पटना में आंगनबाड़ी में सांप ने 5 साल के बच्चे को डंसा, मौत, ग्रामीणों ने किया हंगामा
पटना आंगनबाड़ी में सांप ने 5 साल के बच्चे को डंसा, मौत के बाद हंगामा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र में सांप के डंसने से पांच साल के बच्चे की मौत के बाद हंगामा खड़ा हो गया। घटना बेढ़ना गांव के पोथमा टोले की है, जहां गुरुवार को इशु कुमार रोज की तरह आंगनबाड़ी केंद्र गया था। खाना खाने के बाद चापाकल के पास हाथ धोने के दौरान सांप ने उसकी उंगली में डंस लिया। इलाज में देरी और कथित लापरवाही को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर NH-30A जाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आंगनबाड़ी कर्मियों पर कार्रवाई, पूरे मामले की जांच और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। अधिकारियों के आश्वासन के बाद सड़क से जाम हटाया गया।
पटना के बाढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र में हादसा
जानकारी के मुताबिक इशु कुमार टुनटुन महतो का बेटा था। परिजनों ने बताया कि वह रोज की तरह आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा था। करीब 11 बजे खाना खाने के बाद वह केंद्र परिसर में मौजूद चापाकल के पास हाथ धोने गया।
इसी दौरान वहां मौजूद सांप ने उसकी उंगली में डंस लिया। सांप के काटने के बाद बच्चा घबरा गया और कथित तौर पर आंगनबाड़ी सहायिका को इसकी जानकारी दी। इसके बाद क्या कार्रवाई हुई, इसी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
परिजनों का आरोप है कि बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाने की व्यवस्था नहीं की गई। उनका यह भी कहना है कि एंबुलेंस बुलाने के बजाय बच्चे को पैदल घर भेज दिया गया।
पटना में 50 मीटर दूर था बच्चे का घर
परिजनों के मुताबिक, इशु आंगनबाड़ी केंद्र से करीब 50 मीटर दूर स्थित अपने घर पहुंचा। उसने मां को सांप के काटने की जानकारी दी। बच्चे की हालत देखकर परिवार के लोग उसे इलाज के लिए लेकर निकल पड़े।
पटना में सांप के काटने के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में परिजन अब इसी बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि बच्चे को तुरंत चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी। हालांकि, इस संबंध में आंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
पहले झाड़-फूंक, फिर अस्पताल पहुंचे परिजन
परिजनों के अनुसार, आसपास के लोगों की सलाह पर बच्चे को पहले झाड़-फूंक कराने के लिए बड़हिया ले जाया गया। वहां मौजूद पुजारी ने बच्चे को मृत बताया। इसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
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परिवार बच्चे को शेखपुरा लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद बच्चे को बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन वहां भी चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एक छोटे बच्चे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना की खबर गांव में फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुटने लगे।
पटना में बच्चे की मौत के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण
पटना में इशु की मौत की खबर सामने आने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। लोगों ने बच्चे का शव सड़क पर रखकर NH-30A को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अगर समय रहते बच्चे को इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
ग्रामीण आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था और वहां मौजूद कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े स्थान पर इस तरह की घटना गंभीर चिंता का विषय है।
सड़क जाम होने से NH-30A पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया।
पटना में कार्रवाई और मुआवजे की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग थी कि मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही मृत बच्चे के परिवार को सरकारी प्रावधान के अनुसार उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा देने की मांग भी की गई।
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पटना प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाएगा। उचित प्रक्रिया के तहत पीड़ित परिवार को सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क से शव हटाया और जाम समाप्त कर दिया।
परिवार ने लगाया लापरवाही का आरोप
मृत बच्चे के परिजनों ने आंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चे ने सांप के काटने की जानकारी दी थी, फिर भी उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने या एंबुलेंस की व्यवस्था करने का प्रयास नहीं किया गया।
परिवार का दावा है कि अगर घटना के तुरंत बाद चिकित्सा सहायता मिलती तो बच्चे की जान बच सकती थी। हालांकि, यह परिजनों का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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आंगनबाड़ी केंद्र की ओर से तत्काल कोई पक्ष सामने नहीं आया है। सीडीपीओ से भी संपर्क नहीं हो पाने के कारण इस मामले में विभाग का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट नहीं है।
जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी
पटना की घटना के बाद अब प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि बच्चे को सांप के डंसने के बाद केंद्र पर क्या कदम उठाए गए, कर्मचारियों ने घटना की जानकारी किसे दी और बच्चे को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या प्रयास किए गए।
इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में सांप कैसे पहुंचा और वहां बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था थी, इन पहलुओं की भी जांच की जरूरत है।
बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हो गया है, लेकिन घटना ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा और आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पटना की घटना ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
पटना के बाढ़ के बेढ़ना गांव में हुई यह घटना एक परिवार के लिए बेहद दुखद है। वहीं, इससे यह सवाल भी सामने आया है कि ग्रामीण इलाकों के आंगनबाड़ी केंद्रों में आपात स्थिति से निपटने की कितनी तैयारी है।
प्रशासन के आश्वासन के बाद NH-30A पर यातायात सामान्य हो गया है। अब ग्रामीणों की नजर जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है। जिम्मेदारी किसकी थी और घटना के बाद निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
राज कुमार की रिपोर्ट
