जनगणना 2027 में पूछे जाएंगे 40 सवाल, 11 नए सवाल भी होंगे शामिल, जानें कब आएंगे कर्मचारी

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जनगणना 2027 में 40 सवाल पूछे जाएंगे। 11 नए प्रश्न, जाति की जानकारी, ऑनलाइन स्व-गणना और घर-घर गणना की तारीख समेत जानें पूरी प्रक्रिया।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। देश में अगली जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना इस बार कई मायनों में पहले से अलग और व्यापक होगी। अब लोगों को केवल अपनी उम्र, परिवार के सदस्यों और घर से जुड़ी सामान्य जानकारी ही नहीं देनी होगी, बल्कि उनकी सामाजिक पहचान, जाति, परिवार की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी। इस बार जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। जबकि वर्ष 2011 में हुई पिछली जनगणना के दौरान सवालों की संख्या 29 थी। यानी इस बार प्रश्नावली में 11 नए सवाल जोड़े गए हैं।

इस बदलाव के साथ जनगणना की प्रक्रिया भी पहले से अधिक विस्तृत होने जा रही है। पहली बार लोगों को स्व-गणना यानी खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी कर्मचारी घर-घर पहुंचकर उपलब्ध कराई गई जानकारी का सत्यापन और जनसंख्या गणना का काम करेंगे। ऐसे में 2027 की जनगणना सिर्फ देश की आबादी का आंकड़ा जुटाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इससे भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की नई तस्वीर भी सामने आने की उम्मीद है।

जनगणना 2027 में कब आएंगे कर्मचारी, जानिए पूरा कार्यक्रम

जनगणना की प्रक्रिया को दो हिस्सों में पूरा किया जाएगा। पहले लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना का अवसर मिलेगा। इसके लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस अवधि में परिवार के सदस्य निर्धारित ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।

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स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद सरकारी गणनाकर्मी घर-घर पहुंचेंगे। वे परिवारों से संबंधित जानकारियां एकत्र करेंगे और दर्ज किए गए विवरणों की जांच करेंगे। देश के अधिकांश हिस्सों में घर-घर जाकर जनगणना का काम 25 जनवरी से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगा।

जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च तक आवश्यक संशोधन और सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना के दौरान कोई परिवार या व्यक्ति छूट न जाए और आंकड़ों में अधिक से अधिक सटीकता बनी रहे।

जनगणना में पूछे जाएंगे 40 सवाल, 11 नए प्रश्न शामिल

इस बार की जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव प्रश्नों की संख्या को लेकर है। वर्ष 2011 में लोगों से कुल 29 सवाल पूछे गए थे, लेकिन 2027 की जनगणना में इनकी संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। नए सवालों को शामिल करने के पीछे मकसद देश की बदलती सामाजिक परिस्थितियों और परिवारों की मौजूदा स्थिति को बेहतर तरीके से समझना है।

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इन सवालों के माध्यम से परिवार के सदस्यों की पहचान, उनके आपसी संबंध और व्यक्तिगत विवरण जुटाए जाएंगे। परिवार में पति या पत्नी का नाम, माता-पिता की जानकारी, घोषित राष्ट्रीयता और स्थायी पते जैसे विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।

इस बार जाति से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रावधान भी महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल है। इसके जरिए देश की सामाजिक संरचना और विभिन्न जातीय समूहों से संबंधित आंकड़े सामने आ सकेंगे। सरकार को इन जानकारियों से भविष्य की योजनाएं तैयार करने और जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जनगणना में मोबाइल, आधार और वोटर आईडी की भी जानकारी

2027 की जनगणना में पहचान से जुड़े विवरणों का दायरा भी पहले की तुलना में व्यापक होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोगों से मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और पासपोर्ट से संबंधित जानकारी भी मांगी जा सकती है। पासपोर्ट से जुड़ा विवरण भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए होगा।

इसके अलावा परिवार के बैंक खातों की संख्या से संबंधित जानकारी भी प्रश्नावली में शामिल की गई है। इसका उद्देश्य परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति से जुड़े आंकड़ों को समझना है।

हालांकि, इन जानकारियों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ सकते हैं। इसलिए जनगणना के दौरान गणनाकर्मियों द्वारा मांगी जाने वाली जानकारी और उसकी आधिकारिक प्रक्रिया को समझना जरूरी होगा। लोगों को किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचना चाहिए और केवल अधिकृत गणनाकर्मियों तथा सरकारी माध्यमों पर ही भरोसा करना चाहिए।

2011 के बाद पहली बार होगी देश की पूरी जनगणना

भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। उस समय देश की कुल आबादी लगभग 1.21 अरब दर्ज की गई थी। इसमें करीब 62.32 करोड़ पुरुष और 58.75 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। उस दौरान देश में लगभग 24.95 करोड़ परिवार दर्ज किए गए थे।

इसके बाद से देश की आबादी में लगातार बदलाव आया है। शहरीकरण बढ़ा है, रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन तेज हुआ है और परिवारों की संरचना भी बदली है। कई बड़े शहरों की आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव आया है।

ऐसे में 2027 की जनगणना से सरकार को करीब डेढ़ दशक से अधिक समय बाद देश की जनसंख्या का व्यापक और आधिकारिक आंकड़ा मिलने का रास्ता साफ होगा। इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में आबादी तेजी से बढ़ी है और कहां जनसंख्या का दबाव कम हुआ है।

इन राज्यों में अलग समय पर होगी जनगणना

जनगणना 2027 का कार्यक्रम सभी राज्यों में एक जैसा नहीं रखा गया है। कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव और अन्य प्रशासनिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था बनाई गई है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में घर-घर जाकर जनगणना का काम 35 दिनों तक चलाने की योजना है। इन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए यहां जनगणना का कार्यक्रम अन्य राज्यों से अलग निर्धारित किया गया है।

केंद्र की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए अलग समय-सारिणी लागू होगी।

बर्फबारी वाले इलाकों में अलग होगी जनगणना की व्यवस्था

देश के कुछ हिस्सों में मौसम की चुनौतियों को देखते हुए जनगणना के लिए गैर-समकालिक व्यवस्था रखी गई है। लद्दाख के साथ हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य कार्यक्रम के अनुसार गणना कराना मुश्किल हो सकता है। इसलिए इन इलाकों में जनगणना का काम अलग समय पर कराया जाएगा।

वहीं, मणिपुर को फिलहाल घोषित कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। वहां की परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना की तारीख बाद में तय की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि देश के प्रत्येक हिस्से में जनगणना का काम बिना किसी बड़ी बाधा के पूरा हो सके।

सरकारी योजनाओं से लेकर विकास की रणनीति तक पड़ेगा असर

जनगणना के आंकड़े किसी भी देश की नीतियां और विकास योजनाएं तैयार करने का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। सरकार को यह तय करने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल, सड़क, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की अधिक जरूरत है।

2027 की जनगणना में जाति, परिवार और व्यक्तिगत पहचान से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटाए जाने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। इन आंकड़ों से सामाजिक संरचना, जनसंख्या का वितरण और परिवारों की बदलती जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, 2027 की जनगणना देश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया साबित होने जा रही है। 40 सवालों, 11 नए प्रश्नों और ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा के साथ इस बार आंकड़े जुटाने का तरीका भी बदला हुआ होगा। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जनवरी 2027 से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया कितनी सफल रहती है और इससे देश की नई जनसंख्या की कैसी तस्वीर सामने आती है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट