मणिपुर में फिर बिगड़े हालात, 22 तक स्कूल कॉलेज बंद, सुरक्षा बलों की विशेष कंपनी तैनात

मणिपुर

मणिपुर में स्कूल-कॉलेज बंद, NRC की मांग पर JAFD का आंदोलन तेज

निष्कर्ष भारत, संवाददाता इंफाल। मणिपुर में कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को तीन दिनों के लिए बंद रखने का फैसला किया है। राज्य शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार 20 अगस्त से 22 अगस्त तक राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई बंद रहेगी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी NRC को अपडेट करने की मांग को लेकर राज्य में विरोध-प्रदर्शन और 48 घंटे की हड़ताल चल रही है।

बुधवार को हड़ताल के दूसरे दिन मणिपुर के कई घाटी जिलों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं, नेताओं के पुतले जलाए और कई स्थानों पर सड़कों को बाधित किया। आंदोलन के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसी बीच गुरुवार से सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया है।

मणिपुर में 20 से 22 अगस्त तक बंद रहेंगे शैक्षणिक संस्थान

राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए 20 अगस्त से 22 अगस्त तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। इसमें स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज और विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।

देखे खबर हमारे यूट्यूब चैनल पर: राजद का राजभवन मार्च! डाकबंगला चौराहे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

आदेश का दायरा सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE या अन्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों को भी इसके तहत बंद रखने का निर्देश दिया गया है। सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों पर भी यह आदेश लागू होगा।

स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक पर असर

सरकार के इस फैसले से मणिपुर में स्कूली शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा की गतिविधियां भी तीन दिनों के लिए प्रभावित रहेंगी। शिक्षा विभाग ने सभी उपायुक्तों, क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों और संबंधित निदेशकों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आदेश की जानकारी स्कूलों और संस्थानों तक पहुंचाने को कहा है।

इस फैसले का मुख्य कारण शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति बताई गई है। सरकार का उद्देश्य किसी संभावित अप्रिय स्थिति से बचना और विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना माना जा रहा है।

NRC अपडेट की मांग को लेकर JAFD का आंदोलन

मणिपुर में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब ‘कैम्पेन फॉर जस्ट एंड फेयर डीलिमिटेशन’ यानी JAFD की ओर से 48 घंटे की हड़ताल की जा रही है। संगठन की प्रमुख मांग यह है कि राज्य में जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी NRC को अपडेट किया जाए।

इसे भी पढ़िए….बिहार में भ्रष्टाचार और घोटाले को लेकर तेजस्वी का बड़ा हमला, कहा- युवाओं के भविष्य से हो रहा खिलवाड़, दशरथ मांझी के लिए की बड़ी मांग

JAFD का तर्क है कि जनगणना और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं से पहले नागरिकों से संबंधित रिकॉर्ड को स्पष्ट और अद्यतन किया जाना जरूरी है। इसी मांग को लेकर संगठन ने आंदोलन शुरू किया है। बुधवार को हड़ताल का दूसरा दिन था और राज्य के कई हिस्सों में इसका असर देखने को मिला।

मणिपुर के घाटी जिलों में प्रदर्शन

हड़ताल के दौरान मणिपुर के घाटी जिलों में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गईं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कुछ स्थानों पर नेताओं के पुतले भी जलाए।

इंफाल पूर्व जिले के खुरई लामलोंग इलाके में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम के पुतले जलाए। इसके अलावा इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर और थौबल जिलों में भी आंदोलन का असर दिखाई दिया।

सड़कों पर प्रदर्शन से आवाजाही प्रभावित

बुधवार को मणिपुर के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आवाजाही रोकने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार कुछ जगहों पर निजी वाहनों और सुरक्षा बलों के वाहनों को भी आगे बढ़ने से रोका गया।

बंद समर्थकों ने कई वाहनों को वापस लौटने के लिए कहा। इससे स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। आंदोलन के कारण राज्य के सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ने लगा है। JAFD ने गुरुवार से सभी सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का आह्वान किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

मणिपुर में जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम भी हुआ रद्द

हड़ताल का असर जनगणना से जुड़ी तैयारियों पर भी पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार थौबल जिले में पर्यवेक्षकों, गणनाकर्ताओं और क्षेत्रीय प्रशिक्षकों के लिए आयोजित जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आंदोलन की मुख्य मांग ही जनगणना प्रक्रिया से पहले NRC को अपडेट करने से जुड़ी है। ऐसे में जनगणना से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रभावित होना प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है।

प्रशासन को अब एक तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दूसरी तरफ जनगणना से जुड़ी तैयारियों को आगे बढ़ाने के बीच संतुलन बनाना होगा।

मणिपुर में सरकारी कामकाज के बहिष्कार का ऐलान

JAFD ने 48 घंटे की हड़ताल के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। संगठन की ओर से गुरुवार से सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का आह्वान किया गया है।

यदि बड़ी संख्या में लोग सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करते हैं तो इसका असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ सकता है। सरकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों, दस्तावेजों और अन्य सेवाओं से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

हालांकि, आंदोलन का वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। प्रशासन की ओर से स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की चुनौती

मणिपुर लंबे समय से कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे माहौल में किसी भी बड़े विरोध प्रदर्शन या बंद के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम लोगों की सुरक्षा और सामान्य आवाजाही बनाए रखना होती है।

स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद करने का फैसला भी इसी व्यापक सुरक्षा चिंता से जुड़ा है। शिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और कर्मचारी मौजूद रहते हैं। ऐसे में तनावपूर्ण स्थिति के बीच उन्हें संस्थानों में बुलाना प्रशासन के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

सरकार ने फिलहाल तीन दिनों के लिए शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का निर्णय लिया है। आगे की स्थिति को देखते हुए इस फैसले में बदलाव की जरूरत पड़ती है या नहीं, यह प्रशासनिक समीक्षा पर निर्भर करेगा।

NRC को लेकर क्या है विवाद?

राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी NRC का मुद्दा नागरिकों की पहचान और रिकॉर्ड से जुड़ा है। मणिपुर में JAFD की ओर से मांग की जा रही है कि जनगणना से पहले NRC को अपडेट किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे नागरिक रिकॉर्ड को लेकर अधिक स्पष्टता आएगी और भविष्य की प्रशासनिक प्रक्रिया मजबूत होगी।

वहीं, इस मांग को लेकर आंदोलन का तरीका और इसके कारण सामान्य जनजीवन पर पड़ने वाला प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। सड़कों पर प्रदर्शन और सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार से आम लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या रुख रहता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

तीन दिनों की बंदी के बाद मणिपुर में क्या होगा?

मणिपुर में 20 से 22 अगस्त तक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रहने के बाद स्थिति सामान्य होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी। यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार होता है तो शैक्षणिक संस्थानों में गतिविधियां दोबारा शुरू की जा सकती हैं।

दूसरी ओर, यदि आंदोलन और विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहते हैं तो प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा और प्रशासनिक कदम उठाने पड़ सकते हैं। सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार के आह्वान से भी स्थिति पर असर पड़ने की संभावना है।

फिलहाल मणिपुर में सरकार का प्राथमिक फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संवेदनशील इलाकों में स्थिति को नियंत्रण में रखने पर है। वहीं JAFD NRC को अपडेट करने की मांग को लेकर अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

ऐसे में अगले कुछ दिन मणिपुर के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला, सड़कों पर जारी प्रदर्शन, सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का आह्वान और जनगणना से जुड़ी तैयारियां—इन सभी घटनाक्रमों का असर राज्य की सामान्य गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

You may have missed