के लिए पटना और आसपास के बाजारों तक जाना पड़ता है।
स्थानीय निवासी जयराम यादव का कहना है कि किसानों और छोटे कारोबारियों को बार-बार यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में हर आने-जाने पर टोल शुल्क देना उनके लिए अतिरिक्त खर्च बन सकता है।
लोगों का कहना है कि पुल बनने से निश्चित रूप से जीवन आसान हुआ है, लेकिन अगर रोजमर्रा की आवाजाही महंगी हो जाएगी तो इसका असर आम परिवारों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार टोल नीति तय करते समय राघोपुर के स्थायी निवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखे।
4. कभी बारिश में टापू बन जाता था राघोपुर
कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु बनने से पहले राघोपुर के लोगों को लंबे समय तक सड़क संपर्क की समस्या का सामना करना पड़ता था। बारिश और बाढ़ के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हो जाता था।
कई बार राघोपुर दियारा क्षेत्र की स्थिति लगभग टापू जैसी हो जाती थी और लोगों को नाव के सहारे यात्रा करनी पड़ती थी। इससे मरीजों, छात्रों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी होती थी।
नए पुल ने इस स्थिति को काफी हद तक बदल दिया है। अब राघोपुर का सड़क संपर्क साल के 12 महीने पटना और हाजीपुर की दिशा से बेहतर रहने की उम्मीद है।
5. 4.57 किलोमीटर के हिस्से ने बदली राघोपुर की तस्वीर
महासेतु के कच्ची दरगाह से राघोपुर दियारा तक करीब 4.57 किलोमीटर के हिस्से में वाहनों की आवाजाही शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
पहले जहां नदी पार करने के लिए नाव पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब सड़क मार्ग उपलब्ध होने से यात्रा आसान हो गई है। यही कारण है कि स्थानीय लोग पुल को राघोपुर के विकास के लिए ऐतिहासिक बदलाव मान रहे हैं।
हालांकि इसी लाइफलाइन पर प्रस्तावित टोल प्लाजा अब लोगों के बीच नई बहस का विषय बन गया है।
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6. गांधी सेतु समेत अन्य पुलों पर कम होगा दबाव
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन महासेतु का महत्व केवल राघोपुर तक सीमित नहीं है। इस पुल के शुरू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा।
इससे गांधी सेतु, कोईलवर पुल और वीर कुंवर सिंह सेतु जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की संभावना है।
विशेष रूप से उत्तर बिहार की ओर जाने वाले वाहनों को पटना शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है। इससे यात्रा समय और जाम दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
7. पटना रिंग रोड और एक्सप्रेसवे से भी मजबूत होगा संपर्क
इस महासेतु को भविष्य की बड़ी सड़क परियोजनाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पटना रिंग रोड और निर्माणाधीन आमस-दरभंगा फोरलेन एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बेहतर सड़क नेटवर्क के जरिए दानापुर, दीघा, शिवाला, बिहटा, कन्हौली, डुमरी, नयागांव, तेलवारीचक, कच्ची दरगाह और सबलपुर जैसे क्षेत्रों में परिवहन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
8. विकास की खुशी के बीच टोल पर बड़ी बहस
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन महासेतु राघोपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास की नई उम्मीद लेकर आया है। सड़क संपर्क बेहतर होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान हो सकती है।
लेकिन टोल टैक्स को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी सरकार के सामने एक नई चुनौती बन सकती है। लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि राघोपुर के स्थायी निवासियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था की जाए।
फिलहाल सभी की नजर टोल की आधिकारिक दरों और सरकार की अंतिम नीति पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि राघोपुर के लोगों को पटना आने-जाने के लिए वास्तव में कितना शुल्क देना होगा और क्या स्थानीय निवासियों को किसी तरह की राहत मिलती है।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
