पटना में 2.80 करोड़ की जमीन का खेल, फर्जी दस्तावेज से रजिस्ट्री का आरोप, प्राथमिक दर्ज

जमीन

पटना में 2.80 करोड़ की जमीन पर फर्जी रजिस्ट्री का आरोप।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। जमीन धोखाधड़ी के एक बड़े मामले ने राजधानी पटना में सनसनी मचा दी है। शाहपुर थाना क्षेत्र के दरियापुर में जमीन दिलाने के नाम पर 2.80 करोड़ रुपये लेने और बाद में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाया गया है। बेली रोड निवासी राजेश कुमार की शिकायत पर शाहपुर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित ने जमीन के पैसे वापस मांगने पर धमकी और रंगदारी मांगने का भी आरोप लगाया है।

पुलिस ने मामले की जांच की जिम्मेदारी एसआई रोहित रंजन कुमार को सौंपी है। शिकायत में जमीन के सौदे, भुगतान, रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज और धमकी समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता और पूरे लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

जमीन के सौदे से शुरू हुआ पूरा विवाद

राजेश कुमार की ओर से शाहपुर थाना प्रभारी को दी गई शिकायत के मुताबिक आरोपी मनोज कुमार उर्फ विनय कुमार ने खुद को मौजा दरियापुर स्थित चार कट्ठा जमीन का वैध मालिक बताया था। शिकायत में जमीन का थाना नंबर 105, तौजी नंबर 2591, खाता नंबर 38 और सर्वे प्लॉट नंबर 553 बताया गया है।

पीड़ित के अनुसार, जमीन खरीदने के लिए 3 सितंबर 2022 को बोरिंग रोड में एग्रीमेंट किया गया था। इसके बाद उन्होंने आरोपी को अलग-अलग माध्यमों से रकम का भुगतान किया। शिकायत के मुताबिक नगद, चेक और ऑनलाइन माध्यम से कुल 2.80 करोड़ रुपये दिए गए।

आरोप है कि रकम लेने के बाद जमीन की जो रजिस्ट्री कराई गई, वह बाद में त्रुटिपूर्ण और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों पर आधारित पाई गई। इसी बिंदु को लेकर जमीन के सौदे का विवाद गहरा गया।

जमीन की रजिस्ट्री को लेकर उठे सवाल

पीड़ित का कहना है कि जब दस्तावेजों की जांच कराई गई तो रजिस्ट्री को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस जमीन को वैध बताकर सौदा किया गया था, उससे संबंधित दस्तावेजों में गड़बड़ी थी।

पुलिस अब यह जांच करेगी कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज वास्तविक थे या नहीं और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं। इसके साथ ही भुगतान की पूरी प्रक्रिया और एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही जमीन के वास्तविक स्वामित्व और कथित दस्तावेजी गड़बड़ी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आरोपी पर भू-माफिया होने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे आदतन भू-माफिया बताया है। पीड़ित का दावा है कि आरोपी के खिलाफ शाहपुर और दानापुर थानों में पहले से कई मामले दर्ज हैं।

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शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय स्तर पर भी जांच चल रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी।

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने पहचान छिपाने और लोगों को कथित तौर पर ठगने के लिए ‘विनय कुमार’ नाम से अलग पहचान पत्र भी बनवा रखा है। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर सकती है।

पैसे वापस मांगने पर धमकी का आरोप

राजेश कुमार के अनुसार, जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो विवाद बढ़ गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और हथियार दिखाकर जान से मारने की धमकी दी।

पीड़ित के मुताबिक 15 जनवरी 2026 को समझौते के प्रयास के दौरान भी उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया। शिकायत में कहा गया है कि उनसे जमीन की रजिस्ट्री नहीं करने की स्थिति में ढाई करोड़ रुपये रंगदारी देने की मांग की गई।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसे यह धमकी भी दी गई कि मांग पूरी नहीं करने पर उसे उसके कार्यस्थल से उठवा लिया जाएगा। पुलिस अब इस कथित धमकी और रंगदारी की मांग से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है।

जमीन विवाद में पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

शाहपुर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें 115(2), 126(2), 316(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 308(3), 351(2), 352 सहित अन्य धाराएं शामिल हैं।

इन धाराओं के तहत पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, जमीन के दस्तावेजों, भुगतान के प्रमाण और कथित धमकी से जुड़े साक्ष्यों की जांच करेगी।

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पुलिस की जांच में यह भी देखा जाएगा कि जमीन के सौदे के दौरान किन लोगों की भूमिका थी और रकम का भुगतान किस-किस माध्यम से किया गया।

दस्तावेज और भुगतान की जांच अहम

इस मामले में जमीन से जुड़े दस्तावेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। एग्रीमेंट, रजिस्ट्री दस्तावेज, जमीन के स्वामित्व से संबंधित कागजात और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच से पूरे विवाद की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

2.80 करोड़ रुपये के लेनदेन के कारण बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। पुलिस शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पक्षों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर सकती है। यदि जांच में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा या धोखाधड़ी की पुष्टि होती है तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जमीन मामले में जांच के बाद तय होगी सच्चाई

फिलहाल यह पूरा मामला शिकायत और उसमें लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस जांच के अधीन है। आरोपी पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

शाहपुर पुलिस अब जमीन के सौदे से लेकर कथित धमकी और रंगदारी मांगने तक सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

राजधानी में करोड़ों रुपये की जमीन के इस विवाद ने एक बार फिर संपत्ति की खरीद-बिक्री में दस्तावेजों की जांच और वैध स्वामित्व सुनिश्चित करने के महत्व को सामने ला दिया है। फिलहाल पुलिस की जांच पर ही पूरे मामले की अगली तस्वीर निर्भर है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट