चुनाव आयोग के खिलाफ तेजस्वी का दो टूक, महागठबंधन का ऐलान, 6 से 8 तक विरोध प्रदर्शन

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तेजस्वी का चुनाव आयोग के खिलाफ ऐलान, 6 अक्टूबर से प्रदर्शन

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)।  बिहार की राजनीति में चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। पटना स्थित राजद प्रदेश कार्यालय में महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत विपक्षी दलों के कई नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया है।

महागठबंधन की ओर से तेजस्वी के माध्यम से बताया गया कि 6 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 7 अक्टूबर को राज्य के विभिन्न प्रखंडों में विरोध मार्च और 8 अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की योजना है। विपक्षी नेताओं के अनुसार आंदोलन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना है।

तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अपनी पसंद के अधिकारियों को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बैठा रहे हैं। तेजस्वी ने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया और कहा कि निर्वाचन आयोग पर सत्ता पक्ष के प्रभाव को लेकर विपक्ष को गंभीर आपत्तियां हैं।

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इन आरोपों को विपक्ष की राजनीतिक दलील के तौर पर देखा जा रहा है। तेजस्वी ने चुनाव आयोग पहले भी SIR और अपनी निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठाए गए आरोपों का खंडन कर चुका है और आयोग की ओर से फैसलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाने की बात कही गई है।

महागठबंधन ने तैयार किया आंदोलन का कार्यक्रम

महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस तेजस्वी ने कहा की में आंदोलन के अगले चरण का भी खाका सामने रखा गया। विपक्ष के अनुसार 6 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन होगा। 7 अक्टूबर को राज्य के प्रत्येक प्रखंड में विरोध मार्च निकालने की योजना है।

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इसके बाद 8 अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। विपक्षी दलों की ओर से लोक भवन मार्च और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की भी बात कही गई है। इस तरह 6 से 8 अक्टूबर तक लगातार विरोध कार्यक्रमों के जरिए चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी राजनीतिक और संवैधानिक आपत्तियां दर्ज कराने की रणनीति बनाई गई है।

तेजस्वी के साथ कई विपक्षी नेता मौजूद

पटना में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता कपिल देव प्रसाद, विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी समेत महागठबंधन से जुड़े कई नेता मौजूद रहे। नेताओं ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की प्रक्रिया से जुड़े सवालों को संयुक्त रूप से उठाया।

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विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियादी जरूरत है। इसी मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विपक्षी दलों के विरोध कार्यक्रम सामने आए हैं।

SIR को लेकर क्यों गरम है राजनीति?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच लंबे समय से मतभेद देखने को मिल रहे हैं।

विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। विपक्षी दल इसे लेकर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना चुनाव प्रक्रिया का नियमित और जरूरी हिस्सा है। ऐसे में SIR को लेकर राजनीतिक दावों और चुनाव आयोग के आधिकारिक रुख के बीच मतभेद लगातार सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।

तेजस्वी बोले- पुराने मतभेद पीछे रखने होंगे

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने विपक्षी एकता को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्वीकार किया कि अलग-अलग राजनीतिक दल अतीत में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं और उनके बीच राजनीतिक मतभेद भी रहे हैं।

हालांकि, तेजस्वी के अनुसार मौजूदा समय में लोकतंत्र और संविधान से जुड़े सवाल अधिक महत्वपूर्ण हैं। इसी साझा उद्देश्य को आधार बनाकर विपक्षी दलों के एक साथ आने की बात कही गई।

इस बयान को महागठबंधन की मौजूदा रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि SIR के मुद्दे पर विपक्षी दलों की गतिविधियां अब केवल विधानसभा स्तर की राजनीति तक सीमित नहीं दिख रही हैं।

चुनाव आयोग के खिलाफ पहले भी प्रदर्शन

चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ बिहार में इससे पहले भी राजद कार्यकर्ताओं ने कई जगह प्रदर्शन किए हैं। सितंबर में बिहारशरीफ समेत विभिन्न जिलों में विरोध कार्यक्रम आयोजित हुए थे। राजद कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की और SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

देश के दूसरे हिस्सों में भी विपक्षी दलों ने SIR को लेकर विरोध कार्यक्रम घोषित किए हैं। दिल्ली में इंडिया गठबंधन से जुड़े दलों ने 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन का फैसला किया है। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी रखी गई है।  

आंदोलन के जरिए दबाव बनाने की रणनीति

महागठबंधन के ताजा कार्यक्रम से स्पष्ट है कि विपक्ष अब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। 6 से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान इसी रणनीति का हिस्सा है।

राजद और उसके सहयोगी दलों की कोशिश है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े उनके सवालों को व्यापक स्तर पर उठाया जाए। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों और मांगों पर आने वाला जवाब भी इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

राजनीतिक टकराव के बीच संवैधानिक सवाल

पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बहस केवल किसी राजनीतिक दल या नेता तक सीमित नहीं है। विपक्ष चुनाव आयोग की संस्थागत स्वायत्तता और निष्पक्षता का सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम करने की बात कहता रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक विरोध के साथ-साथ SIR से जुड़े कानूनी और संवैधानिक सवाल भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

6 अक्टूबर से शुरू होने वाले विरोध कार्यक्रम पर बिहार की राजनीति की नजर है। इसके बाद 7 और 8 अक्टूबर के कार्यक्रमों में महागठबंधन कितना व्यापक विरोध खड़ा कर पाता है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है, यह आगे के घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रहेगा।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट