SIR के बीच चुनाव आयोग में हलचल, 20 महीनों में 20 CEO के तबादले, चर्चा तेज

SIR

SIR के बीच चुनाव आयोग में 20 महीनों में करीब 20 CEO बदले, चर्चा तेज

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश में राजनीतिक बहस जारी है। इसी बीच भारतीय निर्वाचन आयोग के प्रशासनिक ढांचे में अधिकारियों के लगातार तबादलों ने ध्यान खींचा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 18 से 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) का तबादला हुआ। इसी अवधि में चुनाव आयोग के मुख्यालय में उप निर्वाचन आयुक्तों के स्तर पर भी बदलाव हुए हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल के शुरुआती करीब 20 महीनों में हुए इन बदलावों की तुलना आयोग के पिछले कार्यकालों से की जा रही है। हालांकि, तबादलों की संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि सभी बदलाव SIR के कारण हुए। इसके पीछे प्रशासनिक जरूरतों और अन्य परिस्थितियों की भूमिका भी हो सकती है।

SIR के दौरान चुनाव आयोग में क्यों बढ़ी हलचल?

विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक जांच और उसे अद्यतन करना है। इस प्रक्रिया में निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्हें मतदाता सूची से जुड़े काम, दस्तावेजों की जांच, स्थानीय स्तर पर समन्वय और निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी निभानी होती है।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: नवादा की धरती पर प्रशांत फिर गरजे, अनंत सिंह के बयान पर साधी चुप्पी

अक्टूबर 2025 में चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक कर SIR की तैयारियों की समीक्षा की थी। आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को तैयारी पूरी करने तथा मौजूदा मतदाताओं का पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण सूची से मिलान करने से जुड़े निर्देश दिए थे। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर होने वाले बदलावों को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।

20 महीनों में 20 CEO के तबादले, पुराने आंकड़ों से तुलना

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के शुरुआती 20 महीनों में करीब 18 से 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादले हुए। इससे पहले मई 2022 से फरवरी 2025 के बीच पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के करीब 33 महीने के कार्यकाल में लगभग 23 CEO बदले गए थे।

वहीं, सुनील अरोड़ा और सुशील चंद्रा के कार्यकाल को मिलाकर लगभग 41 महीनों की अवधि में करीब 29 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादले हुए थे। इन अवधियों में लोकसभा चुनाव भी शामिल थे, जिनके दौरान चुनावी जिम्मेदारियों और प्रशासनिक जरूरतों के चलते अधिकारियों के तबादले होते रहे हैं।

खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े

इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2025-26 में अधिकारियों के बदलाव का सिलसिला अपेक्षाकृत तेज रहा। लेकिन अलग-अलग कार्यकालों की अवधि, चुनावी कार्यक्रम और प्रशासनिक परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना केवल संख्या के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

तीन साल से पहले भी बदले गए कई अधिकारी

मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के पद पर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए आमतौर पर तीन साल तक तैनाती की परंपरा का उल्लेख किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया तबादलों में कम से कम सात अधिकारी ऐसे थे, जिन्होंने इस पद पर दो साल से कम समय बिताया।

वर्ष 2025 में आठ से नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में CEO बदले गए। इसके बाद 2026 में अक्टूबर तक कम से कम 10 और तबादलों की जानकारी सामने आई। कम अवधि में अधिकारियों के बदले जाने से यह सवाल भी चर्चा में है कि निर्वाचन संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों में निरंतरता किस तरह बनाए रखी जाती है।

हालांकि, किसी अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने से पहले तबादला होना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसके कारणों का आकलन संबंधित आदेशों और प्रशासनिक परिस्थितियों के आधार पर ही किया जा सकता है।

बिहार से शुरू हुआ SIR के दौर का तबादला सिलसिला

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के बदलाव की शुरुआत बिहार से हुई। राज्य में अप्रैल 2025 में विनोद सिंह गुंजियाल ने एचआर श्रीनिवास की जगह मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद संभाला। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी गुंजियाल की नियुक्ति और पदभार ग्रहण करने की तारीख दर्ज है।

इसके बाद मई 2025 में नगालैंड और छत्तीसगढ़, जून में जम्मू-कश्मीर और हरियाणा तथा जुलाई में मध्य प्रदेश और कर्नाटक में अधिकारियों के बदलाव हुए। अगस्त 2025 में मणिपुर और लद्दाख में भी नए अधिकारियों ने जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष के अंतिम महीनों में केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में CEO के तबादले का आदेश जारी हुआ। इन बदलावों का सिलसिला 2026 में भी जारी रहा।

लक्षद्वीप में एक साल के भीतर तीन CEO

लक्षद्वीप में नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच तीन अलग-अलग अधिकारियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। रिपोर्ट के अनुसार, गौरव सिंह राजावत का नवंबर 2025 में तबादला हुआ। इसके बाद जनवरी 2026 में अवनीश कुमार ने पदभार ग्रहण किया और जुलाई तक इस पद पर रहे। बाद में एएस शिवकुमार को नया CEO नियुक्त किया गया।

एक ही केंद्र शासित प्रदेश में अपेक्षाकृत कम समय के भीतर तीन अधिकारियों का बदलना इस पूरे घटनाक्रम का उल्लेखनीय उदाहरण माना जा रहा है। फिर भी, इसके पीछे के कारणों की पुष्टि के लिए संबंधित नियुक्ति और तबादला आदेशों को देखना जरूरी है।

दिल्ली समेत कई राज्यों में 2026 के दौरान बदलाव

2026 में भी CEO के तबादलों की सूची बढ़ती रही। जनवरी में पंजाब में नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया। फरवरी में दिल्ली के CEO आर. एलिस वाज का तबादला हुआ और इसी महीने गुजरात को भी नया अधिकारी मिला। मार्च में सिक्किम तथा अप्रैल में चंडीगढ़ में बदलाव हुए।

इसे भी पढ़ें : परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी? BJP की DMK से बातचीत, संपर्क को लेकर बढ़ी हलचल

इसके बाद पश्चिम बंगाल और केरल में भी नियुक्तियों को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मनोज अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद नीलम मणि ने CEO की जिम्मेदारी संभाली। केरल में अगस्त 2026 में डी. सजित बाबू ने रतन यू. केलकर की जगह पदभार ग्रहण किया।

उप निर्वाचन आयुक्तों के स्तर पर भी फेरबदल

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के CEO के अलावा निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में उप निर्वाचन आयुक्तों के स्तर पर भी बदलाव हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में भानु प्रकाश येतुरु और सितंबर 2025 में पवन कुमार शर्मा की नियुक्ति हुई।

अगस्त 2026 में उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार को उनके मूल कैडर में वापस भेजा गया। इसके बाद अक्टूबर में प्रकाश राजपुरोहित को इस पद पर नियुक्त किया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संजय कुमार मतदाता सूची और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे तथा SIR की शुरुआत से जुड़े काम में उनकी भूमिका थी।

SIR और चुनाव आयोग के कामकाज पर आगे नजर

मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार तबादलों ने चुनाव आयोग के प्रशासनिक कामकाज को चर्चा में ला दिया है। एक ओर SIR जैसी व्यापक प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार नियुक्तियां और तबादले भी होते रहते हैं।

फिलहाल उपलब्ध आंकड़े तबादलों की संख्या और उनकी समयावधि का संकेत देते हैं, लेकिन सभी बदलावों को SIR से जोड़ने के लिए पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं हैं। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग प्रशासनिक निरंतरता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और समयबद्ध चुनावी तैयारियों के बीच किस तरह संतुलन बनाए रखता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

You may have missed