लालू यादव का सरकार पर बड़ा हमला, पुराने अंदाज में दिखे राजद सुप्रीमो, संजय झा को बताया नौसिखिया

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फरक्का विवाद पर लालू यादव का हमला, संजय झा के आरोपों का दिया जवाब

निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। फरक्का जल संधि और गंगा के पानी को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्हें इतिहास और भूगोल की जानकारी लेने की सलाह दी है। लालू यादव ने संजय झा का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्हें ‘नौसिखिया’ कहकर निशाना साधा।

लालू यादव का कहना है कि बिहार को फरक्का बैराज से होने वाले संभावित नुकसान का अंदाजा उन्हें काफी पहले हो गया था। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से उन्होंने संसद से लेकर राज्य की राजनीति तक फरक्का बैराज के मुद्दे को लगातार उठाया था। इस पूरे विवाद के केंद्र में 1996 की भारत-बांग्लादेश फरक्का जल संधि और बिहार में बाढ़-सुखाड़ की समस्या है।

लालू ने पुराने मुद्दे पर खोला मोर्चा

लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर फरक्का बैराज के मुद्दे पर अपनी पुरानी भूमिका का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बिहार के जल संसाधनों और गंगा नदी से जुड़े विषय को केवल राजनीतिक बयानबाजी के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

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लालू ने संजय झा का नाम लिए बिना कहा कि नीतीश कुमार के ‘खेवनहार’ बने लोगों को पहले बिहार के जल संसाधन विभाग जाकर इस विषय की जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने गंगा में पानी की उपलब्धता, बांग्लादेश के साथ हुई अंतरराष्ट्रीय संधि और तत्कालीन बिहार सरकार के प्रयासों का अध्ययन करने की बात कही।

लालू ने तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह की ओर से केंद्र सरकार के साथ किए गए पत्राचार का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि फरक्का से जुड़े मुद्दे पर बिहार की चिंता नई नहीं है और तत्कालीन सरकार ने इसे गंभीरता से उठाया था।

लालू ने साझा किया संसद का पुराना वीडियो

अपने पोस्ट के साथ लालू यादव ने संसद में दिए गए अपने पुराने बयान का वीडियो भी साझा किया। वीडियो में वह फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल समझौते पर आपत्ति जताते नजर आ रहे हैं।

लालू का पुराना तर्क था कि गंगा के पानी के बंटवारे का असर बिहार पर पड़ सकता है। उन्होंने उस समय समझौते को देशहित के नजरिए से दोबारा देखने की जरूरत बताई थी। अब वर्षों बाद उसी मुद्दे पर उनका पुराना वीडियो सामने आने से बिहार की राजनीति में फरक्का को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।

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लालू का दावा है कि फरक्का बैराज के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी। उनका कहना है कि बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर लंबे समय की नीति जरूरी है।

संजय झा ने भी लालू पर उठाए सवाल

दरअसल, इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत जेडीयू सांसद संजय झा की ओर से फरक्का बैराज के मुद्दे को लगातार उठाए जाने के बाद हुई। संजय झा ने हाल ही में एक लेख के जरिए 1996 की फरक्का जल संधि और बिहार पर उसके कथित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए थे।

संजय झा का कहना है कि 1996 में जब भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का समझौता हुआ, उस समय बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव थे और केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार में उनका राजनीतिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण था। झा का आरोप है कि उस समय बिहार की ओर से इस समझौते का पर्याप्त विरोध नहीं किया गया।

उनके अनुसार, यदि उस समय बिहार के हितों को लेकर मजबूत आपत्ति दर्ज कराई जाती तो राज्य को पिछले कई दशकों में बाढ़ और सुखाड़ जैसी समस्याओं का सामना कम करना पड़ता।

यही आरोप अब लालू यादव के पलटवार की वजह बना है। दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि फरक्का का मुद्दा अब केवल जल संसाधन का विषय नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का आधार बन गया है।

लालू और संजय झा के बीच बढ़ी सियासी तकरार

फरक्का को लेकर लालू यादव और संजय झा की बयानबाजी ऐसे समय तेज हुई है, जब बिहार में गंगा के जलस्तर और बाढ़ की समस्या भी राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में गंगा के पानी, फरक्का बैराज और बिहार के जल अधिकारों का सवाल आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन सकता है।

लालू यादव अपने पुराने राजनीतिक अंदाज में इस मुद्दे को उठाकर जेडीयू पर हमला कर रहे हैं। दूसरी ओर संजय झा इस मुद्दे के जरिए बिहार को होने वाले नुकसान का सवाल उठा रहे हैं और इसके लिए पूर्व की राजनीतिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

फरक्का बैराज आखिर है क्या?

फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर बना है। यह बांग्लादेश सीमा से करीब 18 किलोमीटर पहले स्थित है। बैराज को 1975 में चालू किया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य हुगली नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखना था, ताकि कोलकाता बंदरगाह की उपयोगिता और नदी के जलप्रवाह को बेहतर किया जा सके।

इसके बाद वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 साल की संधि हुई। इसमें फरक्का बैराज पर उपलब्ध पानी को तय फॉर्मूले के आधार पर दोनों देशों के बीच बांटने की व्यवस्था की गई।

बिहार में बाढ़ और सुखाड़ का सवाल

फरक्का बैराज को लेकर बिहार में सबसे बड़ा सवाल बाढ़ और सुखाड़ दोनों से जुड़ा रहा है। आलोचकों का तर्क है कि गंगा के ऊपरी हिस्सों में गाद जमा होने और नदी के प्रवाह में बदलाव का असर बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ता है। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि गर्मियों में पानी की उपलब्धता कम होने पर सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

हालांकि फरक्का बैराज और बिहार में बाढ़ की समस्या के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग विशेषज्ञों के अलग-अलग मत रहे हैं। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक दावों के साथ वैज्ञानिक और जल संसाधन संबंधी तथ्यों को भी समझना जरूरी है।

दिसंबर 2026 में खत्म होनी है संधि

भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई गंगा जल संधि की 30 साल की अवधि दिसंबर 2026 में पूरी होनी है। यही वजह है कि बिहार में इसके भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। बिहार के कई हितधारक लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि भविष्य की किसी भी जल व्यवस्था में राज्य के हितों को प्रमुखता दी जाए।

अब लालू यादव और संजय झा की बयानबाजी ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फरक्का जल संधि की अगली व्यवस्था को लेकर बिहार की राजनीतिक पार्टियां किस तरह अपना पक्ष रखती हैं और केंद्र के सामने राज्य के हितों को लेकर क्या रणनीति अपनाती हैं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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