मॉनसून देश में फिर हुआ सक्रिय, बिहार समेत इन राज्यों में भारी वर्षा का अलर्ट, हिमालयी क्षेत्र में बारिश की संभावना

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मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, जानिए किन राज्यों में होगी भारी बारिश

निष्कर्ष भारत, संवाददाता नई दिल्ली। मॉनसून एक बार फिर देश के कई हिस्सों में सक्रिय हो गया है। मॉनसून की नई गतिविधियों ने मौसम विभाग की चिंता और किसानों की उम्मीद, दोनों को एक साथ बढ़ा दिया है। मॉनसून के ताजा सिस्टम के कारण पूर्वी भारत, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, देश के कुछ हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है।

मॉनसून की स्थिति को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश में कुल बारिश के आंकड़े और जमीन पर वास्तविक स्थिति एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। कहीं बाढ़ जैसे हालात हैं तो कहीं सूखे की स्थिति बनी हुई है। यही वजह है कि मौसम वैज्ञानिक अब केवल कुल वर्षा के आंकड़ों के बजाय बारिश के भौगोलिक वितरण, उसकी तीव्रता और उसके समय पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

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मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 18 अगस्त के बीच देश में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, यह कमी अभी भी पूरी की जा सकती है, लेकिन इसके लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

मॉनसून की असमान बारिश ने बढ़ाई चिंता

इस वर्ष मॉनसून का सबसे बड़ा संकट उसका असमान वितरण रहा है। कुछ राज्यों में सामान्य से कहीं अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि कई इलाकों में बारिश लंबे समय तक नहीं हुई। मौसम विज्ञान के अनुसार, केवल कुल वर्षा के आंकड़ों से किसी मौसम का सही आकलन नहीं किया जा सकता। यह भी देखना जरूरी होता है कि बारिश किस क्षेत्र में हुई, कितने दिनों तक हुई और उसका कृषि तथा जल संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ा।

मॉनसून के कारण इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी बारिश के आसार हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों में अधिकांश स्थानों पर मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान प्रत्यक्ष वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित होते हैं। इनमें उपग्रह चित्रों, रडार प्रणाली, समुद्री गतिविधियों और वायुमंडलीय दबाव का विश्लेषण शामिल होता है।

मॉनसून के प्रभाव से उत्तर भारत में बदल सकता है मौसम

उत्तर भारत में हिमालयी क्षेत्रों में अच्छी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में आंधी, बिजली और तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। हालांकि, किसी विशेष जिले में कितनी बारिश होगी, इसका सटीक अनुमान लगाना अभी भी मौसम विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

मॉनसून की गतिविधियों से मध्य भारत में बढ़ेगा बारिश का दौर

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी वर्षा का अनुमान लगाया गया है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में भी लगातार बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, अत्यधिक वर्षा फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

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मॉनसून के कारण पूर्वी भारत में क्यों बढ़ रही है बारिश?

पूर्वी भारत इस समय मॉनसून की सबसे सक्रिय पट्टी में शामिल है। झारखंड, बिहार और ओडिशा में बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कई स्थानों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है। पूर्वी भारत में बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी बारिश की तीव्रता को बढ़ा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का नया क्षेत्र विकसित होता है, तो बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

मॉनसून के प्रभाव से पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी बदलेगा मौसम

पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश की संभावना जताई गई है। कई राज्यों में आंधी और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। दक्षिण भारत में केरल और लक्षद्वीप में भारी बारिश हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। पश्चिमी तट के कोंकण और गोवा क्षेत्र में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है।

मॉनसून और अल नीनो के संकेत क्यों बढ़ा रहे हैं चिंता?

इस वर्ष अल नीनो के संकेतों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। इस वर्ष यदि अल नीनो और मजबूत होता है, तो सितंबर में बारिश की रिकवरी प्रभावित हो सकती है।

मॉनसून की 13 प्रतिशत कमी क्या सितंबर में पूरी हो पाएगी?

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि बंगाल की खाड़ी में मजबूत कम दबाव के क्षेत्र बनते हैं और सितंबर में लगातार बारिश होती है, तो 13 प्रतिशत की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। लेकिन यदि सितंबर में बारिश कमजोर रहती है, तो यह कमी पूरे मॉनसून सीजन के अंत तक बनी रह सकती है।

मॉनसून की सबसे बड़ी चुनौती अब अनियमित बारिश है

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल सूखा नहीं है, बल्कि मॉनसून का लगातार अनियमित होना भी है। जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। कहीं अत्यधिक बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रहती है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी परिस्थितियां और बढ़ सकती हैं।

इसलिए केवल बारिश के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय जल प्रबंधन, कृषि नीति और आपदा प्रबंधन को भी मजबूत करना होगा। फिलहाल, देश की नजर सितंबर के मौसम पर टिकी हुई है। यही महीना तय करेगा कि इस बार का मॉनसून सामान्य स्थिति के करीब पहुंच पाएगा या फिर बारिश की कमी का असर कृषि और जल संसाधनों पर लंबे समय तक दिखाई देगा।

Nishkarsh Bharat

पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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