बिहार में फिर बाढ़ का संकट, सीएम सम्राट ने लिया जलस्तर का जायजा, बोले- अगले 48 घंटे बेहद अहम, अलर्ट रहे

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बिहार में गंगा और गंडक का जलस्तर बढ़ा है। CM सम्राट चौधरी ने जायजा लिया और अगले 48 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में एक बार फिर बाढ़ का संकट गहराता दिखाई दे रहा है। गंगा, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। गंडक के कई स्थानों पर पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बहने और तटबंधों पर बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने निगरानी और राहत-बचाव कार्य तेज कर दिया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में मरीन ड्राइव के पास गंगा के जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने और राहत एवं बचाव कार्य पूरी तत्परता से चलाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण हैं और प्रशासन को लगातार सतर्क रहना होगा।

बिहार में गंगा-गंडक का बढ़ा दबाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा और गंडक में पानी की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने राहत कार्यों में वायु सेना से सहयोग मांगा है और उम्मीद जताई कि जल्द ही एयरफोर्स की मदद उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक फिलहाल कई स्थानों पर कटाव की स्थिति नहीं है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर और तटबंधों पर बन रहे दबाव को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है।

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बिहार जल संसाधन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर की सुबह डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर अपने निर्धारित उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर दर्ज किया गया। रेवा घाट और लालगंज में भी गंडक का जलस्तर ऊंचा बना रहा।

बिहार में तटबंधों पर बढ़ा दबाव

नेपाल और उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद गंडक में पानी बढ़ने से बिहार के कई जिलों में दबाव बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार गंडक का भारी डिस्चार्ज पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा रहा है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार कुछ संवेदनशील स्थानों पर पानी के रिसाव की सूचना भी मिली है। इन स्थानों पर बाढ़ नियंत्रण दलों को निगरानी के लिए लगाया गया है और चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

बिहार में कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

गंडक के साथ-साथ बिहार की अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। सरकारी बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों में बागमती, घाघरा, गंगा और गंडक के कई निगरानी केंद्रों पर जलस्तर चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है।

मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। इसी तरह घाघरा और गंगा के कई केंद्रों पर भी जलस्तर ऊंचा है। पटना और भागलपुर क्षेत्र में गंगा के जलस्तर पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

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गंडक के डुमरियाघाट और रेवा घाट जैसे स्थानों पर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग स्थानों पर नदियों का जलस्तर और रुझान एक समान नहीं है, इसलिए स्थानीय स्तर पर लगातार निगरानी जरूरी बनी हुई है।

बिहार के इन जिलों में बाढ़ का असर

नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर राज्य के कई जिलों के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पटना, भोजपुर, सुपौल, सहरसा, भागलपुर, बेगूसराय, समस्तीपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, बक्सर और अरवल समेत कई जिलों में प्रशासन को सतर्क रखा गया है।

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक गंडक के उफान से पश्चिमी चंपारण समेत उत्तर बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ का दबाव बढ़ा है। कुछ क्षेत्रों में तटबंधों को नुकसान और पानी के फैलाव की स्थिति भी सामने आई है।

बिहार में गंडक सबसे बड़ी चुनौती

वर्तमान स्थिति में गंडक नदी प्रशासन के लिए प्रमुख चुनौती बनी हुई है। नेपाल में भारी बारिश के बाद नदी में पानी बढ़ा और वाल्मीकिनगर बैराज से बड़े पैमाने पर पानी का प्रवाह हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर में गंडक का डिस्चार्ज 5,43,500 क्यूसेक तक पहुंचा था, जो 2026 में अब तक का उच्चतम डिस्चार्ज बताया गया है।

भारी प्रवाह के बाद नदी का दबाव तटबंधों पर बढ़ा। इसके चलते संवेदनशील स्थानों पर जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

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हालांकि बाद के आंकड़ों में कुछ स्थानों पर जलस्तर में कमी का रुझान भी दर्ज किया गया है, लेकिन नदी के ऊंचे स्तर के कारण खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

बिहार में अगले 48 घंटे क्यों अहम?

मुख्यमंत्री ने अगले 48 घंटे को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया है। इसका कारण यह है कि गंडक समेत कई नदियों में पानी का दबाव अभी बना हुआ है। नदी का जलस्तर घटने के बावजूद ऊंचे स्तर पर बने रहने से तटबंधों पर दबाव तत्काल समाप्त नहीं होता।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन को कमजोर तटबंधों, कटाव संभावित स्थानों, जल निकासी और निचले इलाकों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत और बचाव संसाधनों को तैयार रखा जा रहा है।

वायु सेना से भी मांगी गई मदद

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान में वायु सेना की मदद लेने की बात कही है। मुख्यमंत्री के अनुसार इसके लिए सहयोग मांगा गया है। हवाई माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाने की क्षमता ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो सकती है।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने बाढ़ से प्रभावित पश्चिमी चंपारण का हवाई सर्वेक्षण भी किया था। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत शिविर, भोजन, नाव और बचाव व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

बिहार में प्रशासन की बढ़ी निगरानी

प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा, प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखना है। जल संसाधन विभाग की निगरानी व्यवस्था में विभिन्न नदियों के जलस्तर और प्रवाह की लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।

बिहार में इस समय स्थिति सभी इलाकों में एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर पानी घटने का रुझान है, जबकि कुछ डाउनस्ट्रीम इलाकों में जलस्तर बढ़ रहा है। ऐसे में अगले 48 घंटे में नदियों के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और प्रभावित क्षेत्रों में पानी के फैलाव पर विशेष नजर रहेगी।

सरकार और प्रशासन की ओर से लोगों से संवेदनशील इलाकों में सावधानी बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। फिलहाल गंगा और गंडक समेत प्रमुख नदियों की स्थिति को देखते हुए बिहार के कई जिलों में बाढ़ की चुनौती बनी हुई है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट