पटन देवी मंदिर में उमड़े भक्त, तांत्रिक विधि से होती है पूजा, जानें रात में पायल की आवाज का रहस्य!
पटन देवी मंदिर में नवरात्र की धूम, जानें पायल की आवाज की मान्यता
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही पटना के प्रसिद्ध बड़ी पटन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं। पटना सिटी स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, देवी के तीन स्वरूपों, विशेष पूजा पद्धति और हवन कुंड से जुड़ी कथाओं के लिए जाना जाता है। मंदिर को 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। यहां नवरात्र के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा होती है, जबकि महाअष्टमी की आधी रात को गुप्त तांत्रिक अनुष्ठान किए जाने की परंपरा बताई जाती है।
इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहती है। मंदिर के महंत के अनुसार, मां को नगर रक्षिका कहा जाता है और ऐसी धार्मिक मान्यता है कि वे रात में नगर का भ्रमण करती हैं। नवरात्र के दौरान आधी रात को मंदिर परिसर में पायल की आवाज सुनाई देने की बात भी कही जाती है। हालांकि, यह आस्था और स्थानीय परंपरा से जुड़ा विश्वास है, इसकी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पटन देवी मंदिर में मां के तीन स्वरूपों की पूजा
बड़ी पटन देवी मंदिर के गर्भगृह में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार, तीनों प्रतिमाएं काले पत्थर से बनी हैं। नवरात्र के अवसर पर इनका विशेष श्रृंगार किया जाता है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है। मंदिर में भैरव की प्रतिमा भी स्थापित है, जिनकी पूजा का अपना धार्मिक महत्व माना जाता है।
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नवरात्र के दौरान प्रतिपदा से लेकर विसर्जन तक मंदिर में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। विशेष दिनों में पूजा, आरती और भोग के आयोजन मंदिर के धार्मिक वातावरण को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।
मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, बड़ी पटन देवी को शक्तिपीठ के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। इसी कारण बिहार ही नहीं, दूसरे क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पटन देवी मंदिर में आधी रात की तांत्रिक पूजा
बड़ी पटन देवी मंदिर में वैदिक पूजा के साथ तांत्रिक परंपरा का भी महत्व बताया जाता है। मंदिर के महंत के मुताबिक, महाअष्टमी के दिन वैदिक और तांत्रिक दोनों विधियों से पूजा की जाती है। तांत्रिक अनुष्ठान आधी रात को गुप्त रूप से संपन्न किए जाने की परंपरा है। इस पूजा को देखने की अनुमति आम श्रद्धालुओं को नहीं होती।
तांत्रिक साधना भारतीय धार्मिक परंपराओं की एक विशिष्ट विधा मानी जाती है। इसके अनुष्ठानों में मंत्र, निर्धारित पूजा-विधि और परंपरागत नियमों का पालन किया जाता है। पटन देवी मंदिर में इससे जुड़ी मान्यताएं मंदिर की विशिष्ट पहचान का हिस्सा हैं।
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महाअष्टमी को नवरात्र के प्रमुख दिनों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा करते हैं और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। मंदिर की परंपराओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए वहां के अधिकृत पुजारियों या महंत से संपर्क किया जा सकता है।
रात में पायल की आवाज का क्या है रहस्य?
पटन देवी मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित लोकमान्यताओं में रात के समय पायल की आवाज सुनाई देने की बात शामिल है। मंदिर के महंत के अनुसार, मां को नगर रक्षिका माना जाता है। स्थानीय धार्मिक विश्वास है कि माता रात में नगर का भ्रमण करती हैं और नवरात्र के दौरान आधी रात में मंदिर में पायल की आवाज सुनाई देती है।
इस कथा को भक्त देवी की उपस्थिति और नगर की रक्षा से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, इस आवाज के स्रोत या उसके वास्तविक कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे प्रमाणित घटना के बजाय मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता और लोककथा के रूप में समझना उचित है।
देश के कई प्राचीन मंदिरों के साथ स्थानीय कथाएं और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएं जुड़ी होती हैं। पटन देवी मंदिर में पायल की आवाज की चर्चा भी इसी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। श्रद्धालुओं के लिए इसका महत्व आस्था से जुड़ा है।
पटन देवी मंदिर के हवन कुंड से जुड़ी अनोखी मान्यता
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यहां स्थित हवन कुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। स्थानीय मान्यता है कि हवन कुंड का संबंध पाताल लोक से है और इसमें डाली गई हवन सामग्री के अवशेष बाहर नहीं निकाले जाते।
मंदिर से जुड़ी परंपरा के मुताबिक, महानवमी के दिन पूर्णाहुति के समय हवन कुंड में हुमाद और नारियल सहित अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। ऐसी मान्यता बताई जाती है कि पूर्णाहुति के दौरान हवन सामग्री का ढेर चार से पांच फीट तक ऊंचा हो जाता है और बाद में सामग्री अपने आप नीचे चली जाती है। इसे श्रद्धालु हवन कुंड की विशेषता से जोड़कर देखते हैं।
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हालांकि, हवन सामग्री के अपने आप नीचे जाने और पाताल लोक से संबंध होने की बात धार्मिक मान्यता के दायरे में आती है। इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। फिर भी मंदिर की परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था में हवन कुंड का महत्वपूर्ण स्थान है।
51 शक्तिपीठों में शामिल होने की मान्यता
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे। मान्यता है कि इस दौरान माता सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। बड़ी पटन देवी मंदिर को भी इन्हीं शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यहां स्थापित महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं अत्यंत प्राचीन हैं। इन्हें सतयुग का बताया जाता है, लेकिन प्रतिमाओं की सटीक ऐतिहासिक तिथि की स्वतंत्र पुष्टि के लिए पुरातात्विक प्रमाण आवश्यक हैं।

मंदिर के इतिहास को लेकर यह भी कहा जाता है कि सम्राट अशोक के शासनकाल में इसका स्वरूप वर्तमान की तुलना में छोटा था। ऐसी ऐतिहासिक मान्यताओं और धार्मिक कथाओं के कारण मंदिर पटना की प्रमुख आस्था स्थलों में गिना जाता है।
नवरात्र में अलग-अलग व्यंजनों का लगता है भोग
पटन देवी मंदिर में नवरात्र के दौरान देवी को अलग-अलग दिनों में विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। खीर, हलवा और पुआ जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार, शनिवार को मां को खिचड़ी का भोग भी लगाया जाता है।
नवरात्र के दिनों में भक्त पूजा-अर्चना के साथ प्रसाद अर्पित करते हैं। महाअष्टमी और महानवमी पर विशेष अनुष्ठानों का महत्व रहता है। इन अवसरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के कारण दर्शन के लिए समय लेकर पहुंचना उपयोगी हो सकता है।
पटना में कहां है बड़ी पटन देवी मंदिर, कैसे पहुंचें?
बड़ी पटन देवी मंदिर पटना सिटी क्षेत्र में स्थित है। पटना जंक्शन से श्रद्धालु ऑटो या बस के माध्यम से गांधी मैदान और अशोक राजपथ की ओर आकर पटना सिटी पहुंच सकते हैं। पटना साहिब रेलवे स्टेशन से भी ऑटो लेकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। गायघाट की ओर से आने वाले श्रद्धालु स्थानीय रास्तों की जानकारी लेकर आगे बढ़ सकते हैं।
नवरात्र के दौरान भीड़ को देखते हुए यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखना बेहतर होगा। मंदिर पहुंचने से पहले स्थानीय यातायात की स्थिति और दर्शन संबंधी निर्देशों की जानकारी लेना भी उपयोगी है।
बड़ी पटन देवी मंदिर धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपराओं और स्थानीय लोककथाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्र में यहां उमड़ने वाली भीड़ मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाती है। तांत्रिक पूजा, हवन कुंड और पायल की आवाज से जुड़ी मान्यताएं इस मंदिर को विशिष्ट पहचान देती हैं।
राज कुमार की रिपोर्ट
