नेपाल में तबाही का भयावह मंजर, मौतों का आंकड़ा 1127 पहुंचा, 4858 लोग अब भी लापता

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नेपाल में जलप्रलय के बाद भयावह मंजर

निष्कर्ष भारत संवाददाता-काठमांडू: पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। बाढ़, मलबे और प्राकृतिक विनाश के इस भयावह दौर में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल पुलिस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1127 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

आपदा को आए एक सप्ताह बीतने के बाद भी राहत और बचाव अभियान पूरी रफ्तार से जारी है। सुरक्षा बल, पुलिस और रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में मलबे के नीचे दबे लोगों तथा लापता नागरिकों की तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं। नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब भी उन हजारों लोगों तक पहुंचना है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक 4858 लोग लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। भारी तबाही के बीच राहत और बचाव कर्मियों का अभियान लगातार जारी है।

चितवन में सबसे ज्यादा 348 शव बरामद

नेपाल पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्राकृतिक आपदा ने देश के कई जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। सबसे अधिक मौतें चितवन जिले में दर्ज की गई हैं।

चितवन से अब तक 348 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है।

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नेपाल पुलिस के अनुसार प्रभावित जिलों से बरामद शवों का आंकड़ा इस प्रकार है—

  • चितवन: 348 शव
  • नवलपरासी पूर्व: 217 शव
  • नवलपरासी पश्चिम: 190 शव
  • नुवाकोट: 155 शव
  • गोरखा: 66 शव
  • धादिङ: 59 शव
  • रसुवा: 45 शव
  • तनहुं: 38 शव

इन जिलों में कई गांवों और कस्बों को बाढ़ और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण शुरुआती दिनों में राहत और बचाव टीमों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

एक सप्ताह बाद भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा के एक सप्ताह बाद भी नेपाल में बचाव अभियान समाप्त नहीं हुआ है। पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाश अभियान चला रही हैं।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 6541 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो बाढ़ग्रस्त और हाई-रिस्क इलाकों में फंसे हुए थे।

रेस्क्यू टीमों के सामने कई चुनौतियां हैं। मलबे से भरे रास्ते, क्षतिग्रस्त सड़कें, तेज बहाव वाले इलाके और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र बचाव कार्य को मुश्किल बना रहे हैं। इसके बावजूद राहत कर्मी लगातार प्रभावित गांवों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

अभी भी हजारों लोगों के लापता होने के कारण प्रशासन की चिंता बनी हुई है। 4858 लापता लोगों की तलाश के लिए अलग-अलग इलाकों में खोज अभियान चलाया जा रहा है।

7912 पुलिसकर्मी राहत और बचाव में जुटे

नेपाल पुलिस ने इस बड़े संकट से निपटने के लिए बड़ी संख्या में अपने जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खोज अभियान, राहत सामग्री वितरण, शवों के प्रबंधन और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए कुल 7912 पुलिसकर्मी काम कर रहे हैं।

पुलिस की टीमें केवल लापता लोगों की तलाश तक सीमित नहीं हैं। वे कई इलाकों में मलबे और बाधित रास्तों को साफ कराने में भी मदद कर रही हैं। साथ ही, उन परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है, जो अभी भी भूस्खलन या बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं।

प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ हाई-रिस्क इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।

शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

इस आपदा के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उनकी पहचान करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक 1113 शवों का पोस्टमॉर्टम और कानूनी पहचान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इनमें से केवल 95 शवों को उनके परिजनों को सौंपा गया है

बड़ी संख्या में शवों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, 911 अज्ञात शवों का विवरण और तस्वीरें नेपाल पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की पहचान करने में मदद कर सकें।

आपदा की भयावहता के कारण कई शवों की पहचान केवल चेहरे या सामान्य शारीरिक पहचान के आधार पर करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे मामलों में वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लिया जा रहा है।

पहले भी कुछ शवों पर एक से अधिक परिवारों ने अपना दावा किया था, जिसके बाद प्रशासन को डीएनए जांच जैसी प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ा।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास से शुरू हुई तबाही

अधिकारियों के मुताबिक, इस विनाशकारी आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई प्राकृतिक घटना के बाद हुई।

बताया जा रहा है कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ और चट्टानों के खिसकने या ढहने के कारण अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया। इसके बाद कई क्षेत्रों में अचानक भयंकर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

यह प्राकृतिक आपदा 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के कई हिस्सों में तेजी से फैली। देखते ही देखते कई गांव और कस्बे पानी और मलबे की चपेट में आ गए।

तेज बहाव अपने साथ चट्टानें, मिट्टी और भारी मलबा लेकर आया। कई इलाकों में घरों, सड़कों और अन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा।

कई परिवारों का अब तक नहीं मिला कोई सुराग

नेपाल में इस आपदा ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। कई लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं, जबकि हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में लोगों की सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार के सदस्यों का पता लगाना है। प्रशासन की ओर से लापता लोगों की सूची तैयार कर खोज अभियान चलाया जा रहा है।

हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से यह आशंका भी बढ़ रही है कि मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है।

रेस्क्यू टीमें लगातार मलबे की जांच कर रही हैं और उन स्थानों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं जहां अभी तक राहत कार्य पूरी तरह नहीं पहुंच सका है।

नेपाल के लिए सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदियों में एक

26 अगस्त को आई इस आपदा को नेपाल की सबसे गंभीर प्राकृतिक त्रासदियों में से एक माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर जनहानि, हजारों लोगों का लापता होना और कई जिलों में भारी तबाही ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है।

एक सप्ताह बाद भी तबाही का वास्तविक आंकलन पूरी तरह नहीं हो सका है। कई प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण नुकसान का पूरा विवरण आने में समय लग सकता है।

फिलहाल नेपाल सरकार, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना, शवों की पहचान करना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है।

नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 1127 लोगों की जान जा चुकी है, 6541 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है और 4858 लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राहत और बचाव अभियान की सफलता पर ही हजारों परिवारों की उम्मीद टिकी हुई है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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