बिहार में बाढ़ की चपेट में 41.45 लाख लोग, बीमारियों का खतरा, कचरा और दूषित पानी बनी बड़ी समस्या
बिहार में बाढ़ से 41.45 लाख प्रभावित
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में बाढ़ की स्थिति कई जिलों में अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 14 जिलों में 41.45 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। पानी उतरने के साथ अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में गाद, कचरा और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 84 प्रखंडों की 517 ग्राम पंचायतों में बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है।
बाढ़ के बाद बीमारियों का बढ़ा खतरा
बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के बाद प्रभावित इलाकों में नई चुनौती सामने आ रही है। पानी के साथ बहकर आई गाद और जमा कचरे के कारण कई जगहों पर गंदगी की स्थिति बनी हुई है। दूषित पानी और खराब स्वच्छता व्यवस्था से डायरिया समेत कई जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। ऐसे में डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
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प्रशासन के सामने अब राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य और साफ-सफाई व्यवस्था को मजबूत करना भी चुनौती है।
राहत कार्यों में तेजी, बढ़ाए गए इंतजाम
बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने कई स्तर पर संसाधन बढ़ाए हैं। 8 सितंबर को 22,938 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए गए थे। अगले दिन यानी 9 सितंबर को यह संख्या बढ़कर 29,437 हो गई।
जरूरतमंद परिवारों को बारिश और बाढ़ से बचाने के लिए पॉलिथीन शीट का वितरण भी बढ़ाया गया है। 8 सितंबर तक 1,29,489 पॉलिथीन शीट बांटी गई थीं, जबकि 9 सितंबर तक इनकी संख्या 1,99,814 पहुंच गई।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में 557 चिकित्सा शिविर
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी प्रशासन ने व्यवस्था बढ़ाई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित चिकित्सा शिविरों की संख्या 386 से बढ़ाकर 557 कर दी गई है। इन शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को प्राथमिक उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ के बाद संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। प्रभावित क्षेत्रों में साफ पानी, दवाइयों और स्वास्थ्य जांच की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सामुदायिक रसोई से लाखों लोगों को भोजन
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई की संख्या भी बढ़ाई गई है। पहले 450 सामुदायिक रसोई संचालित थीं, जिन्हें बढ़ाकर 793 कर दिया गया है। इन रसोइयों के माध्यम से अब तक करीब 22.79 लाख लोगों को सुबह और शाम भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।

राहत शिविरों में भी लोगों के रहने, भोजन और इलाज की व्यवस्था की गई है। राज्य में 15 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 11,255 बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने की व्यवस्था है।
1,872 नावों से आवागमन जारी
जिन इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित है, वहां लोगों के निष्क्रमण और आवागमन के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 1,872 नावें चलाई जा रही हैं। इनके जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में मवेशी भी हैं। उनके लिए अब तक 5,464 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है। इससे पशुपालकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
राहत अभियान में SDRF और NDRF की टीमें
बचाव अभियान में राज्य और केंद्र की आपदा राहत टीमें भी तैनात हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 तथा एनडीआरएफ की 10 टीमें मैदान में हैं। इन टीमों की मदद से जरूरत वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने और आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
पानी कम होने के बावजूद बिहार में बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया है और इसमें कमी की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि राज्य की कई अन्य नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कोसी बैराज से 1,63,525 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है और इसमें बढ़ने की प्रवृत्ति बताई गई है। इससे संबंधित इलाकों में निगरानी और सतर्कता बनाए रखना जरूरी हो गया है।

बारिश ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश तथा एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। बारिश होने पर जलस्तर और स्थानीय जलभराव की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
सरकार का जोर राहत सामग्री, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षित आवागमन को लगातार बनाए रखने पर है। वहीं, पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई और दूषित पानी से बचाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। बिहार में बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों के लिए आने वाले दिन राहत के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
