पटना में Domino’s में छापेमारी, वेज-नॉनवेज सामग्री साथ मिली, नवरात्रि में आस्था से हो रहा खिलवाड़
पटना के Domino’s आउटलेट में जांच, 50 खराब पिज्जा स्क्रीन नष्ट किए गए
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। पटना में खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई जांच के दौरान कदमकुआं स्थित Domino’s आउटलेट में कई कमियां सामने आई हैं। एम्बिशन ओझा प्लाजा स्थित प्रतिष्ठान के निरीक्षण में साफ-सफाई की व्यवस्था में खामियां मिलीं। ड्रेनेज सिस्टम, कटिंग बोर्ड और शेल्फ की सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई। इसके अलावा डीप फ्रीजर के तापमान की निगरानी का रिकॉर्ड और स्टोर में रखे कच्चे माल से संबंधित लॉग बुक भी उपलब्ध नहीं थी।
निरीक्षण के दौरान करीब 50 खराब Domino’s पिज्जा स्क्रीन भी मिले, जिन्हें मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त मानते हुए मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। अधिकारियों ने प्रतिष्ठान को वेज और नॉनवेज सामग्री अलग-अलग रखने का निर्देश दिया। पानी जमा होने, ग्राहकों के इस्तेमाल वाली सॉस की बोतलों की समुचित सफाई नहीं होने और कीट नियंत्रण रिपोर्ट में निर्धारित तारीख दर्ज नहीं होने जैसी कमियां भी सामने आईं।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रतिष्ठान को कमियां दूर करने के लिए 14 दिनों का सुधार नोटिस जारी किया गया है। निर्देशों का पालन नहीं होने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।
Domino’s पटना में जांच के दौरान मिलीं कई कमियां
कदमकुआं के एम्बिशन ओझा प्लाजा स्थित Domino’s आउटलेट का निरीक्षण खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जांच के उद्देश्य से किया गया। जांच में प्रतिष्ठान की साफ-सफाई और खाद्य सामग्री के रखरखाव से जुड़ी कई खामियां सामने आईं।
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ड्रेनेज सिस्टम की सफाई ठीक नहीं पाई गई। इसके अलावा कटिंग बोर्ड और शेल्फ की स्वच्छता को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगहों पर साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी होता है, क्योंकि लापरवाही से खाद्य सामग्री दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है।

निरीक्षण के दौरान पानी जमा होने की समस्या भी सामने आई। खाद्य प्रतिष्ठानों में पानी का जमाव स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और कीटों के पनपने की आशंका बढ़ा सकता है। ऐसे में नियमित सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
Domino’s में करीब 50 खराब पिज्जा स्क्रीन नष्ट
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को करीब 50 खराब पिज्जा स्क्रीन मिले। इन्हें मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त मानते हुए मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 38(4) के तहत की गई।
खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान अनुपयुक्त खाद्य सामग्री के संबंध में कार्रवाई करने का अधिकार है। इसका उद्देश्य ऐसी सामग्री को लोगों तक पहुंचने से रोकना है, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन खराब पिज्जा स्क्रीन के खराब होने का सटीक कारण नहीं बताया गया है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि वे किसी खास वजह से खराब हुए थे। निरीक्षण में सामने आई इस कमी के बाद प्रतिष्ठान को खाद्य सामग्री के रखरखाव और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
वेज और नॉनवेज सामग्री अलग रखने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान को शाकाहारी और मांसाहारी सामग्री अलग-अलग रखने का निर्देश भी दिया गया। खाद्य पदार्थों की तैयारी और भंडारण के दौरान दोनों तरह की सामग्री को अलग रखना महत्वपूर्ण है, ताकि उनके बीच अनचाहा संपर्क न हो।
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विशेष रूप से शाकाहारी भोजन पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए सामग्री की पहचान और उसे संभालने की प्रक्रिया अहम होती है। यदि वेज और नॉनवेज सामग्री के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, सतहों या भंडारण व्यवस्था को ठीक से अलग नहीं रखा जाता, तो क्रॉस-कंटैमिनेशन यानी एक सामग्री से दूसरी सामग्री के दूषित होने का जोखिम पैदा हो सकता है।
यह मामला नवरात्रि के दौरान सामने आने के कारण शाकाहारी भोजन को लेकर ग्राहकों की अपेक्षाओं के संदर्भ में भी चर्चा में आ सकता है। हालांकि, निरीक्षण में वेज और नॉनवेज सामग्री अलग रखने का निर्देश दिए जाने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि किसी ग्राहक को गलत भोजन परोसा गया था या उसकी धार्मिक आस्था को जानबूझकर ठेस पहुंचाई गई। उपलब्ध जानकारी में ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं की गई है।
सॉस की बोतलों और कीट नियंत्रण रिकॉर्ड पर भी सवाल
जांच के दौरान ग्राहकों के इस्तेमाल के लिए रखी गई सॉस की बोतलों की समुचित सफाई नहीं होने की बात सामने आई। इसके साथ ही कीट नियंत्रण रिपोर्ट में निर्धारित तारीख का उल्लेख नहीं था।
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रेस्तरां में ग्राहकों के बीच इस्तेमाल होने वाली सॉस की बोतलों को साफ रखना जरूरी है। इनकी नियमित सफाई नहीं होने पर गंदगी जमा हो सकती है और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को ऐसी वस्तुओं की सफाई और रखरखाव पर लगातार ध्यान देना चाहिए।
वहीं, कीट नियंत्रण से संबंधित रिकॉर्ड भी खाद्य प्रतिष्ठान की स्वच्छता व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है। रिपोर्ट में तारीख दर्ज नहीं होने से यह पता लगाने में कठिनाई हो सकती है कि संबंधित प्रक्रिया कब पूरी की गई थी। रिकॉर्ड को सही तरीके से बनाए रखना निरीक्षण और अनुपालन की निगरानी के लिए जरूरी है।
डीप फ्रीजर का तापमान रिकॉर्ड नहीं मिला
निरीक्षण में डीप फ्रीजर के तापमान की निगरानी से संबंधित लॉग बुक भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा स्टोर में रखे कच्चे माल का रिकॉर्ड नहीं मिला। खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए उनके भंडारण की उचित व्यवस्था और तापमान की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
डीप फ्रीजर में तापमान निर्धारित स्तर पर बना रहना चाहिए, ताकि वहां रखी जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित न हो। तापमान का रिकॉर्ड होने से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि भंडारण की स्थिति लगातार निर्धारित मानकों के अनुरूप रही या नहीं।

इसी तरह कच्चे माल का रिकॉर्ड रखने से उसकी उपलब्धता, इस्तेमाल और भंडारण से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रहती है। निरीक्षण में रिकॉर्ड नहीं मिलने पर प्रतिष्ठान को अपनी निगरानी व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।
14 दिनों का नोटिस, लाइसेंस पर भी कार्रवाई संभव
निरीक्षण में मिली कमियों को दूर करने के लिए संबंधित Domino’s आउटलेट को 14 दिनों का सुधार नोटिस जारी किया गया है। प्रतिष्ठान को इस अवधि में बताई गई समस्याओं को ठीक करने और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
यदि निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो लाइसेंस निलंबित या रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतिष्ठान को सुधार का अवसर दिया गया है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि कमियों को दूर करने के निर्देशों का कितना पालन किया जाता है।
यह मामला खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, भंडारण और रिकॉर्ड प्रबंधन के महत्व को सामने लाता है। ग्राहकों के लिए भी भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है। वहीं, रेस्तरां संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करें और ग्राहकों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराएं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
