बिहार में UPI ने तोड़े रिकॉर्ड, 3 महीने में ट्रांजैक्शन 10 लाख करोड़ के पार, बढ़ा क्रेज

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UPI ने बिहार में बनाया नया रिकॉर्ड, 3 महीने में 10 लाख करोड़ का लेनदेन

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में डिजिटल भुगतान का चलन अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा है। गांवों की छोटी दुकानों से लेकर शहरों के बाजार तक QR कोड और UPI भुगतान रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच बिहार में UPI के जरिए 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। यह आंकड़ा राज्य के बैंकों में जमा कुल राशि से भी काफी ज्यादा है।

बिहार के बैंकों में 6,23,768 करोड़ रुपये की कुल जमा राशि बताई गई है, जबकि अप्रैल-जून की तीन महीने की अवधि में UPI लेनदेन का मूल्य 10,16,864 करोड़ रुपये रहा। आंकड़ों ने राज्य में तेजी से बढ़ती डिजिटल भुगतान की आदत की तस्वीर सामने रखी है।

UPI बना बिहार के रोजमर्रा के भुगतान का हिस्सा

बिहार में डिजिटल भुगतान की रफ्तार का अंदाजा QR कोड स्कैन के आंकड़े से भी लगाया जा सकता है। अप्रैल से जून के दौरान राज्य में करीब 2 अरब 98 करोड़ 74 लाख बार QR कोड स्कैन किए गए। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में लोग दुकानों, सेवाओं और रोजमर्रा की खरीदारी के लिए नकदी के बजाय मोबाइल से भुगतान कर रहे हैं।

राज्य में कुल 12.26 करोड़ सक्रिय बैंक खाते बताए गए हैं। इनमें 10.19 करोड़ खाते आधार से जुड़े हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 80 फीसदी खाताधारक रोजाना के लेनदेन के लिए UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

340 रुपये का औसत UPI ट्रांजैक्शन

बिहार के डिजिटल भुगतान आंकड़ों में एक और बात खास है। प्रत्येक UPI ट्रांजैक्शन का औसत मूल्य करीब 340 रुपये रहा। यह आंकड़ा बताता है कि UPI का इस्तेमाल सिर्फ बड़े भुगतान के लिए नहीं बल्कि छोटी-छोटी दैनिक जरूरतों के लिए भी किया जा रहा है।

किराना दुकान, सब्जी, दवा, चाय-नाश्ता या दूसरी छोटी खरीदारी में QR स्कैन कर भुगतान करना अब आम होता जा रहा है। यही वजह है कि बिहार में डिजिटल लेनदेन की संख्या तेजी से बढ़ी है। औसत टिकट साइज कम होना इस बात का संकेत है कि UPI आम उपभोक्ता की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों में गहराई से शामिल हो चुका है।

हर दिन 3.32 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन

आंकड़ों के मुताबिक बिहार में औसतन हर दिन करीब 3.32 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। यह बदलाव केवल बैंकिंग व्यवस्था का विस्तार नहीं दिखाता, बल्कि मोबाइल इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता की बढ़ती पहुंच को भी दर्शाता है।

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कुछ साल पहले जहां नकद भुगतान को सबसे आसान तरीका माना जाता था, वहीं अब कई जगह दुकानदार खुद QR कोड के जरिए भुगतान लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं। छोटे कस्बों और ग्रामीण बाजारों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

UPI के बढ़ते इस्तेमाल से क्या बदला?

UPI ने भुगतान की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। ग्राहक को बड़ी मात्रा में नकदी रखने की जरूरत नहीं पड़ती और दुकानदार को भी छुट्टे पैसे रखने की समस्या कम होती है। भुगतान कुछ सेकंड में बैंक खाते से दूसरे खाते तक पहुंच जाता है।

डिजिटल भुगतान का एक दूसरा फायदा लेनदेन का रिकॉर्ड भी है। मोबाइल ऐप में भुगतान की जानकारी उपलब्ध रहने से व्यक्ति अपने खर्च का हिसाब देख सकता है। छोटे कारोबारियों के लिए भी डिजिटल लेनदेन उनके कारोबार की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करता है।

अब 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर क्या होगा?

UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच 15 अक्टूबर 2026 से कुछ बड़े व्यापारी भुगतान पर 0.4 फीसदी Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने की व्यवस्था घोषित की गई थी। यह शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M लेनदेन पर लागू होना था और इसका भुगतान व्यापारी को करना था। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई थी।

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हालांकि, आज सामने आई रिपोर्टों में इस व्यवस्था को आगे टालने पर विचार किए जाने की बात कही गई है। इसलिए 15 अक्टूबर की तारीख को अंतिम रूप से लागू होने वाली स्थिति के रूप में लिखना अभी उचित नहीं होगा।

आम ग्राहक पर सीधे शुल्क का असर नहीं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले लेनदेन पर शुल्क लागू नहीं किया जाना है। 2,000 रुपये तक के सामान्य P2M भुगतान भी इस MDR व्यवस्था से बाहर रखे गए हैं।

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इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को रकम ट्रांसफर करना या छोटे मूल्य की खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना सामान्य रूप से मुफ्त रहेगा। बैंकों को भी व्यापारी पर लगने वाले MDR को ग्राहक से अलग से वसूलने की अनुमति नहीं है।

छोटे दुकानदारों के लिए राहत

नई MDR व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए भी छूट का प्रावधान रखा गया है। QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक UPI भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे विक्रेताओं को MDR से बाहर रखने की व्यवस्था बताई गई है। इससे छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त लागत का दबाव कम रखने की कोशिश की गई है।

बिहार में ATM की संख्या भी बढ़ी

डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ने के बावजूद बिहार में ATM की संख्या में भी वृद्धि हुई है। जून 2026 में राज्य में ATM की संख्या 7,176 बताई गई, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 6,898 थी।

यह तस्वीर बताती है कि डिजिटल और पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था फिलहाल साथ-साथ चल रही है। लोग छोटी और रोजमर्रा की खरीदारी के लिए UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि नकदी की जरूरत के लिए ATM अब भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

क्या बिहार बन रहा है कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर?

बिहार में UPI के आंकड़े निश्चित तौर पर डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता दिखाते हैं। तीन महीने में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का UPI कारोबार और अरबों QR स्कैन इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं।

हालांकि इसे पूरी तरह “कैशलेस बिहार” कहना अभी जल्दबाजी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में नकद लेनदेन की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।

फिर भी आंकड़ों से इतना स्पष्ट है कि बिहार में भुगतान का तरीका तेजी से बदल रहा है। जिस QR कोड को कुछ वर्ष पहले शहरों तक सीमित तकनीक माना जाता था, वह अब छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच चुका है। आने वाले समय में UPI और डिजिटल बैंकिंग की यह रफ्तार बिहार की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की रोजमर्रा की वित्तीय आदतों को और बदल सकती है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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