SIR पर CM सम्राट चौधरी का राहुल-तेजस्वी पर हमला, बोले- बिना तथ्य के लोगों को कर रहे भ्रमित
SIR पर CM सम्राट का राहुल-तेजस्वी पर हमला
निष्कर्ष भारत संवाददाता- बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और भारत निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष के सवालों पर प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेता बिना पर्याप्त तथ्यों के SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है और इस पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। चुनाव आयोग भी हाल ही में स्पष्ट कर चुका है कि SIR से जुड़े अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR को लेकर क्या बोले सम्राट चौधरी?
मुख्यमंत्री ने संवाद कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि SIR को लेकर विपक्ष की ओर से कई तरह की बातें कही जा रही हैं। उनका आरोप है कि इन बयानों से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण चुनाव व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय उससे जुड़े तथ्यों और नियमों को समझना जरूरी है।
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को लेकर कहा कि दोनों नेता SIR के मुद्दे पर तथ्य सामने रखे बिना आरोप लगा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि विपक्ष इस मुद्दे के जरिए लोगों का ध्यान वास्तविक विषयों से हटाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, विपक्ष की ओर से SIR की प्रक्रिया को लेकर पहले भी अलग-अलग सवाल उठाए गए हैं।
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SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद जारी हैं और चुनाव आयोग ने अपने हालिया स्पष्टीकरण में प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर अपनी स्थिति रखी है।
चुनाव आयोग के फैसलों पर भी रखी बात
सम्राट चौधरी ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सामूहिक रूप से लेने की बात स्पष्ट कर दी है।
26 सितंबर को आयोग की बैठक के बाद जारी आधिकारिक जानकारी में भी कहा गया कि SIR से जुड़े निर्णय आयोग के स्तर पर लिए गए हैं। आयोग ने यह भी बताया कि SIR के दौरान नोटिस पाए लोगों के दस्तावेज लेने के लिए BLO उनके घर जा सकते हैं और सामान्य मामलों में उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
‘जिनकी पार्टी में लोकतंत्र नहीं, वही सवाल उठा रहे’
सम्राट चौधरी ने कांग्रेस और आरजेडी पर परिवारवाद को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं, वे अब लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर किसी भी सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
पूर्व चुनाव आयुक्तों का भी किया जिक्र
सम्राट चौधरी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों से जुड़े राजनीतिक प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस संस्था के पूर्व प्रमुखों को बाद में राजनीतिक भूमिकाओं में देखा गया, उसी संस्था की निष्पक्षता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
यह टिप्पणी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आई है। हालांकि, चुनाव आयोग की संस्थागत निष्पक्षता को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष की अपनी-अपनी दलीलें हैं।
गरीबी और आर्थिक संकट को लेकर कांग्रेस पर हमला
मुख्यमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस को गरीबी और आर्थिक चुनौतियों के मुद्दे पर अपने कार्यकाल का जवाब देना चाहिए।
सम्राट चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक देश में शासन किया और अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रही है।
‘सत्ता में आप थे तो लोकतंत्र था’
सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जब तक सत्ता कुछ लोगों के पास थी, तब तक उन्हें लोकतंत्र ठीक नजर आता था। लेकिन जब गरीब परिवार से आने वाला कोई व्यक्ति सत्ता में पहुंचता है तो व्यवस्था पर सवाल उठने लगते हैं।
मुख्यमंत्री का यह बयान विपक्ष पर उनके राजनीतिक हमले का हिस्सा रहा। उन्होंने SIR को लेकर विपक्ष की आलोचना को इसी राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखा।
SIR पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों की ओर से पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग लगातार प्रक्रिया से जुड़े नियमों और मतदाताओं के लिए उपलब्ध विकल्पों को स्पष्ट कर रहा है।
आयोग के मुताबिक, जिन पात्र लोगों का नाम SIR के दौरान छूट गया है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नए मतदाताओं के लिए भी नाम जोड़ने की प्रक्रिया उपलब्ध है।
चुनाव आयोग ने जारी किया है विस्तृत स्पष्टीकरण
SIR को लेकर हालिया विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने आंतरिक विचार-विमर्श को लोकतांत्रिक संस्थाओं की सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
SIR पर आगे भी जारी रहेगी सियासी बहस
सम्राट चौधरी के ताजा बयान के बाद SIR को लेकर बिहार की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार और भाजपा नेतृत्व चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल SIR से जुड़े अपने सवालों को लगातार उठा रहे हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री ने विपक्ष से तथ्यों के आधार पर बात करने की अपील की है और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को लेकर अपनी सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
