दृश्यम: द कन्क्लूजन Review: 11 साल बाद विजय सलगांवकर की कहानी का हुआ अंत, ट्विस्ट दमदार लेकिन रफ्तार धीमी

दृश्यम

11 साल बाद खत्म हुई विजय सलगांवकर की कहानी

निष्कर्ष भारत संवाददाता- Ajay Devgn की ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इसके साथ विजय सालगांवकर की करीब 11 साल पुरानी कहानी अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म में एक बार फिर अजय देवगन विजय के किरदार में नजर आ रहे हैं, जबकि तब्बू, श्रिया सरन, राजत कपूर और ईशिता दत्ता जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है।

‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी खासियत रही है कि एक आम परिवार किस तरह कानून और पुलिस की जांच से खुद को बचाने के लिए हर कदम सोच-समझकर उठाता है। तीसरे पार्ट में भी विजय के सामने वही पुराना सवाल लौटता है, लेकिन इस बार जांच पहले से ज्यादा करीब पहुंचती दिखाई देती है।

दृश्यम 3 में फिर कटघरे में विजय सालगांवकर

विजय सालगांवकर ने पिछले 11 वर्षों में अपने परिवार को बचाने के लिए कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है। लेकिन पुराने मामले की परछाई अभी भी परिवार का पीछा नहीं छोड़ती।

समीर देशमुख की मौत और उसके बाद गायब होने का रहस्य कहानी के केंद्र में बना हुआ है। समीर के माता-पिता अब भी अपने बेटे के साथ हुई घटना का जवाब चाहते हैं। यही वजह है कि मामले को दोबारा खंगालने की कोशिश शुरू होती है और विजय एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ जाता है।

इस बार जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच के अधिकारी राजवीर सिंह तोमर के हाथ में है, जिसका किरदार जयदीप अहलावत ने निभाया है।

नई जांच, नया पुलिस अधिकारी और बढ़ता दबाव

राजवीर सिंह तोमर विजय को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। वह पुराने मामले की उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करता है, जिन्हें अब तक पुलिस पूरी तरह सुलझा नहीं पाई थी।

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जयदीप अहलावत का किरदार फिल्म में विजय के सामने एक नया दबाव पैदा करता है। उनकी एंट्री के साथ कहानी में पुलिस और विजय के बीच दिमागी खेल फिर शुरू हो जाता है।

ट्रेलर और फिल्म की कहानी का बड़ा हिस्सा इसी सवाल पर टिका है कि क्या इस बार विजय अपनी पुरानी रणनीति से पुलिस को मात दे पाएगा या जांच आखिरकार उसके परिवार तक पहुंच जाएगी।

क्या फिल्म फिर वही पुराना फॉर्मूला दोहराती है?

‘दृश्यम’ की पहली दो फिल्मों में विजय का सबसे बड़ा हथियार उसका दिमाग और उसकी प्लानिंग रही है। तीसरे पार्ट में भी यही आधार मौजूद है, लेकिन फिल्म कहानी को मलयालम वर्जन की हूबहू कॉपी बनाने के बजाय अपनी अलग दिशा में ले जाती है।

निर्देशक अभिषेक पाठक ने पहले ही स्पष्ट किया था कि हिंदी फिल्म को मलयालम ‘दृश्यम 3’ का सीन-बाय-सीन रीमेक नहीं बनाया गया है। हिंदी फिल्म की कहानी को अलग तरीके से विकसित किया गया है।

यही वजह है कि जिन दर्शकों ने मलयालम संस्करण देखा है, उनके लिए भी हिंदी फिल्म में कुछ अलग देखने को मिलता है।

क्लाइमेक्स में फिर दिमाग का खेल

फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण उसका क्लाइमेक्स है। पूरी कहानी धीरे-धीरे उस बिंदु की ओर बढ़ती है जहां विजय और पुलिस के बीच अंतिम दिमागी मुकाबला देखने को मिलता है।

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सुराग, पुराने रहस्य, कानूनी पेचीदगियां और अचानक सामने आने वाले मोड़ कहानी को आगे बढ़ाते हैं। फिल्म में यह सवाल लगातार बना रहता है कि विजय आखिर इस बार किस तरह अपने परिवार को बचाएगा।

ताजा समीक्षाओं में भी क्लाइमेक्स और फिल्म के अंतिम खुलासे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। Indian Express ने फिल्म में कहानी के रहस्यों और भावनात्मक हिस्से के संतुलन की सराहना की, जबकि Hindustan Times ने कुछ ट्विस्ट को सुविधाजनक लेखन पर निर्भर बताया।

जयदीप अहलावत ने संभाली नई पुलिस अफसर की भूमिका

फिल्म में जयदीप अहलावत का राजवीर सिंह तोमर वाला किरदार खास ध्यान खींचता है। इससे पहले दूसरे पार्ट में पुलिस अधिकारी तरुण अहलावत का किरदार अक्षय खन्ना ने निभाया था।

दृश्यम 3 में जयदीप की मौजूदगी पुलिस-विजय टकराव को नया रंग देती है। उनके किरदार के करिश्माई अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस को खास तौर पर नोट किया, हालांकि समीक्षा के मुताबिक कहानी में उनके किरदार का अंतिम प्रभाव उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहता।

तब्बू और परिवार को मिला कितना स्पेस?

विजय की कहानी हमेशा सिर्फ पुलिस को चकमा देने की नहीं रही। परिवार उसकी पूरी रणनीति का केंद्र रहा है। लेकिन तीसरे पार्ट में कहानी का फोकस काफी हद तक थ्रिल और जांच पर चला जाता है।

तब्बू एक बार फिर मीरा देशमुख के किरदार में हैं। उनके लिए बेटे समीर की मौत का रहस्य अब भी खत्म नहीं हुआ है। वह इस मामले को दोबारा सामने लाने की कोशिश करती हैं।

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श्रिया सरन, ईशिता दत्ता और मृणाल जाधव भी परिवार का हिस्सा हैं, लेकिन कुछ समीक्षाओं के मुताबिक फिल्म में परिवार के भावनात्मक पक्ष को पहले के मुकाबले कम जगह मिलती है।

अजय देवगन फिर बने विजय सालगांवकर

विजय सालगांवकर के किरदार की सबसे बड़ी खासियत उसका शांत स्वभाव है। अजय देवगन ने तीसरे पार्ट में भी इसी अंदाज को बरकरार रखा है।

फिल्म में कई ऐसे मौके आते हैं जब विजय दबाव में दिखाई देता है, लेकिन उसके चेहरे पर वही संयम नजर आता है। यही किरदार की पहचान भी है।

Indian Express ने अजय देवगन के प्रदर्शन को मजबूत बताया है, जबकि Hindustan Times ने भी उनके शांत और नियंत्रित अभिनय को फिल्म की प्रमुख खूबियों में गिना।

क्या ‘दृश्यम 3’ पुराने जादू को दोहरा पाती है?

‘Drishyam’ फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह रहा है कि उसने एक साधारण परिवार और उसके मुखिया को पुलिस की जांच के सामने असाधारण रणनीतिक स्थिति में रखा। तीसरी फिल्म उसी दुनिया को अंतिम बार आगे बढ़ाती है।

फिल्म को लेकर समीक्षकों की राय एक जैसी नहीं है। Indian Express ने इसे फ्रेंचाइजी के लिए प्रभावी निष्कर्ष माना, जबकि Rediff ने क्लाइमेक्स के बावजूद फिल्म की धीमी गति और भावनात्मक गहराई की कमी को लेकर सवाल उठाए।

यानी फिल्म में सस्पेंस, ट्विस्ट और विजय का दिमागी खेल तो है, लेकिन दर्शकों को यह खुद तय करना होगा कि अंतिम किस्त उनके लिए पहले दो हिस्सों के अनुभव के बराबर बैठती है या नहीं।

मलयालम ‘दृश्यम’ से कितनी अलग है हिंदी फिल्म?

‘दृश्यम’ की पहली दो हिंदी फिल्मों की जड़ें मलयालम फ्रेंचाइजी में हैं, जिसमें मोहनलाल ने जॉर्जकुट्टी का किरदार निभाया था। लेकिन तीसरी हिंदी फिल्म ने अपनी अलग कहानी का रास्ता चुना है।

निर्देशक अभिषेक पाठक के मुताबिक टीम ने दर्शकों को वही कहानी दोबारा देने के बजाय नए अनुभव के साथ फ्रेंचाइजी को समाप्त करने की कोशिश की।

इस बदलाव की वजह से हिंदी ‘दृश्यम’ अब अपने अलग किरदारों और कहानी के साथ आगे बढ़ती है।

11 साल बाद खत्म हुआ विजय का सफर

‘Drishyam: The Conclusion’ की सबसे बड़ी बात यही है कि विजय सालगांवकर की 11 साल पुरानी कहानी अब अपने अंतिम अध्याय तक पहुंच चुकी है। फिल्म पुराने रहस्य को फिर सामने लाती है और विजय को एक नए पुलिस अधिकारी के सामने खड़ा करती है।

कहानी में दिमागी खेल, परिवार को बचाने की कोशिश और पुराने अपराध की जांच तीनों साथ चलते हैं। क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म यह सवाल सामने रखती है कि क्या विजय की किस्मत और उसकी प्लानिंग इस बार भी उसका साथ देगी।

फिल्म को लेकर समीक्षकों के बीच राय अलग-अलग है, लेकिन इतना तय है कि Drishyam 3 ने विजय सालगांवकर की कहानी को एक अलग रास्ते से अंतिम पड़ाव तक पहुंचाने की कोशिश की है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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