Horlicks और Nescafé पर FSSAI का शिकंजा, कंपनियों को भेजा नोटिस, जानें पूरा मामला
FSSAI ने Horlicks और Nescafé के दावों पर उठाए सवाल, कंपनियों को नोटिस
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नई दिल्ली)। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर किए जाने वाले पोषण संबंधी दावों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। हॉर्लिक्स से लेकर नेस्कैफे तक के कई उत्पाद नियामक की जांच के दायरे में आ गए हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और नेस्ले इंडिया समेत संबंधित कंपनियों से उत्पादों की पैकेजिंग, पोषण संबंधी दावों और लेबलिंग को लेकर जवाब मांगा गया है।
इस कार्रवाई में ‘अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाने’, हड्डियों को मजबूत बनाने और बच्चे के स्वस्थ जन्म वजन जैसे दावों पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, कुछ कॉफी आधारित पेय पदार्थों के पैकेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दी गई जानकारी में अंतर को लेकर भी नियामक ने स्पष्टीकरण मांगा है।
यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर लिखे आकर्षक दावे उपभोक्ताओं के खरीदारी संबंधी फैसलों को प्रभावित करते हैं। हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि कंपनियों को दोषी ठहरा दिया गया है। अब उनके जवाब और नियामक की जांच के नतीजों पर नजर रहेगी।
FSSAI की जांच में Nescafé के तीन उत्पाद
नेस्ले इंडिया के नेस्कैफे इंटेंस कैफे कैपुचीनो, नेस्कैफे चोको मोचा और नेस्कैफे चिल्ड लैटे को लेकर लेबलिंग संबंधी सवाल उठाए गए हैं। FSSAI के अनुसार, इन उत्पादों के पैकेट के सामने वाले हिस्से पर इन्हें ‘स्वादयुक्त दूध’ बताया गया था, जबकि पीछे की ओर ‘दुग्ध आधारित पेय’ लिखा था।
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इसके अलावा, ऑनलाइन बिक्री मंचों पर भी इन उत्पादों को ‘कॉफी के स्वाद वाला दूध’ बताकर सूचीबद्ध किए जाने की बात सामने आई। अलग-अलग जगहों पर उत्पाद की श्रेणी बताने के तरीके में अंतर को लेकर नियामक ने स्पष्टीकरण मांगा है।
इस मामले में नेस्ले इंडिया के साथ उत्पाद बनाने वाली कंपनियों श्राइबर डायनेमिक्स डेयरीज और लोटस डेयरी प्रोडक्ट्स से भी जवाब तलब किया गया है। अब कंपनियों को बताना होगा कि पैकेट और ऑनलाइन मंचों पर अलग-अलग विवरण क्यों दिए गए और उत्पादों की श्रेणी का निर्धारण किस आधार पर किया गया।
FSSAI के निशाने पर किडनी मरीजों का पोषण पाउडर
नेस्ले के रिसोर्स रीनल वनीला फ्लेवर पाउडर पर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। यह उत्पाद लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे कुछ मरीजों की विशेष पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
FSSAI के अनुसार, इस तरह के विशेष श्रेणी वाले उत्पादों के लिए निर्धारित नियामकीय मंजूरी जरूरी हो सकती है। संबंधित उत्पाद को आवश्यक मंजूरी और पैकेट पर शाकाहारी या मांसाहारी होने का चिह्न मौजूद होने के संबंध में सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
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यह मामला सामान्य खाद्य पदार्थों से अलग है, क्योंकि विशेष चिकित्सकीय या पोषण संबंधी जरूरतों वाले उत्पादों के लिए उनकी श्रेणी के अनुसार नियम लागू होते हैं। ऐसे उत्पादों की जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि उपभोक्ता और मरीज उनकी प्रकृति को समझ सकें।
Horlicks के ‘अतिरिक्त चीनी नहीं’ दावे पर सवाल
हिंदुस्तान यूनिलीवर के हॉर्लिक्स वुमेन्स प्लस चॉकलेट पोषण पेय के लेबल पर हड्डियों को मजबूत बनाने, छह महीने में हड्डियों की सेहत में सुधार और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने जैसे दावे किए गए हैं। FSSAI ने इन दावों के साथ ‘स्वस्थ मांसपेशियां’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है।
नियामक का कहना है कि खाद्य उत्पादों पर ‘स्वस्थ’ जैसे शब्दों का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप होना चाहिए। पोषण संबंधी दावों के जरिए उपभोक्ताओं को उत्पाद के संभावित लाभों की जानकारी दी जाती है, इसलिए उनकी भाषा और आधार दोनों का स्पष्ट होना जरूरी है।
सबसे अहम सवाल ‘अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाने’ के दावे पर है। FSSAI के अनुसार, उत्पाद में माल्टोडेक्सट्रिन मौजूद है, जिसके कारण इस दावे की स्वीकार्यता को लेकर सवाल उठे हैं। इसके अलावा कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन के-2 की 100 प्रतिशत अनुशंसित दैनिक मात्रा उपलब्ध कराने से संबंधित दावों पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अब कंपनी को इन दावों के समर्थन में अपना पक्ष रखना होगा। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि उत्पाद की संरचना, पोषण संबंधी जानकारी और पैकेट पर किए गए दावे लागू नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
FSSAI ने मदर्स हॉर्लिक्स के दावों पर भी मांगा जवाब
हॉर्लिक्स मदर्स प्लस केसर के 400 ग्राम पैक पर लिखे ‘स्वस्थ जन्म वजन’ और विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए ‘बच्चे के स्वस्थ जन्म वजन के लिए’ जैसे दावों को लेकर भी HUL से जवाब मांगा गया है।
FSSAI की आपत्ति है कि इस तरह की भाषा से उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा बन सकती है कि उत्पाद के सेवन से बच्चे का जन्म वजन स्वस्थ रहेगा। ऐसे दावों का इस्तेमाल करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और उपभोक्ताओं को किसी निश्चित परिणाम का भ्रामक संकेत न दें।
गर्भावस्था के दौरान पोषण को लेकर परिवार विशेष रूप से सतर्क रहते हैं। ऐसे में किसी उत्पाद के विज्ञापन में किए गए दावे खरीदारी के फैसले पर असर डाल सकते हैं। इसलिए नियामक की जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी अपने दावों के समर्थन में क्या आधार प्रस्तुत करती है।
खाद्य पदार्थों के लेबल पर क्या देखें उपभोक्ता?
FSSAI की कार्रवाई के बाद पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लिखी जानकारी की विश्वसनीयता एक बार फिर चर्चा में है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे केवल पैकेट के सामने लिखे आकर्षक दावों के आधार पर खरीदारी न करें। उत्पाद की सामग्री, पोषण संबंधी विवरण, एलर्जी से जुड़ी चेतावनी और इस्तेमाल संबंधी निर्देश भी ध्यान से पढ़ें।
‘नो एडेड शुगर’, ‘हड्डियों को मजबूत बनाने’ या ‘स्वस्थ विकास’ जैसे दावों का अर्थ समझना भी जरूरी है। किसी उत्पाद में पोषक तत्व मौजूद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसके सेवन से हर व्यक्ति को कोई निश्चित स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और विशेष स्वास्थ्य जरूरतों वाले मरीजों के लिए उत्पाद चुनते समय डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह उपयोगी हो सकती है।
फिलहाल, FSSAI की ओर से उठाए गए सवालों पर संबंधित कंपनियों के जवाब और आगे की नियामकीय कार्रवाई का इंतजार है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन दावों या लेबलिंग में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
