सोने-चांदी के दाम क्या बढ़ेंगे ? फेस्टिव सीजन से पहले बड़ा अपडेट, लगेगा झटका

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सोने-चांदी के दाम बढ़ेंगे? फेस्टिव सीजन से पहले 3% IGST का झटका

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। सोने-चांदी खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए फेस्टिव सीजन से पहले एक अहम अपडेट सामने आया है। सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर मिलने वाली 3 प्रतिशत इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी IGST छूट को खत्म करने की सिफारिश की गई है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो इसका असर आयात करने वाले बैंकों और नामित एजेंसियों की लागत पर पड़ सकता है। आगे चलकर इसका असर घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी फिटमेंट कमेटी ने कीमती धातुओं के आयात पर IGST छूट को लेकर यह सिफारिश की है। ऐसे में त्योहारों के दौरान सोने और चांदी की मांग बढ़ने के बीच कीमतों को लेकर खरीदारों की चिंता बढ़ गई है।

सोने पर 3% IGST छूट खत्म करने की सिफारिश

जीएसटी फिटमेंट कमेटी ने बैंकों और कुछ नामित एजेंसियों द्वारा सोना, चांदी और प्लेटिनम आयात करने पर मिलने वाली 3 प्रतिशत IGST छूट को खत्म करने की सिफारिश की है। इस छूट की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी।

जीएसटी काउंसिल की सिफारिश के बाद सोने के आयात पर बैंकों और कुछ एजेंसियों को यह सुविधा दी गई थी। इसका उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात से जुड़े कारोबार को आसान बनाना था। बाद में इस व्यवस्था का विस्तार चांदी और प्लेटिनम के आयात तक भी किया गया।

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अब फिटमेंट कमेटी ने इस छूट को वापस लेने का सुझाव दिया है। अगर सिफारिश लागू होती है तो संबंधित आयात पर 3 प्रतिशत IGST देना पड़ सकता है।

सोने का आयात हर कोई नहीं कर सकता

भारत में सोने के आयात को लेकर नियम काफी सख्त हैं। कोई भी व्यक्ति या कंपनी अपनी इच्छा से विदेश से सोना मंगाकर भारत में नहीं बेच सकती। इसके लिए निर्धारित नियमों और सरकारी अनुमति का पालन करना होता है।

मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT की ओर से नामित एजेंसियां सोने का आयात कर सकती हैं। इसके अलावा इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज यानी IIBX के माध्यम से पात्र ज्वेलर्स को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत सोना आयात करने की अनुमति है।

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भारत और यूएई के बीच समझौते के तहत विशेष कोटा पाने वाली कुछ कंपनियां और संस्थाएं भी निर्धारित शर्तों के साथ सोना आयात कर सकती हैं।

सोने के आयात नियमों में सूची बदली, छूट पर सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने और चांदी के आयात के लिए पात्र बैंकों की पिछली सूची 31 मार्च 2026 तक वैध थी। इसके बाद DGFT ने 17 अप्रैल 2026 को नई अधिसूचना जारी की। इसमें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक की अवधि के लिए बैंकों की नई सूची जारी की गई।

हालांकि, संबंधित IGST छूट वाली अधिसूचना को DGFT की नई सूची के अनुसार अपडेट नहीं किया गया। इसी वजह से अब छूट को लेकर स्थिति में बदलाव आया है।

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फिटमेंट कमेटी के दस्तावेजों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से कुछ श्रेणियों में आने वाले बैंकों के लिए IGST छूट उपलब्ध नहीं है। वहीं सूची 15 के तहत आने वाली नामित एजेंसियों के लिए यह छूट जारी रहने की बात सामने आई है।

सोने-चांदी पर फिर लग सकता है 3% IGST

फिटमेंट कमेटी ने सूची 13, 14 और 15 के अंतर्गत आने वाले बैंकों और नामित एजेंसियों द्वारा सोना, चांदी और प्लेटिनम आयात पर IGST छूट खत्म करने की सिफारिश की है।

इसका सीधा मतलब यह है कि संबंधित आयात पर 3 प्रतिशत IGST लागू हो सकता है। हालांकि, इस पूरी व्यवस्था को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आयात पर टैक्स लगने का असर हमेशा उसी अनुपात में अंतिम ग्राहक की कीमत पर नहीं पड़ता।

बाजार में कीमत तय होने के दौरान अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर-रुपये की विनिमय दर, आयात लागत, घरेलू मांग, प्रीमियम और अन्य कारोबारी खर्च भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सोने के दाम पर कैसे पड़ सकता है असर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर 3 प्रतिशत IGST छूट खत्म होती है तो क्या सोने-चांदी के दाम भी बढ़ जाएंगे? विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर लागत और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइडर आरमनी की सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट और रिसर्च मैनेजर मौमिता सामंता ने लल्लनटॉप से बातचीत में बताया कि सोना, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर दोबारा 3 प्रतिशत IGST लागू होने से बैंकों और ज्वेलर्स की वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ सकती है।

यानी आयात के समय कारोबारियों को ज्यादा रकम लगानी पड़ सकती है। इसका असर बाजार में कीमत और प्रीमियम पर पड़ने की संभावना बन सकती है।

फेस्टिव सीजन में सोने की मांग बढ़ी तो असर ज्यादा?

भारत में फेस्टिव सीजन के दौरान सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है। धनतेरस, दिवाली और शादी के सीजन में आभूषणों की मांग आम दिनों की तुलना में बढ़ सकती है।

ऐसे समय अगर आयात की लागत बढ़ती है और बाजार में मांग भी मजबूत रहती है, तो सोने पर प्रीमियम बढ़ने की संभावना बन सकती है। मौमिता सामंता के मुताबिक इससे कुछ समय के लिए इन धातुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।

हालांकि, इसे सोने और चांदी के दाम बढ़ने की पक्की भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। कीमतों पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर पड़ता है।

खरीदारों को अभी क्या समझना चाहिए?

सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि 3 प्रतिशत IGST के संभावित असर को सीधे बाजार भाव में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के तौर पर नहीं देखा जाए।

फिटमेंट कमेटी के दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि बैंक और नामित एजेंसियां भुगतान किए गए IGST पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का दावा करने के लिए पात्र होंगी। ऐसे में वास्तविक लागत पर असर स्थिति और कारोबार की संरचना पर निर्भर करेगा। इसलिए सोना या चांदी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए रोजाना बाजार भाव पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

सोने-चांदी के खरीदारों की बढ़ी नजर

फेस्टिव सीजन से पहले सोने-चांदी के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में संभावित बदलाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। 3 प्रतिशत IGST छूट हटाने की सिफारिश के बाद आयात लागत, प्रीमियम और घरेलू मांग के बीच का समीकरण महत्वपूर्ण हो जाएगा।

सिफारिश के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोने-चांदी के दाम निश्चित रूप से बढ़ेंगे। लेकिन अगर त्योहारी मांग मजबूत रही और आयात लागत का दबाव बढ़ा, तो आने वाले समय में कीमतों पर तेजी का दबाव बन सकता है। ऐसे में खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों की नजर अब सरकार और जीएसटी से जुड़े अगले आधिकारिक फैसले पर रहेगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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