हार्डिंग पार्क टर्मिनल: फाइलों में तेज, जमीन पर सुस्त, 15 साल पहले हुई थी घोषणा

हार्डिंग पार्क टर्मिनल का काम सुस्त, एक भी पिलर नहीं बना

95 करोड़ के हार्डिंग पार्क टर्मिनल का निर्माण अब तक बेहद सुस्त

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। हार्डिंग पार्क टर्मिनल को पटना जंक्शन के बढ़ते यात्री और ट्रेनों के दबाव को कम करने के लिए एक अहम परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। करीब 95 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पैसेंजर टर्मिनल के निर्माण को लेकर रेलवे की ओर से कई स्तर पर दावे किए गए, लेकिन जमीन पर तस्वीर इसके उलट है। परियोजना के पहले चरण का शिलान्यास हुए सवा साल से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद निर्माण स्थल पर अब तक एक भी पिलर खड़ा नहीं हो सका है। फाउंडेशन का काम भी अधूरा पड़ा है।

निर्माण स्थल पर पहुंचने पर काम की रफ्तार का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। परिसर में मशीनें खड़ी हैं और लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने के कारण उनके जंग खाने की स्थिति बन गई है। पूरब दिशा में नाले के निर्माण के लिए गहरी खुदाई की गई है। इसमें लोहे के छड़ बिछाकर काम को आगे बढ़ाने के बजाय छोड़ दिया गया है। पिलर और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए करीब तीन स्थानों पर गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन वहां भी ढलाई का काम बेहद सीमित नजर आता है।

हार्डिंग पार्क टर्मिनल की जमीन पर सुस्त रफ्तार

हार्डिंग पार्क टर्मिनल का उद्देश्य पटना जंक्शन पर बढ़ते दबाव को कम करना है। पटना जंक्शन शहर का प्रमुख रेलवे स्टेशन होने के कारण यहां लगातार यात्रियों और ट्रेनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में अलग पैसेंजर टर्मिनल विकसित होने से ट्रेनों के संचालन को व्यवस्थित करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की उम्मीद जताई गई थी।

परियोजना को लेकर कागजों पर कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण की वास्तविक गति बेहद धीमी है। शिलान्यास के बाद जिस तेजी से निर्माण आगे बढ़ना चाहिए था, वह अब तक दिखाई नहीं दे रही है। हार्डिंग पार्क टर्मिनल परियोजना के तय समय पर पूरा होने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

योजना से शिलान्यास तक ऐसे बढ़ी परियोजना

हार्डिंग पार्क टर्मिनल की योजना पटना जंक्शन को डी-कंजेस्ट करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। अगस्त 2021 में रेलवे बोर्ड की ओर से इसके लिए प्लान तैयार किया गया। इसके बाद परियोजना के लिए जरूरी जमीन की व्यवस्था बड़ी चुनौती बनी रही।

दिसंबर 2024 में रेलवे और बिहार सरकार के बीच जमीन की अदला-बदली का समझौता हुआ। इसके तहत हार्डिंग पार्क की 4.8 एकड़ जमीन रेलवे को मिली। इसके बदले रेलवे ने गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए अपनी 19 एकड़ जमीन दी। जमीन का इंतजाम होने के बाद परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद थी।

इसके बाद 30 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना के पहले चरण का वर्चुअल शिलान्यास किया। शिलान्यास के बाद माना गया कि अब निर्माण कार्य में तेजी आएगी और लंबे समय से प्रस्तावित परियोजना धरातल पर आकार लेने लगेगी। हालांकि, मौजूदा स्थिति इन उम्मीदों पर सवाल खड़े करती है।

हार्डिंग पार्क टर्मिनल पर अल्टीमेटम भी बेअसर

हार्डिंग पार्क टर्मिनल निर्माण की धीमी रफ्तार को लेकर रेलवे के स्तर पर नाराजगी भी सामने आ चुकी है। 30 अप्रैल 2026 को पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने परियोजना की प्रगति पर नाराजगी जताते हुए काम में तेजी लाने के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था।

अल्टीमेटम के बाद उम्मीद थी कि निर्माण स्थल पर गतिविधियां बढ़ेंगी, मशीनें सक्रिय होंगी और फाउंडेशन से लेकर पिलर निर्माण तक काम तेजी से आगे बढ़ेगा। लेकिन इसके करीब चार महीने बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। निर्माण स्थल पर काम की सुस्ती यह बताती है कि सिर्फ निर्देश और समय-सीमा तय करने से परियोजना की रफ्तार नहीं बढ़ी है।

रास्ते में कई तकनीकी अड़चनें

परियोजना के निर्माण में सिर्फ निर्माण एजेंसी की धीमी गति ही चुनौती नहीं है। रेलवे से जुड़े एक जानकार इंजीनियर के अनुसार, पटना जंक्शन के पश्चिमी छोर पर मौजूद वाशिंग पिट लाइन नई रेल लाइन बिछाने में बड़ी अड़चन बन रही है।

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नई रेल लाइन के लिए इस व्यवस्था को शिफ्ट या री-डिजाइन करना जरूरी होगा। जब तक इस हिस्से को लेकर स्पष्ट तकनीकी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक टर्मिनल से जुड़ा रेल ढांचा तैयार करने में परेशानी बनी रह सकती है।

इसके अलावा रेलवे के इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार यानी एसएंडटी, ऑपरेटिंग विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। अलग-अलग विभागों के स्तर पर काम आगे बढ़ने के बावजूद यदि आपसी तालमेल नहीं बनता है तो परियोजना की समय-सीमा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

लागत बढ़ने का भी मंडरा रहा खतरा

निर्माण में देरी का असर सिर्फ समय पर नहीं, बल्कि परियोजना की लागत पर भी पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि हार्डिंग पार्क टर्मिनल निर्माण कार्य इसी तरह धीमा रहा तो पहले चरण के लिए निर्धारित लागत में बढ़ोतरी की संभावना है।

अनुमान है कि देरी के कारण लागत में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है। निर्माण सामग्री, श्रम और अन्य संसाधनों की कीमतों में बदलाव के साथ लंबे समय तक परियोजना अटकी रहने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।

यात्रियों को कब मिलेगी राहत?

हार्डिंग पार्क टर्मिनल के निर्माण का सबसे बड़ा उद्देश्य पटना जंक्शन के मौजूदा दबाव को कम करना है। ऐसे में परियोजना की धीमी गति का सीधा असर भविष्य की यात्री सुविधाओं पर पड़ सकता है। जब तक नया टर्मिनल तैयार नहीं होता, पटना जंक्शन पर मौजूदा ढांचे और संसाधनों पर ही यात्रियों और ट्रेनों का दबाव बना रहेगा।

फिलहाल परियोजना हार्डिंग पार्क टर्मिनल की जमीनी स्थिति यह है कि शिलान्यास के सवा साल से अधिक समय बाद भी एक भी पिलर खड़ा नहीं हुआ है। कुछ हिस्सों में खुदाई और शुरुआती ढलाई के निशान जरूर हैं, लेकिन मुख्य निर्माण का आकार अभी जमीन पर दिखाई नहीं देता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 95 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना आखिर कब कागजों से निकलकर पूरी तरह धरातल पर आएगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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