परीक्षा सुधार के लिए सरकार ने गठित की कमेटी, हरीश कुमार बनाए गए अध्यक्ष, अधिसूचना जारी

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परीक्षा सुधार के लिए कमेटी बनी, जस्टिस हरीश कुमार अध्यक्ष नियुक्त

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। बिहार में परीक्षा सुधार की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस हरीश कुमार को इस विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में परीक्षा संचालन, पारदर्शिता और भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था में सुधार को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने की उम्मीद है।

विशेषज्ञ समिति राज्य सरकार के अधीन आने वाले विभिन्न परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और अन्य भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित परीक्षाओं की व्यवस्था का अध्ययन करेगी। इसके बाद समिति की ओर से परीक्षा प्रणाली में परीक्षा सुधार को लेकर सरकार को अनुशंसाएं दी जाएंगी।

परीक्षा सुधार के लिए बनी विशेषज्ञ समिति

सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक राज्य सरकार के अधीन विभिन्न संस्थानों की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रावधान किया गया था। इसी प्रावधान के तहत अब जस्टिस हरीश कुमार को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

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परीक्षा सुधार समिति परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग पहलुओं का अध्ययन कर सकती है। इसमें परीक्षा आयोजन, संचालन, पारदर्शिता और भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया शामिल हो सकती है। समिति के अध्ययन और सुझावों के आधार पर सरकार आगे आवश्यक बदलावों पर निर्णय ले सकती है।

कैसे हुई जस्टिस हरीश कुमार की नियुक्ति?

अधिसूचना में बताया गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 15498, दिनांक 24 अगस्त 2026 के अनुरोध के बाद पटना हाईकोर्ट के महाप्रबंधक की ओर से 28 अगस्त 2026 को प्रस्ताव भेजा गया था।

इस प्रस्ताव में जस्टिस हरीश कुमार को परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष बनाए जाने की बात कही गई थी। प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने नियुक्ति को मंजूरी देते हुए संबंधित अधिसूचना जारी कर दी।

परीक्षा सुधार की नई अधिसूचना में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 23 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 15441 की कंडिका-7 का भी उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य में परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की व्यवस्था की गई थी।

किन परीक्षाओं पर पड़ेगा असर?

विशेषज्ञ समिति के दायरे में राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले विभिन्न परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और अन्य भर्ती एजेंसियों की परीक्षाएं आ सकती हैं। इसका मतलब है कि प्रतियोगी और सरकारी भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा सकती है।

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बिहार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हर साल विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह का बदलाव बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, समिति किन-किन परीक्षाओं और संस्थानों की व्यवस्था की समीक्षा करेगी, इसका अंतिम दायरा आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगा।

परीक्षा सुधार में पारदर्शिता पर जोर

सरकार की ओर से गठित समिति के सामने परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी। परीक्षा से पहले की प्रक्रिया से लेकर परीक्षा आयोजन और इसके बाद की व्यवस्थाओं तक अलग-अलग स्तर पर सुधार के सुझाव सामने आ सकते हैं।

समिति परीक्षा संचालन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का अध्ययन कर सकती है। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने, अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था बेहतर करने और भर्ती परीक्षाओं के संचालन को प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार किया जा सकता है।

राज्य में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए सरकार का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BPSC और BSSC समेत इन संस्थानों को भेजी गई सूचना

सामान्य प्रशासन विभाग ने विशेषज्ञ समिति के गठन से जुड़ी अधिसूचना की प्रतिलिपि कई विभागों और संबंधित अधिकारियों को भेजी है। इसमें वित्त विभाग, महालेखाकार, सभी विभागों एवं विभागाध्यक्षों के साथ राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भी सूचना भेजी गई है।

इसके अलावा पटना हाईकोर्ट के महाप्रबंधक समेत संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को भी अधिसूचना की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई गई है।

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC), बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC), बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग और बिहार पुलिस सेवा आयोग समेत अन्य संबंधित संस्थानों को भी इसकी जानकारी भेजी गई है।

परीक्षा सुधार को लेकर आगे क्या होगा?

जस्टिस हरीश कुमार की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति के बाद अब परीक्षा सुधार से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। समिति राज्य की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था का अध्ययन कर सकती है और उसके आधार पर सरकार को अपनी अनुशंसाएं सौंपेगी।

इन अनुशंसाओं में परीक्षा आयोजन से लेकर प्रक्रिया और पारदर्शिता तक अलग-अलग पहलुओं पर सुझाव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, समिति की ओर से किन बिंदुओं पर विशेष रूप से सुझाव दिए जाएंगे, यह उसकी कार्यवाही आगे बढ़ने के बाद स्पष्ट होगा। सरकार इन अनुशंसाओं को किस रूप में लागू करेगी, यह भी समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद तय होगा।

विभागीय वेबसाइट पर अपलोड होगी अधिसूचना

सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने आईटी मैनेजर को अधिसूचना विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। इससे संबंधित अधिकारी और संस्थान सरकारी स्तर पर जारी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

विशेषज्ञ समिति के गठन को बिहार की प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था की समीक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि समिति की अनुशंसाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आने वाले समय में परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विशेषज्ञ समिति अपनी समीक्षा में किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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