फरक्का बैराज पर बिहार की सियासत गरमाई, लालू यादव के बयान पर JDU का पलटवार; 1996 की संधि को लेकर उठाए सवाल
लालू यादव के आरोपों पर JDU MLC नीरज कुमार ने पलटवार किया
निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना। फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के फरक्का बैराज को लेकर दिए गए बयान के बाद अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पलटवार किया है। जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने लालू यादव पर निशाना साधते हुए वर्ष 1996 में भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि के समय बिहार सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
जेडीयू कार्यालय में शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीरज कुमार ने कहा कि फरक्का और गंगा जल बंटवारे के मुद्दे पर आज आरजेडी सवाल उठा रही है, लेकिन उसे पहले उस समय की अपनी सरकार और उसके फैसलों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं, बल्कि बिहार के जल अधिकार और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
1996 की गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा फिर चर्चा में
नीरज कुमार ने कहा कि 12 दिसंबर 1996 को भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर संधि हुई थी। उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। जेडीयू नेता ने दावा किया कि बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने उस समय इस संधि को बिहार के हित में नहीं माना था और इसे लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी।
नीरज कुमार ने सवाल उठाया कि अगर तत्कालीन बिहार सरकार को संधि से राज्य के हित प्रभावित होने की आशंका थी, तो केंद्र सरकार के सामने बिहार का पक्ष कितनी मजबूती से रखा गया? उन्होंने आरजेडी से इस पूरे मामले पर तत्कालीन सरकार की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि बिहार के पानी और उसके अधिकार का सवाल बेहद गंभीर है। ऐसे में 1996 के दौरान सरकार की ओर से उठाए गए कदम और केंद्र के साथ किए गए पत्राचार को सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
लालू यादव ने X पर नीतीश कुमार को घेरा था
दरअसल, फरक्का बैराज को लेकर विवाद तब तेज हुआ जब लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा।

लालू यादव ने अपने बयान में कहा था कि फरक्का के मुद्दे पर नीतीश कुमार की ओर से बोलने वाले लोगों को इस विषय के इतिहास और भूगोल की जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने संसद से लेकर बिहार में अपनी सरकार के दौरान विभिन्न मंचों पर फरक्का बांध का विरोध किया था।
लालू यादव के अनुसार, उनकी सरकार ने फरक्का बैराज से बिहार को होने वाले संभावित नुकसान और खतरे को पहले ही पहचान लिया था। उन्होंने इस मुद्दे को बिहार के हितों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाया।
‘नीतीश ने संसद में फरक्का पर एक शब्द नहीं बोला’
लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने संसद में फरक्का के मुद्दे पर कभी एक शब्द नहीं बोला। लालू ने नीतीश कुमार के साथ रहने वाले नेताओं और लोगों को बिहार के जल संसाधन विभाग के दस्तावेज देखने की सलाह भी दी।
उन्होंने कहा कि फरक्का के कारण गंगा में जल उपलब्धता में कमी, बांग्लादेश के साथ हुई अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रभाव और तत्कालीन सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को समझने के लिए सरकारी दस्तावेजों का अध्ययन जरूरी है।
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लालू यादव ने तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदा नंद सिंह और केंद्र सरकार के बीच हुए पत्राचार का भी जिक्र किया। उनका दावा था कि इन दस्तावेजों से फरक्का और बिहार के जल हितों को लेकर तत्कालीन सरकार के रुख की जानकारी मिल सकती है।
JDU ने पूछा- तब बिहार के हितों से समझौता क्यों हुआ?
लालू यादव के आरोपों के जवाब में नीरज कुमार ने कहा कि आरजेडी को पहले 1996 में अपनी सरकार की भूमिका पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने गंगा जल बंटवारा संधि को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, तो उस आपत्ति को केंद्र सरकार के सामने किस स्तर तक उठाया गया?

नीरज कुमार ने कहा कि केवल वर्तमान सरकार पर आरोप लगाने से बिहार के जल अधिकार का सवाल हल नहीं होगा। 1996 में बिहार में सत्ता संभाल रही सरकार को भी यह बताना चाहिए कि संधि के दौरान राज्य के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
जेडीयू नेता ने कहा कि फरक्का बैराज और गंगा जल बंटवारा बिहार के लिए लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। गंगा के जलस्तर, सिंचाई, बाढ़ और नदी की धारा से जुड़े सवालों का सीधा असर राज्य के कई जिलों पर पड़ता है।
बाढ़ के बीच फरक्का पर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
बिहार में इस समय गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। पटना, मुंगेर, भागलपुर और बक्सर समेत गंगा किनारे के कई इलाकों में नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में फरक्का बैराज और गंगा जल बंटवारे का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
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आरजेडी जहां फरक्का बैराज को बिहार में बाढ़ और जल उपलब्धता से जोड़कर सवाल उठा रही है, वहीं जेडीयू 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि और उस समय की बिहार सरकार की भूमिका को लेकर जवाब मांग रही है।
आगे और तेज हो सकती है सियासी बहस
फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा अब केवल जल संसाधन से जुड़ा तकनीकी विषय नहीं रह गया है। बिहार में इसे लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने पुराने रिकॉर्ड और सरकारों की भूमिका को सामने रख रहे हैं।
लालू यादव के आरोपों के बाद जेडीयू ने जिस तरह 1996 की संधि के दौरान बिहार सरकार के रुख का सवाल उठाया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गर्मा सकता है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों और पुराने दस्तावेजों का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में फरक्का बैराज, गंगा जल बंटवारा संधि और बिहार के जल अधिकार से जुड़े पुराने सरकारी दस्तावेज आने वाले समय में राजनीतिक बहस का अहम आधार बन सकते हैं।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
