शारदीय नवरात्र पर बिहार के मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब, पटना में भक्तों की लंबी कतार, विराजेंगी माता रानी

नवरात्र

बिहार में शारदीय नवरात्र शुरू होते ही पटना, बांका, सीवान और बक्सर के मंदिरों व गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। जानें प्रमुख अपडेट।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में शारदीय नवरात्र के आगाज के साथ ही भक्तिमय माहौल बन गया है। पटना से लेकर बांका, सीवान, बक्सर और बेगूसराय तक मंदिरों और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मां दुर्गा के दर्शन, पूजा-अर्चना और कलश स्थापना के लिए सुबह से ही भक्त मंदिरों में पहुंचने लगे। पटना सिटी के प्रसिद्ध पटन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली, वहीं बांका के तिलडीहा दुर्गा मंदिर में जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में भक्त जुटे। कई श्रद्धालु गंगा घाटों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए देवी के दरबार पहुंचे और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

शारदीय नवरात्र के पहले दिन घरों में भी कलश स्थापना और देवी आराधना की तैयारियां की गईं। मंदिरों में सजावट, माता का भव्य श्रृंगार और आरती के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। नवरात्र के दौरान अगले कई दिनों तक मंदिरों और पूजा स्थलों पर भक्तों की भीड़ बढ़ने की संभावना है।

नवरात्र पर पटना के पटन देवी मंदिर में लंबी कतार

राजधानी पटना के पटना सिटी स्थित पटन देवी मंदिर में नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु कतार में खड़े रहे। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और मां दुर्गा का विशेष श्रृंगार किया गया। भक्तों ने मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती में हिस्सा लेकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की।

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नवरात्र के अवसर पर पटन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से आसपास के इलाके में भी धार्मिक गतिविधियां तेज रहीं। दूर-दराज से आने वाले भक्त मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दे रहा है।

बांका के तिलडीहा दुर्गा मंदिर में जलाभिषेक के लिए उमड़े भक्त

बांका जिले के प्रसिद्ध तिलडीहा दुर्गा मंदिर में नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। यहां बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे। श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की।

भक्तों ने मां दुर्गा को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदिर में जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और एक लाख से अधिक भक्तों के जलाभिषेक करने की बात सामने आई है। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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तिलडीहा मंदिर में नवरात्र के दौरान हर साल श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ती है। पहले दिन की भीड़ से यहां धार्मिक उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नवरात्र पर बक्सर और बेगूसराय के गंगा घाटों पर भीड़

नवरात्र के पहले दिन गंगा स्नान और कलश स्थापना के लिए विभिन्न घाटों पर भी श्रद्धालु पहुंचे। बक्सर में भक्त गंगा स्नान करने और कलश में पवित्र जल भरने के लिए घाटों पर जुटे। श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ के लिए गंगाजल लिया और अपने घरों तथा पूजा स्थलों की ओर रवाना हुए।

बेगूसराय के सिमरिया घाट पर भी गंगा स्नान के लिए भक्तों की भीड़ देखी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में पवित्र स्नान के बाद कलश स्थापना और देवी की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी परंपरा के तहत श्रद्धालु घाटों पर पहुंचकर पूजा की तैयारियां करते नजर आए।

खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित नयागांव सीढ़ी गंगा घाट पर भी भक्तों ने कलश भरने की परंपरा निभाई। नवरात्र के पहले दिन गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पर्व के धार्मिक महत्व को रेखांकित किया।

सीवान के दुर्गा मंदिरों में भी भक्तों की भीड़

    सीवान जिले में भी शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने मंदिर पहुंचे। कई स्थानों पर श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।

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    नवरात्र के पहले दिन मंदिरों में पूजा, आरती और देवी के दर्शन का सिलसिला जारी रहा। पर्व को लेकर लोगों में उत्साह है और घरों में भी पूजा की तैयारियां की गई हैं। आने वाले दिनों में अष्टमी, नवमी और विजयादशमी से जुड़े आयोजनों के कारण धार्मिक स्थलों पर गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।

    नवरात्र में कलश स्थापना और देवी पूजा का महत्व

    शारदीय नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, शुभ मुहूर्त में वेदोक्त मंत्रों के साथ घट स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इसके बाद नौ दुर्गा स्वरूपों की आराधना, मंत्रोच्चार, आरती और भोग अर्पित करने की परंपरा है।

    कलश स्थापना के साथ कई घरों में अखंड दीप जलाया जाता है और श्रद्धालु पूरे नवरात्र व्रत रखते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। हालांकि, पूजा की विधि और मुहूर्त के लिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से जानकारी ले सकते हैं।

    इस बार तिथि की गणना और पर्व की अवधि को लेकर पंचांग के अनुसार अलग-अलग विवरण सामने आ सकते हैं। इसलिए अष्टमी, नवमी और विजयादशमी की सटीक तारीख और पूजा का मुहूर्त स्थानीय पंचांग से जांचना उचित होगा।

    गज पर आगमन और विदाई को लेकर धार्मिक मान्यता

    नवरात्र में देवी दुर्गा के आगमन और विदाई के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, इस बार देवी के आगमन और विदाई को हाथी से जोड़ा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी को सुख, समृद्धि, खुशहाली और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।

    श्रद्धालु इन मान्यताओं के आधार पर मां दुर्गा की आराधना करते हैं और देश, समाज तथा परिवार की उन्नति की कामना करते हैं। इन धार्मिक व्याख्याओं को आस्था और परंपरा के संदर्भ में देखा जाता है।

    बिहार में नवरात्र को लेकर भक्तों में उत्साह

    शारदीय नवरात्र के पहले दिन बिहार के अलग-अलग जिलों से सामने आ रही तस्वीरों में मंदिरों और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी दिखाई दे रही है। पटना के पटन देवी मंदिर से लेकर बांका के तिलडीहा दुर्गा मंदिर और बेगूसराय के सिमरिया घाट तक भक्त पूजा-अर्चना में जुटे हैं।

    नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि बिहार के अनेक परिवारों और समुदायों के लिए आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का अवसर भी है। आने वाले दिनों में देवी पंडालों की सजावट, विशेष पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के साथ पर्व की रौनक बढ़ने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मंदिरों और घाटों पर जाते समय भीड़ का ध्यान रखने, स्थानीय निर्देशों का पालन करने और पूजा स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने की जरूरत है।

    Nishkarsh Bharat

    राज कुमार की रिपोर्ट

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