CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों EC की बैठक के बाद आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण, SIR से लेकर वोटर लिस्ट तक जानें क्या कहा
ECI
निष्कर्ष भारत संवाददाता- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच हुई अहम बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा है कि लोकतांत्रिक संस्था में विचार-विमर्श, सुझाव और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और तकनीक से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आंतरिक असहमति पर चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों के बीच आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार, किसी संस्थान में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होना और सुझाव या आपत्ति दर्ज होना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।
आयोग ने कहा कि SIR और तकनीक से संबंधित सभी अंतिम निर्णय तीनों आयुक्तों की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं।
Form 6 को लेकर क्या कहा?
SIR के दौरान Form 6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र को लेकर भी विवाद सामने आया था। चुनाव आयोग ने कहा कि इस घोषणा पत्र की वैधता को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई थी और अदालत ने इसे उचित माना है।
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Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। आयोग ने यह भी बताया कि SIR के दौरान जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें सामान्य तौर पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने की जरूरत नहीं है। केवल असाधारण परिस्थितियों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है।
कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे पत्र पर भी सफाई
चुनाव आयोग ने कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए एक पत्र को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अनुसार, यह पत्र आयोग या IT डिवीजन की किसी नीतिगत प्रक्रिया से संबंधित नहीं था।
आयोग ने कहा कि मामला ECI में डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। अधिकारी की ओर से जारी किए गए काम के बंटवारे से संबंधित आदेश दो चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद लागू नहीं किए गए थे।
आयोग ने यह भी कहा कि IT डिवीजन की निगरानी का अधिकार DEC से कभी वापस नहीं लिया गया था।
गोवा में छूटे मतदाताओं के लिए घर-घर अभियान
चुनाव आयोग ने गोवा में मतदाता सूची से छूटे लोगों को लेकर भी जानकारी दी। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO को ऐसे मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म जमा करने का निर्देश दिया है।
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आयोग के अनुसार, 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए Form 6 भर दिया है। बाकी मामलों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा
आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
आयोग के मुताबिक, अगर SIR के दौरान या इसके बाद किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में छूट गया है, तो वह लगातार चलने वाली अपडेट प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी ERO के पास आवेदन कर सकता है।
नए मतदाता, खासकर पहली बार वोट देने वाले युवा भी Form 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज करा सकते हैं।
छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के निर्देश
चुनाव आयोग ने CEO, जिला निर्वाचन अधिकारी यानी DEO और ERO को छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
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इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकें और चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने से वंचित न रहें।
दिल्ली में बढ़ी दावे-आपत्तियों की समय सीमा
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की मांग को स्वीकार करते हुए आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है।
इसके अलावा नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समय सीमा अब 30 नवंबर 2026 कर दी गई है। इससे संबंधित प्रक्रिया के लिए अधिकारियों को अतिरिक्त समय मिलेगा।
महाराष्ट्र में भी बढ़ी डेडलाइन
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर वहां भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाई गई है।
अब महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां 12 अक्टूबर 2026 तक दाखिल की जा सकेंगी। वहीं नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तय की गई है।
वोटर लिस्ट को लेकर आयोग का जोर
चुनाव आयोग लगातार मतदाता सूची को अपडेट रखने और पात्र मतदाताओं को उसमें शामिल करने की प्रक्रिया पर जोर दे रहा है। आयोग की वेबसाइट पर भी SIR-2026 और मतदाता सूची से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं।
आयोग के अनुसार, जिन पात्र लोगों का नाम किसी वजह से सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।


बैठक के बाद आयोग ने स्थिति की स्पष्ट
CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण में SIR, Form 6, आंतरिक निर्णय प्रक्रिया, IT डिवीजन और छूटे मतदाताओं से जुड़े कई मुद्दों पर स्थिति रखी गई है।
आयोग ने अपने बयान में निर्णय प्रक्रिया को सर्वसम्मति पर आधारित बताया है। वहीं दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समय सीमा बढ़ाने तथा गोवा में छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की जानकारी दी गई है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
