जमुई के बिहारी स्कूल में शाम 6:30 बजे तक लहराता रहा तिरंगा, प्रधानाध्यापक पर लापरवाही का आरोप
शाम 6:30 बजे तक लहराता रहा तिरंगा, ग्रामीणों ने खुद उतारा झंडा।
निष्कर्ष भारत संवादाता जमुई: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में तिरंगे को सम्मान देने के बीच जमुई जिले के एक सरकारी स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिहारी में 15 अगस्त को फहराया गया राष्ट्रीय ध्वज शाम करीब 6:30 बजे तक नहीं उतारा गया। स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल के प्रधानाध्यापक मुरारी मंडल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन स्कूल परिसर में तिरंगा फहराया गया था, लेकिन सूर्यास्त के बाद भी उसे उतारा नहीं गया। शाम के समय स्कूल परिसर में वॉलीबॉल खेलने पहुंचे युवकों की नजर जब स्कूल में लगे तिरंगे पर पड़ी, तब उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक नीचे उतारा।
सूर्यास्त के बाद भी लहराता रहा तिरंगा
स्थानीय लोगों के अनुसार, 15 अगस्त की शाम करीब छह बजे के बाद कुछ युवक स्कूल परिसर में वॉलीबॉल खेलने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर स्कूल परिसर में लगे राष्ट्रीय ध्वज पर पड़ी। उस समय तक तिरंगा पोल पर लहरा रहा था।
ग्रामीणों का आरोप है कि सूर्यास्त के बाद भी स्कूल प्रबंधन की ओर से राष्ट्रीय ध्वज को नहीं उतारा गया था। इसके बाद युवकों ने खुद आगे बढ़कर तिरंगे को सम्मानपूर्वक उतारा।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे में इसके रखरखाव और सम्मान को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
प्रधानाध्यापक पर मनमानी का आरोप
ग्रामीणों ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिहारी के प्रधानाध्यापक मुरारी मंडल पर लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब स्वतंत्रता दिवस के बाद स्कूल में तिरंगा देर तक लगा रहा हो।
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से 15 अगस्त के दिन स्कूल में ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय ध्वज को समय पर उतारने में लापरवाही बरती जाती रही है। आरोप है कि कई बार ग्रामीणों को ही आगे आकर तिरंगा उतारना पड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार ऐसी स्थिति सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्कूल प्रबंधन की लापरवाही बढ़ती जा रही है।
राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर उठे सवाल
इस मामले ने राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सरकारी संस्थानों में नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
ऐसे में ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय ध्वज को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उतारना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल जैसे शिक्षण संस्थान में बच्चों को देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की सीख दी जाती है। इसलिए वहां राष्ट्रीय ध्वज को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर विषय है।
प्रशासन की चुप्पी पर भी ग्रामीण नाराज
ग्रामीणों ने इस मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले वर्षों में भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते स्कूल प्रबंधन को निर्देश और चेतावनी दी जाती तो ऐसी घटना दोबारा नहीं होती। प्रशासन की कथित चुप्पी के कारण प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई का दबाव नहीं बन पाया और लापरवाही का सिलसिला जारी रहा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
डीएम और डीईओ से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जमुई के जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक मुरारी मंडल से स्पष्टीकरण तलब करने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों का पालन हर सरकारी संस्थान में अनिवार्य रूप से होना चाहिए। स्कूल प्रबंधन को ध्वजारोहण और ध्वज अवरोहण की प्रक्रिया को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों ने खुद उतारा तिरंगा
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शाम तक स्कूल परिसर में तिरंगा लगा रहने के बाद वहां मौजूद स्थानीय युवकों ने स्वयं राष्ट्रीय ध्वज को उतारा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर युवकों की नजर तिरंगे पर नहीं पड़ती तो यह कितनी देर तक लगा रहता, इसका कोई पता नहीं था।
घटना की तस्वीर भी स्थानीय ग्रामीणों की ओर से सामने आने की बात कही जा रही है। अब ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग मामले की जांच करे और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करे।
फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है। वहीं, पूरे मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक और संबंधित शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
कीमती कुमारी की रिपोर्ट
