गंगा ने पटना में पार किया खतरे का निशान, घाटों पर चढ़ा पानी, प्रशासन का अलर्ट जारी, कई इलाकों का संपर्क प्रभावित
पटना में गंगा का पानी बढ़ा, रिवर फ्रंट पर भी चढ़ा पानी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 42 सेंटीमीटर और गांधी घाट पर 33 सेंटीमीटर बढ़ा है। गांधी घाट पर पानी खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर नीचे रह गया है, जबकि दीघा घाट पर यह खतरे के निशान से 143 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने नदी किनारे बसे इलाकों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
गंगा के बढ़ते पानी का असर पटना के रिवर फ्रंट पर भी दिखाई देने लगा है। कलेक्ट्रेट से पटना सिटी तक बने रिवर फ्रंट पर मंगलवार को पानी चढ़ गया। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग टहलने और घूमने पहुंचते थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद अब कलेक्ट्रेट से गांधी घाट के बीच आवाजाही बंद कर दी गई है।
गंगा का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा खतरा
पटना में गंगा के जलस्तर में अचानक आई तेजी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ घाटों पर पहुंचने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि लोग गैर-चिह्नित घाटों पर स्नान करने से बचें। नदी के बढ़े हुए जलस्तर के दौरान गहरे पानी में जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में लोगों से नदी में उतरने से परहेज करने और बच्चों पर विशेष नजर रखने की अपील की गई है।
गंगा के किनारे बच्चों पर रखें विशेष नजर
जलस्तर बढ़ने के साथ नदी के किनारे की स्थिति तेजी से बदलती है। सामान्य दिनों में सुरक्षित दिखाई देने वाले घाट और रास्ते पानी बढ़ने के बाद फिसलन भरे और खतरनाक हो सकते हैं। खासकर बच्चों के नदी किनारे जाने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
इसी वजह से प्रशासन ने अभिभावकों से बच्चों को नदी और घाटों से दूर रखने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि प्रशासन द्वारा चिह्नित सुरक्षित स्थानों का ही इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।
गंगा का पानी रिवर फ्रंट तक पहुंचा
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे स्पष्ट असर पटना के रिवर फ्रंट पर देखने को मिला है। कलेक्ट्रेट से पटना सिटी तक विकसित रिवर फ्रंट आम दिनों में लोगों के लिए पैदल घूमने और शहर के नदी किनारे के वातावरण का आनंद लेने की जगह रहा है।

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मंगलवार को पानी रिवर फ्रंट तक पहुंच गया। इसके बाद कलेक्ट्रेट से गांधी घाट के बीच आवाजाही रोक दी गई है। इस रास्ते पर पानी आने से लोगों की नियमित गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में नदी से सटे अन्य स्थानों पर भी पानी पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
गंगा के बढ़ते पानी से बिंद टोली घिरी
बाढ़ के बढ़ते प्रभाव के बीच बिंद टोली पानी से घिर गई है। कुर्जी मोड़ की ओर से आने वाला रास्ता भी बंद हो गया है। इससे इलाके में रहने वाले लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है।
नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन की नजर ऐसे क्षेत्रों पर है, जहां जलस्तर बढ़ने के साथ संपर्क मार्ग प्रभावित होने की संभावना है।
गंगा के दियारा इलाके में फैलने लगा पानी
गंगा का पानी दियारा क्षेत्रों में भी फैलने लगा है। दियारा इलाकों में नदी का जलस्तर बढ़ने का असर अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देता है, क्योंकि यहां कई गांव और संपर्क मार्ग निचले क्षेत्रों में स्थित हैं।
नकटा दियारा समेत आसपास के अन्य गांवों के संपर्क पथ पर अगले एक-दो दिनों में पानी चढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो इन गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रशासन को स्थानीय स्तर पर आवागमन और राहत व्यवस्था को लेकर भी तैयारी रखनी होगी।
गंगा का जलस्तर बढ़ा तो बढ़ेगी संपर्क की समस्या
गांवों के संपर्क पथ पर पानी आने से लोगों के लिए मुख्य सड़क या बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां आने-जाने के विकल्प सीमित होते हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
गंगा की स्थिति पर अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश
पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने सभी अंचल अधिकारियों यानी सीओ को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि जलस्तर में होने वाले बदलाव और स्थानीय स्थिति की तत्काल रिपोर्ट दी जाए।

इस निर्देश का उद्देश्य नदी के बढ़ते पानी से प्रभावित होने वाले इलाकों की समय रहते पहचान करना है। निचले इलाकों, दियारा क्षेत्रों और नदी किनारे बसे गांवों में स्थिति बिगड़ने से पहले प्रशासनिक तैयारी की जा सके, इसके लिए स्थानीय अधिकारियों को सक्रिय रहने को कहा गया है।
गंगा में नाव परिचालन को लेकर भी सख्ती
बढ़ते जलस्तर के बीच नावों के परिचालन को लेकर भी प्रशासन ने सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को सूर्यास्त के बाद नदियों में नावों के परिचालन पर रोक लगाने के लिए कहा गया है।
इसके साथ ही ओवरलोडिंग करने वाली नावों और गैर-निबंधित नावों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि बढ़े हुए जलस्तर और तेज बहाव के दौरान नावों का सुरक्षित परिचालन बेहद महत्वपूर्ण है। क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने या बिना पंजीकरण वाली नावों के संचालन से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
गंगा में नाव चलाने वालों को नियमों का पालन जरूरी
नदी में जलस्तर बढ़ने के दौरान नाविकों और यात्रियों दोनों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। प्रशासन की ओर से तय नियमों का पालन नहीं होने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
सूर्यास्त के बाद नाव परिचालन पर रोक और ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। प्रशासनिक निगरानी बढ़ने से नदी में अनधिकृत और असुरक्षित नाव परिचालन पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन की बढ़ी चुनौती
पटना में गंगा का पानी लगातार बढ़ने से फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नदी किनारे के निचले इलाकों और संपर्क मार्गों को सुरक्षित रखना है। रिवर फ्रंट पर पानी पहुंचने, बिंद टोली के घिरने और कुर्जी मोड़ का रास्ता बंद होने से जलस्तर बढ़ने के प्रभाव सामने आने लगे हैं।
दियारा क्षेत्र के गांवों में भी अगले एक-दो दिनों में संपर्क पथ पर पानी पहुंचने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन की निगरानी और स्थानीय स्तर पर त्वरित सूचना व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर नीचे पहुंच चुका है। इसलिए आने वाले समय में जलस्तर में होने वाली प्रत्येक वृद्धि पर प्रशासन की नजर रहेगी। लोगों से भी अपील की गई है कि वे नदी के बढ़े पानी को देखते हुए अनावश्यक रूप से घाटों या गहरे पानी के करीब न जाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
फिलहाल पटना में गंगा के जलस्तर की स्थिति लगातार निगरानी में है। यदि पानी बढ़ने का सिलसिला जारी रहा तो नदी से सटे और निचले इलाकों में इसका असर और व्यापक हो सकता है। प्रशासन की तैयारियों के साथ आम लोगों की सतर्कता भी इस दौरान बेहद जरूरी है।
पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
