बिहार के 73 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों को डिजिटल मंच से जोड़ने की तैयारी, ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ पोर्टल से कर सकेंगे मदद

मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान

बिहार के 73 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों को ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

पटना: बिहार के सरकारी विद्यालयों के विकास में अब पूर्ववर्ती छात्र, आम नागरिक, एनआरआइ, गैर-सरकारी संगठन और कॉरपोरेट कंपनियां भी सीधे योगदान दे सकेंगी। इस दिशा में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने एक नई और महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। समिति की ओर से ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ नाम से एक डिजिटल पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से राज्य के 73 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों को समाज के अलग-अलग वर्गों से जोड़ा जाएगा।

इस पोर्टल के जरिए सरकारी स्कूलों में पढ़ चुके पूर्व छात्र अपने पुराने विद्यालय से फिर जुड़ सकेंगे। इतना ही नहीं, वे बिहार के किसी भी सरकारी विद्यालय के विकास में अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार योगदान दे सकेंगे। आम नागरिक भी अपने ज्ञान, कौशल, समय और संसाधनों के माध्यम से स्कूलों की मदद कर सकेंगे।

रविवार को पटना के अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार की ओर से आयोजित प्रशिक्षण सह चिंतन शिविर में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने समिति की विभिन्न योजनाओं का प्रस्तुतिकरण दिया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारी, सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मौजूद रहे।

तीन साल, पांच साल या आजीवन स्कूल गोद लेने का विकल्प

बिहार बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने बताया कि ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ पोर्टल के माध्यम से पूर्व छात्र समूह, विभिन्न संगठन, एनआरआइ और कॉरपोरेट संस्थाएं किसी सरकारी विद्यालय को गोद ले सकेंगी। इसके लिए तीन वर्ष, पांच वर्ष या आजीवन अवधि का विकल्प दिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता जुटाना नहीं है, बल्कि सरकारी विद्यालयों के साथ समाज की सीधी भागीदारी बढ़ाना भी है। पूर्व छात्र अपने अनुभव और संसाधनों से स्कूल के बच्चों का मार्गदर्शन कर सकेंगे। वहीं, आम नागरिक शिक्षा, कौशल विकास और अन्य गतिविधियों के लिए अपना समय दे सकेंगे।

एनआरआइ भी बिहार के सरकारी स्कूलों को डिजिटल शिक्षा, बेहतर आधारभूत संरचना और वैश्विक अवसरों से जोड़ने में सहयोग कर सकेंगे। दूसरी ओर, कंपनियां अपनी कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी यानी सीएसआर के तहत वित्तीय सहायता, आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञता उपलब्ध कराकर विद्यालयों के विकास में भागीदारी कर सकेंगी।

प्रधानाध्यापक बताएंगे स्कूलों की जरूरत

इस डिजिटल पोर्टल पर प्रत्येक विद्यालय की जरूरतों को व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाएगी। संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक अपने स्कूल की आवश्यकताओं को चिह्नित करेंगे और उन्हें पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

इसके बाद जो व्यक्ति, पूर्व छात्र, संगठन या कंपनी किसी विद्यालय की मदद करना चाहती है, वह उसकी जरूरत के अनुसार सहयोग कर सकेगी। हालांकि, किसी भी तरह का सहयोग विद्यालय की सहमति से ही स्वीकार किया जाएगा।

सीएसआर के माध्यम से मिलने वाले सहयोग के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी यानी डीईओ का अनुमोदन आवश्यक होगा। इससे सहयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

146 प्लस टू मॉडल स्कूलों में शुरू होगी फ्री JEE-NEET कोचिंग

बिहार बोर्ड ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर भी बड़ा विस्तार करने की योजना बनाई है। समिति राज्य के 146 अन्य प्लस टू मॉडल स्कूलों में जेईई और नीट की तैयारी के लिए ऑनलाइन संध्याकालीन निशुल्क कोचिंग शुरू करने जा रही है।

वर्तमान में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना में दो स्थानों पर प्रतिवर्ष 200 विद्यार्थियों के लिए निशुल्क आवासीय अनुशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। इनमें 100 विद्यार्थी जेईई और 100 विद्यार्थी नीट की तैयारी करते हैं।

इसके अलावा राज्य के नौ प्रमंडलीय मुख्यालय वाले जिलों में भी प्रतिवर्ष 50 विद्यार्थियों को जेईई-नीट प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए गैर-आवासीय अनुशिक्षण दिया जा रहा है।

सफलता के बाद मॉडल स्कूलों तक विस्तार

जेईई और नीट की निशुल्क कोचिंग कार्यक्रम में विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि और इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए बिहार बोर्ड ने पहले पटना जिले के 10 मॉडल स्कूलों में संध्याकालीन निशुल्क अनुशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया था।

अब इसी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है। इसके तहत 146 अन्य प्लस टू मॉडल स्कूलों को ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ मिल सकेगा।

ऑनलाइन कोचिंग के संचालन के लिए बिहार बोर्ड मुख्यालय स्तर पर एक विशेष स्टूडियो का निर्माण कर रहा है। स्टूडियो तैयार होने तक विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा विभिन्न विषयों और टॉपिक पर तैयार किए गए वीडियो लिंक के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

688 मॉडल स्कूलों में 15 अगस्त से इंटरएक्टिव ऑनलाइन पढ़ाई

बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और अधिक इंटरएक्टिव बनाने की दिशा में भी नई शुरुआत होने जा रही है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अनुसार, 15 अगस्त से राज्य के 688 मॉडल स्कूलों में इंटरएक्टिव ऑनलाइन लर्निंग की सुविधा शुरू की जाएगी।

इस व्यवस्था के तहत कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के लिए ऑनलाइन शिक्षकों से जुड़ सकेंगे। विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार कक्षा, विषय और टॉपिक का चयन कर सकेंगे।

पढ़ाई के दौरान किसी विषय को लेकर संदेह या समस्या होने पर छात्र शिक्षक से लाइव बातचीत कर अपना डाउट दूर कर सकेंगे। यह व्यवस्था केवल रिकॉर्डेड वीडियो तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें विद्यार्थियों को शिक्षक के साथ संवाद करने और सवाल पूछने का भी अवसर मिलेगा।

24 घंटे और सातों दिन मिलेगी पढ़ाई की सुविधा

इस डिजिटल लर्निंग व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसे विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह निशुल्क रखा जाएगा। समिति के अनुसार, शिक्षक 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन विद्यार्थियों की सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगे।

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को संबंधित पोर्टल या मोबाइल एप पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद छात्र अपनी कक्षा, विषय और टॉपिक का चयन कर लाइव क्लास से जुड़ सकेंगे।

यदि किसी टॉपिक को समझने में परेशानी आती है तो विद्यार्थी अपना सवाल शिक्षक को भेज सकेंगे। शिक्षक उस सवाल का विस्तार से समाधान उपलब्ध कराएंगे। इससे खासतौर पर उन विद्यार्थियों को फायदा होने की उम्मीद है, जिन्हें स्कूल के नियमित समय के बाद पढ़ाई में अतिरिक्त सहायता की जरूरत पड़ती है।

सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ पोर्टल, निशुल्क जेईई-नीट कोचिंग और 688 मॉडल स्कूलों में इंटरएक्टिव ऑनलाइन लर्निंग की पहल को बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एक तरफ पूर्व छात्रों, एनआरआइ, आम नागरिकों और कंपनियों को सरकारी स्कूलों के विकास से जोड़ने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से राज्य के सरकारी विद्यालयों में संसाधनों की कमी दूर करने, विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर देने और समाज की शिक्षा व्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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