दिल्ली में अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक्शन, 273 CAPF कंपनियों की तैनाती बढ़ाने की मांग
दिल्ली में अफवाह फैलाने वालों पर पुलिस का एक्शन
निष्कर्ष भारत संवाददाता- नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाने के मामलों में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने गलत जानकारी और भ्रामक नैरेटिव फैलाने के आरोप में सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ चार FIR दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान से संचालित होने के संदेह वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट भी जांच के दायरे में हैं। इस बीच, संभावित प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से 273 कंपनियों की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती 20 अक्टूबर तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट के खिलाफ चार FIR
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए गए। पुलिस का आरोप है कि कुछ हैंडल्स ने घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया और ऐसी सामग्री साझा की, जिससे लोगों के बीच भ्रम और तनाव फैल सकता था।
इन्हीं मामलों की जांच करते हुए दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने चार FIR दर्ज की हैं। पुलिस साइबर सेल की मदद से संबंधित पोस्ट, वीडियो और अकाउंट्स की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भ्रामक सामग्री कहां से पोस्ट की गई, उसे किन लोगों ने साझा किया और इसके पीछे क्या मंशा थी।
हालांकि, FIR दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अकाउंट्स के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो चुके हैं। मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी और कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल्स भी जांच के दायरे में
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कुछ ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान हुई है, जिनके पाकिस्तान से संचालित होने का संदेह है। आरोप है कि इन अकाउंट्स के जरिए भारत विरोधी संदेश और भ्रामक सामग्री फैलाने की कोशिश की गई।
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सूत्रों का दावा है कि 10 अक्टूबर से शुरू हुई ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान कुछ अकाउंट्स ने भारतीय नामों का इस्तेमाल करते हुए वीडियो और खबरें साझा कीं। इससे पोस्ट को भारत के भीतर से किया गया बताने की कोशिश होने का संदेह जताया गया है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या विरोध प्रदर्शनों के दौरान मौतों से संबंधित दावे और अन्य वायरल सामग्री तथ्यहीन थीं। फिलहाल पाकिस्तान से जुड़े कथित नेटवर्क की भूमिका जांच का विषय है। किसी विदेशी एजेंसी या व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
भ्रामक पोस्ट हटाने के लिए कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों से संबंधित ऐसी सोशल मीडिया सामग्री पर कार्रवाई की जा रही है, जिसे अफवाह फैलाने या माहौल बिगाड़ने वाला माना गया है।
कुछ रिपोर्टों में करीब 500 सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस का कहना है कि वायरल सामग्री की निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पोस्ट हटाने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
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जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, पोस्ट के स्रोत और घटनाओं से संबंधित दावों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का जोर ऐसी सामग्री की पहचान करने पर है, जो वास्तविक घटनाओं को गलत संदर्भ में पेश कर सकती है या लोगों के बीच अनावश्यक तनाव पैदा कर सकती है।
दिल्ली में 273 CAPF कंपनियों की तैनाती बढ़ाने की मांग
सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट के मामलों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कदम उठाए हैं। पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से राजधानी में 273 CAPF कंपनियों की तैनाती 20 अक्टूबर तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने संभावित प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े संगठनों की ओर से फिर प्रदर्शन किए जाने की संभावना को भी इस अनुरोध की वजह बताया गया है। जंतर-मंतर, चुनाव आयोग के कार्यालय और अन्य संवेदनशील स्थानों पर प्रदर्शन की आशंका जताई गई है।
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पुलिस के अनुसार, दिल्ली में कुल 301 CAPF कंपनियों की तैनाती को मंजूरी मिली थी। इनमें से कुछ अतिरिक्त कंपनियों के रिपोर्ट नहीं करने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में सुरक्षा बलों की तैनाती की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
लोगों से आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील
दिल्ली पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों और वीडियो को बिना पुष्टि के साझा नहीं करने की सलाह दी है। खासकर हिंसा, मौतों, पुलिस कार्रवाई या किसी समुदाय से जुड़े संवेदनशील दावों की पुष्टि किए बिना उन्हें आगे भेजने से बचने को कहा गया है।
किसी खबर की सत्यता जानने के लिए आधिकारिक बयान, विश्वसनीय समाचार स्रोत और संबंधित अधिकारियों की जानकारी देखना जरूरी है। भ्रामक सामग्री मिलने पर उसे आगे फैलाने के बजाय संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट किया जा सकता है।
जांच के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर
दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखना और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही कथित भ्रामक सामग्री की जांच करना।
फिलहाल चार FIR के जरिए सोशल मीडिया पोस्ट और अकाउंट्स की पड़ताल की जा रही है। वहीं, CAPF की तैनाती बढ़ाने का अनुरोध संभावित प्रदर्शनों को ध्यान में रखकर किया गया है। अब जांच के नतीजों और गृह मंत्रालय के फैसले से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
