बांकीपुर उपचुनाव 2026: जन सुराज को मिला ‘स्कूल का बस्ता’ चुनाव चिह्न, भाजपा पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
बांकीपुर उपचुनाव 2026 में जन सुराज पार्टी को 'स्कूल का बस्ता' चुनाव चिह्न मिला। पार्टी ने चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर भाजपा पर आचार संहिता उल्लंघन, भ्रामक पोस्टर और पोस्टर हटाने सहित कई गंभीर आरोप लगाए।
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के साथ ही चुनावी मुकाबला अब नए चरण में प्रवेश कर गया है। इस बीच जन सुराज पार्टी को उपचुनाव के लिए ‘स्कूल का बस्ता’ चुनाव चिह्न मिला है। चुनाव चिह्न मिलने के बाद पार्टी ने अपने प्रचार अभियान को गति देने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में चुनाव चिह्न की जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष कई महत्वपूर्ण शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग को इन मामलों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
जन सुराज को मिला ‘स्कूल का बस्ता’ चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के बाद जन सुराज पार्टी ने ‘स्कूल का बस्ता’ को अपने चुनावी अभियान का प्रमुख प्रतीक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
पार्टी का कहना है कि यह चुनाव चिह्न शिक्षा, नई सोच और बदलाव का संदेश देता है। जन सुराज अब इसी प्रतीक के साथ घर-घर जाकर मतदाताओं तक अपनी नीतियां और चुनावी एजेंडा पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव चिह्न किसी भी नए या अपेक्षाकृत कम पहचान वाले दल के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही मतदाताओं के बीच उसकी पहचान का प्रमुख माध्यम बनता है।
चुनाव आयोग को सौंपा चार सूत्री ज्ञापन
चुनाव चिह्न मिलने के साथ ही जन सुराज ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) से मुलाकात कर चार बिंदुओं वाला ज्ञापन भी सौंपा।
मनोज भारती ने बताया कि पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को विभिन्न शिकायतों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल पर अनावश्यक आरोप लगाना नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है।
भ्रामक पोस्टरों का लगाया आरोप
प्रेस वार्ता में मनोज भारती ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से पटना के कई प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को लेकर कथित रूप से भ्रामक और असत्य पोस्टर लगाए गए हैं।
उनका दावा है कि ऐसे पोस्टरों का उद्देश्य मतदाताओं को भ्रमित करना और चुनावी माहौल को प्रभावित करना है।
जन सुराज का कहना है कि इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की गई है और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पोस्टर और बैनर हटाने का भी आरोप
जन सुराज ने यह आरोप भी लगाया कि जिन मकान मालिकों की सहमति से उनके पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, उन्हें कुछ लोग हटाने का प्रयास कर रहे हैं।
मनोज भारती का दावा है कि पोस्टर हटाने वाले लोग स्वयं को नगर निगम का कर्मचारी बताते हैं। हालांकि, जब उनसे पहचान पत्र दिखाने को कहा जाता है, तो वे वहां से चले जाते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बिना मकान मालिक की अनुमति के भाजपा के झंडे और पोस्टर लगाए जा रहे हैं।
इन आरोपों को भी पार्टी ने अपने ज्ञापन में शामिल करते हुए चुनाव आयोग से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
जीविका दीदियों को लेकर भी जताई चिंता
जन सुराज ने चुनाव आयोग के सामने मतदान प्रक्रिया से जुड़ी कुछ अन्य चिंताएं भी रखी हैं।
मनोज भारती ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ स्थानों पर जीविका दीदियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर उन्हें मतदान केंद्रों के बाहर और कुछ मामलों में बूथ के भीतर भी देखा गया था।
पार्टी ने मांग की है कि इस बार चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करे कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हो और किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है।
अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर भी उठाए सवाल
जन सुराज ने अर्धसैनिक बलों की भूमिका को लेकर भी चुनाव आयोग का ध्यान आकर्षित किया।
पार्टी का कहना है कि सुरक्षा बलों की तैनाती मतदान केंद्रों के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाती है। यदि कहीं उन्हें मतदान प्रक्रिया से जुड़े कार्य करते हुए देखा जाता है, तो इससे मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।
पार्टी ने आयोग से आग्रह किया है कि चुनाव के दौरान निर्धारित दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।
बांकीपुर उपचुनाव में बढ़ रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो चुका है। इस सीट पर प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है।
चुनाव चिह्न मिलने के बाद अब सभी दल अपने प्रचार अभियान को और तेज करने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में जनसभाओं, पदयात्राओं, सोशल मीडिया अभियान और घर-घर संपर्क कार्यक्रमों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिशें तेज होंगी।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सबकी नजर
चुनावी प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है।
जन सुराज द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इन शिकायतों की जांच किस प्रकार करता है और यदि आवश्यक हुआ तो क्या कार्रवाई की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों को भी आचार संहिता का पालन करना चाहिए और किसी भी शिकायत का समाधान आयोग के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव चिह्न आवंटित होने के साथ ही चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। जन सुराज पार्टी को ‘स्कूल का बस्ता’ चुनाव चिह्न मिलने के बाद पार्टी ने चुनाव प्रचार को गति दी है और भाजपा पर आचार संहिता उल्लंघन सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग की जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं और बांकीपुर का चुनाव बिहार की राजनीति का केंद्र बना हुआ है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
