परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी? BJP की DMK से बातचीत, संपर्क को लेकर बढ़ी हलचल
BJP-DMK बातचीत के बीच परिसीमन पर विशेष सत्र की चर्चा तेज, बहुमत पर नजर
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। संसद के मॉनसून सत्र को समाप्त हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं किया गया है। इस बीच महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, BJP इन विधेयकों को पारित कराने के लिए विपक्षी दलों और छोटे राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। इस सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके के बीच संपर्क की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, डीएमके की ओर से विधेयकों को समर्थन देने के बारे में अंतिम फैसला सामने आना बाकी है।
BJP को परिसीमन विधेयक के लिए चाहिए समर्थन
परिसीमन विधेयक को लेकर BJP की चुनौती केवल संसद का विशेष सत्र बुलाने तक सीमित नहीं है। संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसी वजह से BJP के लिए विभिन्न दलों का समर्थन जुटाना अहम माना जा रहा है।
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इस साल 17 अप्रैल को परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। इसके बाद सरकार को विधायी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ा। BJP की ओर अब नए सिरे से विधेयक लाने और महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा की खबरों के बीच राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
DMK की बैठक पर नजर, स्टालिन तय कर सकते हैं रणनीति
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीएमके संसदीय दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। बैठक में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है।

परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर डीएमके का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि पार्टी केंद्र सरकार के प्रस्तावों का समर्थन करती है, तो लोकसभा में सरकार की संख्या बढ़ाने की कोशिश को मदद मिल सकती है। हालांकि, बैठक के एजेंडे में इन मुद्दों पर चर्चा की संभावना और विधेयकों के समर्थन का फैसला अलग-अलग बातें हैं। डीएमके की औपचारिक घोषणा के बिना यह मानना सही नहीं होगा कि पार्टी ने सरकार को समर्थन देने का निर्णय ले लिया है।
BJP छोटे दलों से भी साध रही संपर्क
विशेष सत्र की संभावनाओं के बीच BJP की ओर से छोटे दलों और विपक्षी खेमे के सांसदों से संपर्क किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि BJP परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों के लिए पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करने की कोशिश में है।
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राजनीतिक समीकरणों में किसी दल के सांसदों की संख्या और विधेयक पर उनके वास्तविक मतदान के बीच अंतर हो सकता है। किसी सांसद के पार्टी बदलने, अलग समूह बनाने या समर्थन देने की खबर से अपने आप यह तय नहीं हो जाता कि विधेयक सदन में पारित हो जाएगा। इसके लिए मतदान के समय मौजूद सदस्यों और उनके रुख को देखना होगा।
दो-तिहाई बहुमत का गणित क्यों है अहम?
संविधान संशोधन विधेयक के लिए लोकसभा में केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ऐसे विधेयक को सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।
इसलिए 540 सदस्यों की संख्या के आधार पर सीधे यह निष्कर्ष निकालना कि हर स्थिति में 360 वोट मिलना ही पर्याप्त या अनिवार्य है, अधूरा होगा। वास्तविक जरूरत सदन की कुल सदस्य संख्या और मतदान के समय उपस्थित सदस्यों की स्थिति के अनुसार तय होती है। यही वजह है कि BJP के लिए समर्थन का स्पष्ट आंकड़ा जुटाना महत्वपूर्ण है।
संसद का सत्रावसान नहीं होने से बढ़ी चर्चा
लोकसभा और राज्यसभा का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था। लेकिन दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। इसी स्थिति के बीच विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना पर अटकलें लगाई जा रही हैं।
मीडिया रिपोर्टों में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में संसद की विशेष बैठक बुलाए जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, BJP की ओर से तारीखों की औपचारिक घोषणा होने तक इसे संभावित कार्यक्रम ही माना जाना चाहिए। विशेष सत्र बुलाने और उसमें किसी विधेयक को पेश करने का अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि व्यापक संवैधानिक बदलाव से जुड़े विधेयक को संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को प्रस्ताव समझने और उस पर विचार करने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
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खरगे ने अप्रैल में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी बहुमत नहीं मिलने का भी उल्लेख किया। उन्होंने पहले लिखे गए पत्रों का हवाला देते हुए सरकार से नए प्रस्तावों पर चर्चा कराने की मांग दोहराई है। कांग्रेस ने मॉनसून सत्र के औपचारिक सत्रावसान में देरी पर भी सवाल उठाए हैं।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर आगे क्या?
महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों मुद्दे संसद की आगामी कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। परिसीमन के तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े बदलाव किए जा सकते हैं, जबकि महिला आरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का सवाल भी इससे जुड़ी राजनीतिक बहस में शामिल है।
फिलहाल विशेष सत्र की संभावनाओं, डीएमके से संपर्क और अन्य दलों के समर्थन को लेकर चर्चा जारी है। लेकिन विधेयक का अंतिम प्रारूप, सत्र की तारीख और मतदान के दौरान दलों का वास्तविक रुख सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की घोषणा और डीएमके समेत विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
