बिहार में दर्जनों जगहों पर बनेंगे नए बाइपास, जाम से मिलेगी राहत; केंद्र और राज्य सरकार ने तेज किया काम
बिहार में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई जगहों पर नए बाइपास बनाए जा रहे हैं। अरवल, जमुई, आरा, बक्सर, पूर्णिया समेत कई जिलों में बाइपास परियोजनाएं मंजूर और निर्माणाधीन हैं।
पटना: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और प्रमुख शहरों-कस्बों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए बाइपास निर्माण की योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ-साथ बिहार पथ निर्माण विभाग भी कई स्थानों पर नए बाइपास का निर्माण करा रहा है। कई परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि कुछ जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार के कई शहरों में भारी वाहनों और लंबी दूरी के ट्रैफिक को शहर के अंदर से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। इससे जाम की समस्या कम होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी घटने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार की राशि से इन जगहों पर बनेंगे बाइपास
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार में कई महत्वपूर्ण बाइपास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। अरवल जिले में एनएच-139 पर नौबतपुर-हरिहरगंज मार्ग में करीब 12 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाइपास के निर्माण को स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा जमुई जिले के झाझा क्षेत्र में मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोना और नरगंजो में बाइपास निर्माण की योजना को भी मंजूरी मिली है। पश्चिम चंपारण में भैरोगंज बाइपास का निर्माण भी केंद्र की स्वीकृत परियोजनाओं में शामिल है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात को सुगम बनाना और आबादी वाले इलाकों में वाहनों के दबाव को कम करना है।
कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रहा बाइपास का काम
बिहार में सिर्फ नई परियोजनाओं को मंजूरी ही नहीं दी जा रही, बल्कि कई स्थानों पर बाइपास निर्माण का काम भी चल रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाओं में छपरा और रिविलगंज बाइपास, आरा बाइपास, बक्सर-चौसा बाइपास और शेखपुरा बाइपास प्रमुख हैं।
इसी तरह जमुई, खैरा, कटोरिया, बांका, पंजवारा और लखपुरा बाइपास की परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। सीमांचल और दक्षिण बिहार के लिए भी कई महत्वपूर्ण बाइपास परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनमें रानीगंज बाइपास, औरंगाबाद-दाउदनगर बाइपास और पूर्णिया बाइपास शामिल हैं।
उत्तर बिहार में मधुबनी, बेनीपट्टी और उच्चैठ से जुड़ी बाइपास परियोजनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं के जरिए शहरों और कस्बों में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।
नाबार्ड के ऋण से भी बनेंगे कई बाइपास
बिहार में बाइपास निर्माण का दायरा राष्ट्रीय राजमार्गों तक सीमित नहीं है। राज्य के पथ निर्माण विभाग की ओर से भी कई जिलों और प्रमुख कस्बों में बाइपास बनाने की तैयारी है। इसके लिए नाबार्ड से मिलने वाली ऋण राशि का इस्तेमाल किया जाना है।
पथ निर्माण विभाग और नाबार्ड के बीच ऋण को लेकर हुए समझौते के तहत जिन सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाना है, उनमें बड़ी संख्या में बाइपास परियोजनाएं भी शामिल हैं। इससे उन इलाकों में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी, जहां भारी ट्रैफिक के कारण शहर के भीतर लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है।
प्रगति यात्रा में हुई घोषणाओं को जमीन पर उतारने की तैयारी
बिहार में प्रस्तावित कई बाइपास परियोजनाओं का संबंध तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं से है। यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में स्थानीय स्तर पर सड़क, यातायात और कनेक्टिविटी से जुड़ी जरूरतों का जायजा लिया गया था। इसी क्रम में कई स्थानों पर बाइपास निर्माण की घोषणा की गई थी।
इन घोषणाओं के तहत आरा के पीरो में भी बाइपास बनाने की योजना है। पीरो में बाइपास बनने से शहर के भीतर गुजरने वाले वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
इसके अलावा पटना जिले के बिहटा और मनेर में भी बाइपास निर्माण की योजना है। राजधानी पटना के आसपास तेजी से बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए इन परियोजनाओं को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन जिलों में भी प्रस्तावित हैं बाइपास
पथ निर्माण विभाग के स्तर से बिहार के कई अन्य हिस्सों में भी बाइपास निर्माण की योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें मधुबनी और जयनगर, गोपालगंज और मीरगंज, फारबिसगंज और अररिया, किशनगंज, सुपौल और त्रिवेणीगंज, नवादा और हिसुआ तथा सीतामढ़ी और शिवहर शामिल हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से स्थानीय लोगों को शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही दूसरे जिलों और राज्यों से आने-जाने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होंगे।
बाइपास से क्या होगा फायदा?
बिहार में बाइपास निर्माण का सबसे बड़ा फायदा शहरों और कस्बों के ट्रैफिक पर पड़ेगा। फिलहाल कई प्रमुख सड़कों से गुजरने वाले भारी वाहन शहर के बीच से होकर निकलते हैं। इससे पीक आवर में जाम की समस्या गंभीर हो जाती है।
बाइपास बनने के बाद लंबी दूरी के वाहनों को शहर के बाहर से निकाला जा सकेगा। इससे यात्रा का समय कम होने, ईंधन की बचत, सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम में कमी और स्थानीय बाजारों में ट्रैफिक दबाव घटने की उम्मीद है।
सड़क संपर्क बेहतर होने से व्यापार और परिवहन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। खासकर सीमावर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, केंद्र और राज्य सरकार की इन परियोजनाओं के जरिए बिहार में सड़क नेटवर्क को विस्तार देने के साथ-साथ शहरों को जाम से राहत दिलाने की कोशिश की जा रही है। स्वीकृत और निर्माणाधीन परियोजनाओं के साथ यदि प्रस्तावित बाइपास भी समय पर पूरे होते हैं, तो आने वाले वर्षों में राज्य के कई प्रमुख शहरों और कस्बों की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
