बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 2026: चुनाव आयोग ने किया मतदान का ऐलान, BJP की बढ़ी चुनौती, तेज प्रताप ने उतारा उम्मीदवार, PK की एंट्री पर भी नजर
बिहार की राजनीति की सबसे चर्चित सीटों में शामिल बांकीपुर विधानसभा एक बार फिर चुनावी अखाड़ा बनने जा रही है।
बिहार की राजनीति की सबसे चर्चित सीटों में शामिल बांकीपुर विधानसभा एक बार फिर चुनावी अखाड़ा बनने जा रही है। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। इस सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।
यह उपचुनाव पूर्व मंत्री और विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है। पिछले तीन दशक से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही इस सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं। बीजेपी ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, जबकि तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) ने सबसे पहले उम्मीदवार उतारकर चुनावी माहौल गरमा दिया है। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की अटकलें भी लगातार चर्चा में हैं।
चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मतदान के दौरान सभी बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पर्याप्त संख्या में मशीनें उपलब्ध करा दी हैं।
चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। अब सबसे अधिक नजर बीजेपी के उम्मीदवार पर टिकी हुई है।
तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले खेला चुनावी दांव
जहां बीजेपी अभी उम्मीदवार तय करने में जुटी है, वहीं जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले अपने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है।

पार्टी ने वीणा मानवी को बांकीपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। वीणा मानवी लंबे समय से सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रही हैं। महिलाओं के अधिकार, घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार काम किया है।
वे ‘समृद्ध महिला विकास मंच’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। इस मंच के माध्यम से उन्होंने कई पीड़ित महिलाओं को कानूनी और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने का काम किया।
हाल ही में जुलाई 2026 में उन्होंने जनशक्ति जनता दल की सदस्यता ग्रहण की और अब सक्रिय राजनीति में चुनावी मैदान में उतर रही हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि वीणा मानवी पहले भारतीय जनता पार्टी के पटना महानगर महिला मोर्चा में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं। ऐसे में उनका बीजेपी छोड़कर चुनाव मैदान में उतरना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजेपी में उम्मीदवार को लेकर मंथन
बांकीपुर सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। पार्टी इस सीट पर ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहती है जो न केवल संगठन बल्कि स्थानीय सामाजिक समीकरणों पर भी मजबूत पकड़ रखता हो।
फिलहाल दो प्रमुख नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
अजय आलोक का नाम सबसे आगे
बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया पैनल के प्रमुख चेहरों में शामिल डॉ. अजय आलोक को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है।
कायस्थ समाज से आने वाले अजय आलोक के पिता पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा पटना के प्रतिष्ठित चिकित्सक रहे हैं। अजय आलोक का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है।

उन्होंने वर्ष 2005 में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चैनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। 2010 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर भी चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वे जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए, जहां उन्होंने पार्टी प्रवक्ता और महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2023 में उन्होंने जदयू छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
हालांकि उम्मीदवार बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान पश्चिम बंगाल चुनाव पर है और बांकीपुर को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।
रणवीर नंदन भी दावेदार
पूर्व विधान पार्षद और वर्तमान में बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है।

रणवीर नंदन भी कायस्थ समाज से आते हैं और पटना की राजनीति में उनकी साफ-सुथरी छवि मानी जाती है। वे कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाते थे और वर्ष 2014 में जदयू के कोटे से विधान परिषद पहुंचे थे।
बाद में जदयू छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए। उन्होंने खुलकर कहा है कि यदि पार्टी टिकट देती है तो वे चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
नेता पुत्र भी टिकट की दौड़ में
बीजेपी में टिकट की दौड़ केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है। कई नेता पुत्र भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
इनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व विधायक अरुण सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा का है। आशीष पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अरुण सिन्हा भी अपने बेटे के लिए पार्टी नेतृत्व से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
क्या चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर?
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर सबसे अधिक चर्चा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को लेकर भी हो रही है।
कुछ दिन पहले बांकीपुर में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि उनके चुनाव लड़ने से बीजेपी जैसी मजबूत पार्टी इस सीट पर हारती है तो वे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने लोगों से कहा था कि यदि बांकीपुर की जनता बीजेपी को हराती है तो यह संदेश सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचेगा कि बिहार की जनता मौजूदा राजनीतिक फैसलों से संतुष्ट नहीं है।
हालांकि अब तक जन सुराज की ओर से उनके चुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
31 वर्षों से नवीन परिवार का दबदबा
बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशकों से नवीन परिवार का वर्चस्व रहा है।
1995 में तत्कालीन पटना पश्चिम विधानसभा सीट से नवीन किशोर सिन्हा पहली बार विधायक बने। इसके बाद लगातार चार चुनावों तक उन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज की।
2006 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन नवीन पहली बार विधायक बने। इसके बाद हुए सभी विधानसभा चुनावों में उन्होंने लगातार जीत हासिल की और कभी चुनाव नहीं हारे।
अब उनके इस्तीफे के बाद पहली बार यह सीट नए राजनीतिक समीकरणों के साथ चुनावी मैदान में है।
जातीय समीकरण भी होंगे निर्णायक
बांकीपुर विधानसभा सीट का चुनाव केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस क्षेत्र में कायस्थ मतदाताओं की संख्या 13 प्रतिशत से अधिक है। यही वजह है कि बीजेपी यहां उम्मीदवार चयन में सामाजिक संतुलन को लेकर बेहद सतर्क दिखाई दे रही है।
पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र और बांकीपुर विधानसभा में लंबे समय से कायस्थ समाज का प्रभाव रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार भी इसी समाज से उम्मीदवार उतार सकती है।
मुकाबला होगा दिलचस्प
बांकीपुर उपचुनाव 2026 केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। एक ओर बीजेपी अपनी परंपरागत सीट बचाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इस सीट पर सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत लगाएगा। तेज प्रताप यादव ने उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मुकाबले की शुरुआत कर दी है, जबकि प्रशांत किशोर की संभावित एंट्री ने भी चुनाव को और रोचक बना दिया है।
अब सबकी नजर बीजेपी के उम्मीदवार की घोषणा और आगामी चुनाव प्रचार पर होगी, क्योंकि यह उपचुनाव राज्य की राजनीति में आगे की रणनीतियों का संकेत भी दे सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
