अनंत-नीरज विवाद में नया ट्विस्ट, संजय झा बोले- ललन बाबू ने जो किया, वह पार्टी हित में, हम जीतेंगे

संजय झा

संजय झा बोले- ललन सिंह ने पार्टी हित में काम किया, अनंत-नीरज विवाद

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच जदयू के अंदर चल रहे अनंत सिंह और नीरज कुमार विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। पटना स्नातक सीट से पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर खड़े हुए मोकामा विधायक अनंत सिंह को मनाने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी गई थी। ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत के बाद कहा कि दोनों के बीच विवाद पुरानी घटनाओं और शिकायतों से जुड़ा है।

इसी बीच जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ललन सिंह की पहल को पार्टी हित में उठाया गया कदम बताया है। संजय झा के बयान के बाद पार्टी के भीतर इस विवाद को सुलझाने की कोशिशों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि अनंत सिंह ने नीरज कुमार के समर्थन का ऐलान नहीं किया है।

संजय झा बोले- ललन बाबू ने पार्टी हित में काम किया

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सुलझाने के लिए ललन सिंह की पहल पर संजय झा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने जो किया, वह पार्टी के हित में किया है। संजय झा की ओर से विवाद को खत्म करने के प्रयास का समर्थन किए जाने के बाद जदयू के भीतर यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि संगठन इस मामले को बातचीत के जरिए संभालना चाहता है।

वहीं मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी कहा कि ललन सिंह ने जो बातें उनके संज्ञान में आईं, उन्हें पार्टी के सामने रखा और विवाद को सुलझाने का रास्ता सुझाया। उन्होंने ललन सिंह की कोशिश की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी को उम्मीद है कि उनके प्रयास के बाद मामला खत्म होने की दिशा में बढ़ सकता है।

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हालांकि, राजनीतिक तौर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनंत सिंह अभी नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार करने को तैयार नहीं हुए हैं। ललन सिंह के मुताबिक, उन्होंने सार्वजनिक रूप से नीरज के खिलाफ बयान नहीं देने पर सहमति जताई है।

अनंत-नीरज विवाद की जड़ पुरानी नाराजगी

ललन सिंह के अनुसार अनंत सिंह की नाराजगी अचानक पैदा नहीं हुई है। उनका कहना है कि अनंत ने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ अभियान चलाया गया और उस समय पार्टी की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

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ललन सिंह ने यह भी कहा कि जब अनंत सिंह के खिलाफ प्रचार किया जा रहा था, तब प्रदेश पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना चाहिए था। उनके अनुसार उस समय कार्रवाई नहीं होना पार्टी की ओर से चूक थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “क्रिया और प्रतिक्रिया” के संदर्भ में समझाया।

यही पुरानी नाराजगी अब पटना स्नातक सीट के एमएलसी चुनाव में सामने आती दिखाई दे रही है। नीरज कुमार को जदयू ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि अनंत सिंह सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन से दूरी बना चुके हैं।

नीतीश कुमार की ललन सिंह से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल

विवाद के बीच सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पटना स्थित ललन सिंह के आवास पर मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई।

इस मुलाकात के बाद ललन सिंह ने अनंत सिंह से अपनी बातचीत और विवाद को सुलझाने की कोशिशों के बारे में जानकारी दी। घटनाक्रम को पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा गया।  

अनंत सिंह ने साफ किया था अपना रुख

अनंत सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह नीरज कुमार के लिए प्रचार नहीं करेंगे। वह नीरज के बजाय जन सुराज के पटना स्नातक उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।

2 अक्टूबर को अनंत सिंह अनुज सिंह के नामांकन में पहुंचे थे और उनके समर्थन में रोड शो भी किया था। इसके बाद उन्होंने नालंदा और नवादा में भी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया। वारिसलीगंज में उन्होंने लोगों से अनुज सिंह के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी।

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ऐसे में पार्टी के लिए चुनौती केवल अनंत सिंह को सार्वजनिक बयान देने से रोकने तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह भी है कि उनके समर्थक और प्रभाव वाले क्षेत्र में पटना स्नातक सीट के चुनाव पर इसका क्या असर पड़ता है।

भगवान कुशवाहा बोले- एक विधायक छिटके हैं, लौट आएंगे

विवाद के बीच मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने भी पार्टी की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने भरोसा दिलाया है कि सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने अनंत सिंह को पार्टी से अलग होकर जाने वाले एक विधायक के रूप में देखते हुए उम्मीद जताई कि वह वापस पार्टी की लाइन पर आ जाएंगे।

कुशवाहा ने यह भी कहा कि जदयू में सभी लोग एकजुट हैं और नीरज कुमार चुनाव नहीं हारेंगे। हालांकि चुनाव के परिणाम से जुड़ी ऐसी राजनीतिक टिप्पणियां नेताओं के दावे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति मतदान और परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।

सीएम आवास पर नेताओं की बैठक से क्या निकला?

देर शाम मुख्यमंत्री आवास पर संजय झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी समेत वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। बताया गया कि बैठक में संगठन में अनुशासन बनाए रखने और विवाद को सुलझाने पर चर्चा हुई।

संजय झा ने इस बैठक के बाद पार्टी की कोशिश यही दिखाई दे रही है कि चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से अलग-अलग संदेश न जाएं। पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार हैं और पार्टी संगठन की ओर से उनके समर्थन में काम करने की अपील लगातार की जा रही है।

संजय झा के बाद निशांत भी नीरज के साथ

अनंत सिंह के रुख के बीच जदयू के भीतर नीरज कुमार के समर्थन में भी नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं से नीरज की जीत के लिए काम करने की अपील की है।

इसके बाद निशांत कुमार भी नीरज कुमार के समर्थन में सामने आए। उन्होंने नीरज के लिए चुनावी प्रचार का कार्यक्रम बनाया है। इससे पार्टी के भीतर नीरज के समर्थन में एक अलग राजनीतिक लाइन स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।

एक तरफ अनंत सिंह जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में सार्वजनिक रूप से सक्रिय हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के प्रमुख नेता नीरज कुमार के पक्ष में मैदान में उतर रहे हैं।

आरजेडी ने भी विवाद पर साधा निशाना

जदयू के अंदर चल रहे इस विवाद पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राजद के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने जदयू के अंदरूनी मतभेदों को लेकर पार्टी पर निशाना साधा और दावा किया कि दो लोग जदयू को खत्म करने में लगे हैं।

उन्होंने नीतीश कुमार और निशांत कुमार से पार्टी की स्थिति पर ध्यान देने की अपील भी की। हालांकि ये विपक्षी नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जिसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

अब असली परीक्षा पटना स्नातक सीट पर

अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद अब केवल दो नेताओं के बीच मतभेद का मामला नहीं रह गया है। पटना स्नातक सीट के चुनाव में यह जदयू के लिए संगठनात्मक चुनौती भी बन गया है।

ललन सिंह की बातचीत के बाद कम से कम इतना बदलाव जरूर आया है कि अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से नीरज के खिलाफ बयान नहीं देने पर सहमति जताई है। लेकिन उन्होंने नीरज के समर्थन का वादा नहीं किया है। यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है।

अब देखना यह होगा कि चुनाव प्रचार आगे बढ़ने के साथ अनंत सिंह का रुख कितना बदलता है और जदयू अपने उम्मीदवार नीरज कुमार के पक्ष में संगठन को किस तरह एकजुट रख पाता है। फिलहाल संजय झा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की कोशिश विवाद को सार्वजनिक टकराव से निकालकर पार्टी के भीतर संवाद के रास्ते पर ले जाने की दिखाई दे रही है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट