MLC चुनाव में बड़ा उलटफेर, 30 साल बाद नवल हारे, नीरज की जीत तय, कहीं BJP तो कहीं जनसुराज का कब्जा

MLC

MLC चुनाव में बड़ा उलटफेर, 30 साल बाद नवल किशोर हारे

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार MLC चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। आठ एमएलसी सीटों के लिए हुए चुनाव में चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम सामने आने के बाद कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। पटना शिक्षक सीट पर करीब 30 साल से विधान परिषद में प्रतिनिधित्व कर रहे बीजेपी के नवल किशोर को हार का सामना करना पड़ा। राजद के डॉ. संजीव ने उन्हें 1,057 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया।

दूसरी ओर, तिरहुत शिक्षक सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की, जबकि दरभंगा में जनसुराज और सारण में निर्दलीय MLC प्रत्याशी ने बाजी मारी। स्नातक सीटों पर भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। पटना स्नातक MLC सीट पर जदयू के नीरज कुमार की जीत लगभग तय बताई गई, जबकि तिरहुत स्नातक MLC सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर ब्रजवासी लगातार बढ़त बनाए हुए थे।

इन नतीजों ने शिक्षक और स्नातक MLC क्षेत्रों में राजनीतिक दलों की पकड़, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता और स्थानीय समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

MLC चुनाव में पटना शिक्षक सीट पर बड़ा उलटफेर

पटना शिक्षक MLC का परिणाम इस चुनाव का सबसे चर्चित नतीजा रहा। बीजेपी के नवल किशोर लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। करीब तीन दशक के उनके राजनीतिक सफर के बाद मिली हार को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राजद के डॉ. संजीव ने 1,057 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम से शिक्षक MLC क्षेत्र में राजद को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। चुनाव में नवल किशोर की हार ने यह भी दिखाया कि लंबे समय से पद पर बने रहने के बावजूद उम्मीदवारों को मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: 48 घंटे में Anant Kumar Singh को 3 बड़े झटके, पार्टी से बाहर, पत्नी की कुर्सी गई, अब बंगले पर संकट

डॉ. संजीव की जीत का एक और राजनीतिक पहलू है। उनके भाई राजीव कुमार बेगूसराय स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद हैं। वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. संजीव की जीत के बाद दोनों सगे भाई विधान परिषद में एक साथ नजर आएंगे। यह बिहार की विधान परिषद की राजनीति में एक दिलचस्प घटनाक्रम होगा।

तिरहुत और दरभंगा में MLC चुनाव का परिणाम

तिरहुत शिक्षक MLC क्षेत्र में बीजेपी के नरेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने लगभग 600 वोटों के अंतर से मुकाबला अपने नाम किया। इस सीट पर बीजेपी की जीत पार्टी के लिए राहत लेकर आई है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जहां पटना में उसे हार मिली, वहीं तिरहुत में सफलता ने उसकी स्थिति को कुछ हद तक मजबूत किया।

दरभंगा शिक्षक MLC सीट पर जनसुराज के सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज की। इस MLC सीट पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। जनसुराज के लिए यह परिणाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में संगठन और उम्मीदवार की पहुंच का संकेत मिलता है।

सारण शिक्षक MLC निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के बागी और निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने जीत हासिल की। उन्होंने 1,815 वोटों के अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वी को हराया। इस सीट पर जनसुराज के उम्मीदवार को हार मिली। निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने यह स्पष्ट किया कि विधान परिषद के चुनाव में पार्टी के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम भूमिका निभा सकती है।

चारों शिक्षक सीटों पर मौजूदा MLC को हार

चार शिक्षक निर्वाचन MLC क्षेत्रों के नतीजों में एक समानता सामने आई। पटना, तिरहुत, दरभंगा और सारण की चारों सीटों पर मौजूदा विधान पार्षदों को हार का सामना करना पड़ा। अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों की हार ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।

पटना में बीजेपी के नवल किशोर को राजद के डॉ. संजीव ने हराया। तिरहुत में वामपंथी उम्मीदवार की जगह बीजेपी को जीत मिली। दरभंगा में कांग्रेस को जनसुराज ने शिकस्त दी, जबकि सारण में जनसुराज के उम्मीदवार को निर्दलीय राहुल राज ने पीछे छोड़ दिया।

इन नतीजों से संकेत मिलता है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच इस बार मुकाबला केवल दलों के आधार पर तय नहीं हुआ। स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की सक्रियता और मतदाताओं से संपर्क जैसे कारक भी प्रभावी रहे होंगे। हालांकि, हार के कारणों की स्पष्ट तस्वीर संबंधित उम्मीदवारों और निर्वाचन क्षेत्र के विस्तृत आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएगी।

पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत लगभग तय

पटना स्नातक MLC निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के नीरज कुमार की जीत लगभग तय बताई गई। इस सीट के नतीजे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा के बीच विधायक अनंत सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई।

अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें चुनाव के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। उन्होंने अपनी नाराजगी पार्टी के बजाय नीरज कुमार से होने की बात कही। उनका कहना था कि वे नीरज कुमार को जीत की बधाई नहीं देंगे।

अनंत सिंह ने मतदाताओं के फैसले को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि जिन्हें जनता का वोट मिला, वे जीते और जिन्हें नहीं मिला, वे हार गए। उन्होंने यह भी कहा कि वे पार्टी का सम्मान करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। उनके बयान से जदयू के भीतर व्यक्तिगत नाराजगी और राजनीतिक रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े

अनंत सिंह ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर वह अपनी पार्टी बनाने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने कोई ठोस घोषणा नहीं की।

तिरहुत स्नातक सीट पर वंशीधर ब्रजवासी की बढ़त

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर ब्रजवासी लगातार आगे चल रहे थे। आठवें राउंड की गिनती के बाद उन्हें 18,873 वोट मिले थे। वे 1,892 वोटों के अंतर से बढ़त बनाए हुए थे।

इस चरण में राजद की डॉ. रश्मि गौतम को 11,768 वोट मिले थे, जबकि जदयू के अभिषेक झा को 16,981 वोट प्राप्त हुए थे। जनसुराज के बी. मोहन को 1,927 वोट मिले थे।

इससे पहले सातवें राउंड के बाद भी वंशीधर ब्रजवासी बढ़त बनाए हुए थे। उस समय उन्हें 16,190 वोट मिले थे और वे 1,477 वोटों से आगे थे। जदयू के अभिषेक झा दूसरे स्थान पर थे, जबकि राजद की रश्मि गौतम तीसरे स्थान पर चल रही थीं।

मतगणना के इन आंकड़ों से मुकाबले की दिशा का संकेत मिलता है, लेकिन अंतिम परिणाम की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही की जानी चाहिए।

MLC चुनाव में कांग्रेस का खाता नहीं खुला

आठ एमएलसी सीटों के चुनाव में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के घोषित नतीजों ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी सवाल खड़े किए हैं। चार शिक्षक सीटों में कांग्रेस को सफलता नहीं मिली। दरभंगा में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि पटना और अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुकाबला उसके पक्ष में नहीं गया।

दूसरी ओर, बीजेपी ने तिरहुत शिक्षक सीट जीती, राजद को पटना में सफलता मिली, जनसुराज ने दरभंगा में जीत दर्ज की और सारण में निर्दलीय प्रत्याशी ने बाजी मारी।

इन परिणामों के बीच एक दिलचस्प तथ्य यह भी रहा कि चारों शिक्षक सीटों से जीतने वाले उम्मीदवारों में तीन भूमिहार और एक राजपूत समुदाय से बताए गए। हालांकि, चुनावी नतीजों का आकलन केवल जातीय समीकरणों के आधार पर करना पर्याप्त नहीं होगा। उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, संगठन की ताकत और मतदाताओं के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

बिहार की सियासत के लिए क्या हैं इन नतीजों के मायने?

बिहार विधान परिषद चुनाव के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक मुकाबला काफी कड़ा रहा। पटना में बीजेपी के अनुभवी नेता की हार, तिरहुत में पार्टी की जीत, दरभंगा में जनसुराज का प्रदर्शन और सारण में निर्दलीय उम्मीदवार की सफलता ने चुनाव को बहुकोणीय बना दिया।

इन नतीजों से राजनीतिक दलों को अपने संगठन, उम्मीदवार चयन और स्थानीय मतदाताओं से संवाद की रणनीति पर विचार करने का मौका मिलेगा। खासकर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि और लंबे समय से मतदाताओं के बीच उनकी सक्रियता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। 23 अक्टूबर को हुए चुनाव में कुल 150 प्रत्याशी मैदान में थे। ऐसे में सभी सीटों के अंतिम परिणाम सामने आने के बाद ही चुनाव की व्यापक तस्वीर स्पष्ट होगी।

फिलहाल, चार शिक्षक सीटों के नतीजों ने बिहार की विधान परिषद की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा संदेश यही है कि लंबे समय तक किसी सीट पर बने रहना जीत की गारंटी नहीं है और स्थानीय मतदाताओं का रुख चुनावी समीकरणों को बदल सकता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट