स्वास्थ्य मंत्री निशांत का बड़ा ऐलान: हर अस्पताल में CCTV, कमांड सेंटर से होगी निगरानी, 504 दवाएं मिलेंगी मुफ्त
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहां लोगों को बेहतर इलाज के लिए राजधानी पटना का रुख न करना पड़े।
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मरीजों के अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का संकेत दिया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहां लोगों को बेहतर इलाज के लिए राजधानी पटना का रुख न करना पड़े। इसके बजाय मरीजों को उनके नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में ही समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
बुधवार को प्रदेश जदयू कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों की निगरानी, मुफ्त दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति, मेडिकल उपकरणों की व्यवस्था और सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दामोदर रावत भी मौजूद रहे और उन्होंने भी अपने विभाग से जुड़े मामलों की जनसुनवाई की।
हर मरीज को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज देने पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि राज्य के किसी भी मरीज को सामान्य इलाज के लिए पटना आने की आवश्यकता न पड़े। जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को लगातार मजबूत किया जा रहा है ताकि मरीजों को उनके क्षेत्र में ही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय अस्पतालों में बेहतर डॉक्टर, पर्याप्त दवाएं, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध होंगे, तो मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेगा। साथ ही राजधानी के बड़े अस्पतालों पर भी मरीजों का अतिरिक्त दबाव कम होगा।
सभी सरकारी अस्पतालों में लगाए जाएंगे CCTV कैमरे
स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार सभी सरकारी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी कर रही है। मंत्री ने कहा कि अस्पताल परिसर, ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरे लगाए जाएंगे ताकि अस्पतालों में होने वाली गतिविधियों की बेहतर निगरानी की जा सके।
उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य केवल सुरक्षा बढ़ाना नहीं बल्कि मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना और अस्पतालों में जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। इससे लापरवाही, अनियमितता और अनुशासनहीनता पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होगी सीधी मॉनिटरिंग
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विभाग एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है, जिसे राज्य स्तर पर स्थापित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा।
इस प्रणाली के माध्यम से वे स्वयं राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों की निगरानी कर सकेंगे। अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों की स्थिति और सेवाओं की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत निर्देश भी दिए जा सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल डिजिटल निगरानी पर ही निर्भर नहीं रहा जाएगा। समय-समय पर अस्पतालों का औचक निरीक्षण भी किया जाएगा और विभागीय टीमों को फील्ड में भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाएगा।
504 प्रकार की मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने की योजना
सरकारी अस्पतालों में दवा की उपलब्धता लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग मुफ्त दवा योजना का विस्तार कर रहा है।
मंत्री निशांत ने बताया कि विभाग का लक्ष्य सरकारी अस्पतालों में कुल 504 प्रकार की दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराना है। फिलहाल इनमें से लगभग 350 दवाएं मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं और शेष दवाओं को भी चरणबद्ध तरीके से सूची में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होगा।
दवाओं की गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल दवाओं की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की नियमित और रैंडम टेस्टिंग कराई जाए। यदि किसी दवा की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को प्रभावी और मानक गुणवत्ता वाली दवाएं ही उपलब्ध कराई जाएं।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति पर सख्ती
मंत्री निशांत ने माना कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति लंबे समय से स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चुनौती रही है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग सख्त कदम उठा रहा है। अस्पतालों में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
उनके अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तभी बेहतर होगी जब अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी समय पर उपलब्ध रहें और मरीजों को बिना अनावश्यक इंतजार के इलाज मिल सके।
आधुनिक उपकरण और तकनीशियनों की उपलब्धता पर भी फोकस
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कई अस्पतालों में मशीनें होने के बावजूद प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी के कारण मरीजों को पूरी सुविधा नहीं मिल पाती। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के साथ-साथ प्रशिक्षित तकनीशियनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जांच और इलाज की अधिकतम सुविधाएं जिला स्तर पर ही उपलब्ध हों ताकि मरीजों को बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।
टोल प्लाजा पर तैनात होंगी एम्बुलेंस
सड़क दुर्घटनाओं में समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय राजमार्गों के प्रमुख टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस तैनात करने की योजना पर भी काम कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ माना जाता है। यदि इस दौरान घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इसी उद्देश्य से ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है ताकि हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में एम्बुलेंस तुरंत मौके पर पहुंच सके और मरीज को नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में पहल
स्वास्थ्य मंत्री निशांत की घोषणाओं से स्पष्ट है कि बिहार सरकार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है। अस्पतालों में CCTV निगरानी, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, मुफ्त दवाओं का विस्तार, डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और हाईवे पर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं जैसी पहलें यदि प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में इन योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
