भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप! 33.10 मीटर पहुंचा जलस्तर, खतरे के निशान से सिर्फ 58 सेंटीमीटर दूर
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और रविवार सुबह 33.10 मीटर पहुंच गया
निष्कर्ष भारत संवाददाता-भागलपुर। बिहार के भागलपुर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। अब नदी का पानी सिर्फ खेतों और दियारा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर और गांवों के मुहाने तक पहुंच गया है। रविवार सुबह छह बजे भागलपुर में गंगा का जलस्तर 33.10 मीटर दर्ज किया गया। नदी के बढ़ते पानी से जमुनिया धार पूरी तरह जलमग्न हो गई है, जबकि सखीचंद घाट, बूढ़ानाथ और बड़ी खंजरपुर तक गंगा का पानी पहुंच गया है। शहर से सटे लगभग सभी घाट पानी से लबालब हो चुके हैं।
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता अब और गहरी हो गई है। कई जगहों पर शनिवार तक जो जमीन और खेत दिखाई दे रहे थे, वहां रविवार को पानी फैल गया। किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती है, वहीं ग्रामीण परिवार अब घर, पशुधन और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की तैयारी में जुट गए हैं।
खतरे के निशान से महज 58 सेंटीमीटर नीचे गंगा
जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश के अनुसार, रविवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 33.10 मीटर रिकॉर्ड किया गया। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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भागलपुर में गंगा का चेतावनी स्तर 32.68 मीटर और खतरे का निशान 33.68 मीटर है। इस तरह मौजूदा जलस्तर चेतावनी स्तर से 42 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है। अब गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 58 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
भागलपुर में गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL 34.86 मीटर दर्ज है। वर्तमान जलस्तर इस स्तर से 1.76 मीटर नीचे है। जिस तरह नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, उससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शहर के करीब पहुंचा गंगा का पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब भागलपुर शहर से सटे इलाकों में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जमुनिया धार पूरी तरह जलमग्न हो गई है। सखीचंद घाट, बूढ़ानाथ और बड़ी खंजरपुर तक पानी पहुंचने से आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

शहर के गंगा किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि नदी जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे अगले एक-दो दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रहती है तो निचले मोहल्लों में पानी प्रवेश करने का खतरा बढ़ सकता है।
कई निचले स्थानों पर पानी का फैलाव तेजी से हो रहा है। कल तक जहां खाली जमीन दिखाई दे रही थी, वहां अब गंगा की धार नजर आने लगी है। इससे तटवर्ती आबादी में बाढ़ को लेकर डर बढ़ गया है।
फसल के बाद पशुचारे का संकट
गंगा के बढ़ते पानी से खेतों में लगी मक्का, सब्जी और अन्य फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। कई निचले खेतों में पानी पहुंचने से किसानों को फसल के नुकसान की चिंता सताने लगी है। हालांकि, अब ग्रामीणों की प्राथमिकता फसल बचाने से ज्यादा अपने परिवार और पशुओं को सुरक्षित रखना हो गई है।
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पानी फैलने के कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है। कई परिवार अनाज, जरूरी सामान और पशुचारा ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में उन्हें घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ सकता है।
रजंदीपुर से ममलखा तक निचले इलाकों में पानी
सबौर प्रखंड के कई गांवों के निचले इलाकों में गंगा का पानी पहुंचने लगा है। रजंदीपुर, इंग्लिश, ममलखा और फरका समेत कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन रही है। फरका के खेल मैदान में भी पानी पहुंच गया है।
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ग्रामीणों ने पानी के बहाव को रोकने और तत्काल राहत के लिए बांध पर मिट्टी डालकर रोकथाम का प्रयास किया। स्थानीय मुखिया राजेंद्र प्रसाद मंडल ने मामले की जानकारी अंचल अधिकारी और जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर को दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा की धार इसी तरह बढ़ती रही तो खेतों के बाद गांवों में पानी प्रवेश कर सकता है। हर साल बाढ़ का सामना करने वाले परिवारों में एक बार फिर विस्थापन का डर पैदा हो गया है।
कहलगांव में सहायक नदियां भी उफान पर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर कहलगांव क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। यहां गंगा के साथ उसकी सहायक नदियों कुआ, भयाना, गेरुआ और घोघा में भी पानी बढ़ा हुआ है।

पक्कीसराय, त्रिमोहन, एकचारी, धनौरा, रामपुर खड़हरा, ओगरी, तौफिल, अंठावन, बीरबन्ना, पकड़तल्ला और आमापुर चौर जैसे इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। इन क्षेत्रों में मिर्च, मक्का और अन्य फसलों को नुकसान होने की आशंका है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की नजर लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते नाव, राहत सामग्री और सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था करनी चाहिए।
ऊपरी क्षेत्रों के बढ़ते पानी से भागलपुर पर दबाव
गंगा के ऊपरी क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने का असर अब डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। पटना क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव की ओर पानी का दबाव बढ़ा है।
ऐसे में भागलपुर में अगले कुछ दिनों तक गंगा के जलस्तर पर विशेष निगरानी जरूरी हो गई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चुनौती अब तटबंधों की सुरक्षा के साथ-साथ निचले इलाकों में रहने वाली आबादी को संभावित बाढ़ से बचाने की है।
फिलहाल गंगा चेतावनी स्तर को पार कर चुकी है और खतरे के निशान से महज 58 सेंटीमीटर नीचे है। नदी का पानी जिस तेजी से खेतों से गांवों और शहर के करीब पहुंच रहा है, उसने भागलपुर में बाढ़ की आशंका को और गहरा कर दिया है। आने वाले 24 से 48 घंटे तटवर्ती इलाकों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
