UPI पेमेंट पर राहत, दिवाली तक नहीं लगेगा मर्चेंट चार्ज, 15 अक्टूबर से लागू होने वाला फैसला टला

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UPI पेमेंट चार्ज टला, दिवाली तक दुकानदारों को राहत, नई तारीख का इंतजार

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। दिवाली के त्योहार से पहले UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े प्रस्तावित बदलाव को फिलहाल टाल दिया गया है। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन अब इसे दिवाली तक आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है। नई व्यवस्था लागू करने की सटीक तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

इस फैसले से दिवाली की खरीदारी के दौरान डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों और दुकानदारों को प्रस्तावित बदलावों से फिलहाल राहत मिलेगी। हालांकि, त्योहार समाप्त होने के बाद कारोबारियों के लिए यह मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर उन दुकानदारों को नए नियमों पर नजर रखनी होगी, जिनके लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज का असर पड़ सकता है।

त्योहारी सीजन में खरीदारी बढ़ने के बीच UPI चार्ज को टालने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि देश में डिजिटल भुगतान अब छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक के लिए लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुका है।

UPI मर्चेंट चार्ज पर फैसला क्यों टला?

UPI से भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर व्यापारी संगठनों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों ने चिंता जताई थी। इन संगठनों का कहना था कि त्योहारों के दौरान बाजार में खरीदारी और डिजिटल लेनदेन दोनों बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में भुगतान से जुड़े नए शुल्क लागू होने पर कारोबारियों के खर्च और ग्राहकों के भुगतान अनुभव पर असर पड़ सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में UPI स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में प्रस्तावित बदलावों को तत्काल लागू करने के बजाय आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। पहले 15 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने की तैयारी थी। अब इसे दिवाली के बाद लागू करने की बात कही गई है।

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हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि फैसला टलने का अर्थ यह नहीं है कि प्रस्तावित चार्ज हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। नई तारीख और नियमों की अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन कारोबारियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा और व्यवस्था किस तरह लागू की जाएगी।

UPI Payment: दिवाली की खरीदारी पर क्या होगा असर?

दिवाली के दौरान लोग कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाइयां, घरेलू सामान और उपहार खरीदने के लिए बड़ी संख्या में बाजारों का रुख करते हैं। इस दौरान नकद भुगतान के साथ-साथ UPI का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है। छोटी दुकानों, किराना स्टोर, रेस्तरां और स्थानीय कारोबारियों के यहां QR कोड स्कैन करके भुगतान करना आम हो चुका है।

ऐसे में मर्चेंट चार्ज से जुड़े बदलाव को टालने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान प्रस्तावित नई व्यवस्था के तत्काल प्रभाव से राहत मिलेगी। दुकानदारों को नई व्यवस्था लागू होने से पहले अपने भुगतान संबंधी खर्च और नियमों को समझने का अतिरिक्त समय मिल सकता है।

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ग्राहकों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिजिटल भुगतान पर किसी नए शुल्क की चर्चा अक्सर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या उन्हें भी UPI से पैसे भेजने या दुकानों पर भुगतान करने के लिए अतिरिक्त रकम देनी होगी।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि सभी UPI लेनदेन पर चार्ज लगाया जाना था या अब सभी तरह के भुगतान पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहने की गारंटी दी गई है। प्रस्तावित बदलाव चुनिंदा दुकानदारों और कारोबारियों के भुगतान से संबंधित बताए गए हैं। इसका वास्तविक दायरा अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।

UPI MDR क्या है और कारोबारियों के लिए क्यों अहम?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो कुछ भुगतान व्यवस्थाओं में कारोबारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जाता है। यह शुल्क भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी और संबंधित भुगतान व्यवस्था के बीच तय शर्तों के अनुसार लागू हो सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई दुकानदार डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार करता है, तो कुछ भुगतान प्रणालियों में उस लेनदेन से जुड़ा शुल्क उसके कारोबार की लागत का हिस्सा बन सकता है। ऐसे में अधिक डिजिटल भुगतान करने वाले कारोबारियों के लिए शुल्क की दर और उसके लागू होने की शर्तें महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

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हालांकि, सभी डिजिटल भुगतान प्रणालियों के नियम एक जैसे नहीं होते। भारत में सामान्य बैंक खाते से बैंक खाते में होने वाले पात्र UPI लेनदेन पर शून्य MDR की व्यवस्था रही है। इसलिए प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज की चर्चा को सभी UPI भुगतानों पर लागू होने वाले सार्वभौमिक शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यही वजह है कि कारोबारियों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि नया नियम किन श्रेणियों के भुगतान, कारोबारियों या भुगतान माध्यमों पर लागू किया जाएगा। जब तक आधिकारिक दिशा-निर्देश सामने नहीं आते, तब तक सभी दुकानदारों पर समान शुल्क लागू होने की बात कहना उचित नहीं होगा।

UPI चार्ज से छोटे दुकानदारों को क्यों है चिंता?

छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान ने लेनदेन को आसान बनाया है। ग्राहक के पास नकदी नहीं होने पर भी खरीदारी पूरी हो जाती है। दुकानदारों को खुले पैसे रखने की परेशानी कम होती है और भुगतान सीधे बैंक खाते में प्राप्त किया जा सकता है।

लेकिन छोटे कारोबार में मुनाफे का अंतर कई बार सीमित होता है। यदि किसी भुगतान माध्यम पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो बड़ी संख्या में लेनदेन करने वाले दुकानदारों की कुल लागत बढ़ सकती है। यही कारण है कि व्यापारी संगठन किसी भी नए चार्ज को लागू करने से पहले उसकी शर्तों और संभावित प्रभाव को स्पष्ट करने की मांग करते हैं।

दूसरी ओर, भुगतान सेवा कंपनियों के लिए भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को चलाने, तकनीकी ढांचे को बनाए रखने और सेवाएं उपलब्ध कराने की लागत एक महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में शुल्क से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर कारोबारियों, भुगतान कंपनियों और नियामकीय व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी होता है।

दिवाली तक फैसले को टालने से इन पक्षों को प्रस्तावित व्यवस्था पर विचार करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। लेकिन कारोबारियों की वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतिम नियम क्या होते हैं और उन्हें कब से लागू किया जाता है।

 UPI Payment Charge: क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त पैसा?

इस पूरे मामले में ग्राहकों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुकान पर UPI से भुगतान करने के लिए अब अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा?

फिलहाल, केवल मर्चेंट चार्ज से जुड़े प्रस्ताव को टालने की खबर के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ग्राहकों पर कोई नया शुल्क लागू हो गया है। मर्चेंट से संबंधित शुल्क और ग्राहक द्वारा किए जाने वाले भुगतान पर लगने वाले शुल्क अलग-अलग विषय हैं।

सामान्य UPI भुगतान की मौजूदा व्यवस्था और किसी विशेष भुगतान श्रेणी पर लागू होने वाले नियमों के बीच अंतर समझना जरूरी है। यदि भविष्य में किसी विशेष श्रेणी के लेनदेन के लिए नई व्यवस्था लागू होती है, तो उसका असर संबंधित नियमों और भुगतान सेवा की शर्तों के अनुसार तय होगा।

ग्राहकों को किसी भी संभावित बदलाव के लिए आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए। दुकानदार या भुगतान ऐप की ओर से किसी शुल्क की जानकारी मिलने पर उसकी शर्तों को समझना भी जरूरी है।

दिवाली के बाद UPI के नए नियमों पर रहेगी नजर

दिवाली तक मर्चेंट चार्ज से जुड़े फैसले को टालने से त्योहार के दौरान कारोबारियों को तत्काल बदलावों से राहत मिली है। लेकिन इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। नई तारीख, लागू होने वाली शर्तों और प्रभावित कारोबारियों की श्रेणियों को लेकर आधिकारिक घोषणा महत्वपूर्ण होगी।

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रस्तावित व्यवस्था किस रूप में सामने आती है और क्या इसमें कारोबारियों की मांगों के अनुसार कोई बदलाव किया जाता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत पर इसका कितना असर पड़ता है।

दिवाली की खरीदारी के दौरान UPI भुगतान को लेकर प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज के नए नियम तत्काल लागू नहीं किए जा रहे हैं। हालांकि, इसे स्थायी रूप से रद्द किया गया है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। कारोबारियों और ग्राहकों को अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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