1 नवंबर से बदलेंगे LPG बुकिंग का नियम, निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगी परेशानी
1 नवंबर से LPG कीमतों की समीक्षा होगी। जानें ई-केवाईसी, 25-45 दिन की बुकिंग अवधि, DAC कोड और PNG कनेक्शन के जरूरी नियम।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। देशभर के करोड़ों LPG उपभोक्ताओं के लिए 1 नवंबर 2026 से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और बुकिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नजर रखना जरूरी होगा। हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां LPG और LPG गैस सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसके अलावा आधार आधारित ई-केवाईसी, सिलेंडर बुकिंग के बीच तय अंतर, डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड और पीएनजी कनेक्शन से जुड़े नियम भी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इन सभी व्यवस्थाओं की शुरुआत 1 नवंबर से नहीं हो रही है। इनमें कई नियम पहले से लागू हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी नई घोषणा के इंतजार के बजाय अपनी LPG गैस कनेक्शन की स्थिति और जरूरी प्रक्रियाओं की जांच कर लेनी चाहिए। खासकर जिन लोगों ने अब तक आधार बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराया है या डिलीवरी के समय मिलने वाले ओटीपी को नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें परेशानी हो सकती है।
LPG सब्सिडी के लिए आधार ई-केवाईसी जरूरी
घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी ई-केवाईसी महत्वपूर्ण हो गया है। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी के साथ निर्धारित खुदरा कीमत पर घरेलू LPG रिफिल बुक करने के लिए बायोमेट्रिक आधार सत्यापन जरूरी किया गया है।
जिन उपभोक्ताओं ने पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली है, उन्हें दोबारा सत्यापन कराने की जरूरत नहीं है। जिनका सत्यापन बाकी है, वे इसे गैस कंपनी के मोबाइल ऐप, डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालय या सिलेंडर की डिलीवरी के समय पूरा करा सकते हैं।
इसके लिए अलग-अलग कंपनियों के ऐप उपलब्ध हैं। इंडेन ग्राहक IndianOil ONE, भारत गैस उपभोक्ता HelloBPCL और एचपी गैस ग्राहक HP PAY ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। सरकार के मुताबिक, सत्यापन पूरा नहीं होने पर सब्सिडी वाले रिफिल की बुकिंग प्रभावित हो सकती है। हालांकि, पात्र उपभोक्ताओं के लिए बाजार मूल्य पर गैस लेने का विकल्प भी बताया गया है।
LPG सिलेंडर बुकिंग में 25 और 45 दिन का अंतर
LPG गैस सिलेंडर की अगली बुकिंग को लेकर भी उपभोक्ताओं को निर्धारित समय का ध्यान रखना होगा। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर होना चाहिए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर 45 दिन तक है।
इसका मतलब है कि शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए एक जैसा नियम नहीं है। इसलिए LPG सिलेंडर की खपत और क्षेत्र के हिसाब से अगली बुकिंग की योजना बनाना जरूरी है। जिन परिवारों में गैस की खपत अधिक है, उन्हें समय रहते सिलेंडर की उपलब्धता और बुकिंग की तारीख पर ध्यान देना चाहिए।
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने मार्च 2026 में स्पष्ट किया था कि बुकिंग के अंतर को लेकर अलग-अलग कनेक्शन श्रेणियों के नाम पर प्रसारित कुछ दावे सही नहीं हैं। मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतर की पुष्टि की थी। इसलिए किसी अफवाह के आधार पर जल्दबाजी में सिलेंडर बुक कराने से बचना चाहिए।
गैस डिलीवरी के समय बताना होगा चार अंकों का DAC कोड
एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी में डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी DAC की भूमिका भी अहम है। सिलेंडर बुक होने और कैश मेमो बनने के बाद उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर यह कोड भेजा जाता है। डिलीवरी के समय ग्राहक को यह कोड गैस पहुंचाने वाले कर्मचारी को बताना होता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सिलेंडर की डिलीवरी को सही ग्राहक तक पहुंचाना और गलत या फर्जी डिलीवरी की शिकायतों को कम करना है। इसलिए गैस बुक कराने के बाद अपना मोबाइल फोन चालू रखें और कंपनी की ओर से भेजे गए संदेश को संभालकर रखें।
यदि डिलीवरी के समय कोड नहीं मिल रहा है, तो ग्राहक अपने गैस वितरक या कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी ले सकते हैं। बिना पुष्टि के किसी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल पर आया कोड साझा नहीं करना चाहिए।
PNG कनेक्शन होने पर LPG सिलेंडर का क्या होगा?
जिन घरों में पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस यानी पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, उनके लिए भी नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं को अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। ऐसे घरों में नया घरेलू एलपीजी कनेक्शन लेने की अनुमति भी नहीं है।
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इसका उद्देश्य एक ही घर में पीएनजी और घरेलू एलपीजी की दोहरी सुविधा के इस्तेमाल को रोकना है। जिन परिवारों ने हाल में पीएनजी कनेक्शन लिया है, उन्हें अपनी गैस एजेंसी से संपर्क कर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
इस मामले में उपभोक्ताओं को किसी अपुष्ट समय-सीमा या सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। संबंधित गैस कंपनी और अधिकृत एजेंसी से लागू प्रक्रिया की जानकारी लेना बेहतर होगा।
1 नवंबर को LPG सिलेंडर की कीमतों में हो सकता है बदलाव
हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में 1 नवंबर को भी घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की नई कीमतों पर नजर रहेगी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, लागत और अन्य आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में बदलाव किया जा सकता है।

घरेलू रसोई गैस सिलेंडर आमतौर पर 14.2 किलोग्राम का होता है। वहीं होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाला कमर्शियल सिलेंडर सामान्यतः 19 किलोग्राम का होता है। दोनों की कीमतों की समीक्षा अलग-अलग होती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि हर महीने समीक्षा होने का अर्थ कीमत बढ़ना ही नहीं है। कभी कीमतों में बढ़ोतरी होती है, कभी कटौती और कभी दरें पहले जैसी बनी रहती हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को नई कीमत की पुष्टि अपनी गैस कंपनी के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या वितरक से करनी चाहिए।
मुफ्त सिलेंडर योजना को लेकर भी रहें सतर्क
त्योहारों के आसपास मुफ्त गैस सिलेंडर या रिफिल की राशि मिलने से जुड़ी खबरें सामने आती रहती हैं। लेकिन ऐसी सुविधाएं पूरे देश में एक समान लागू नहीं होतीं। कुछ योजनाएं केंद्र सरकार की होती हैं, जबकि कुछ राज्य सरकारें अपनी पात्रता और बजट के अनुसार अलग व्यवस्था करती हैं।
इसलिए बिहार सहित दूसरे राज्यों के उपभोक्ताओं को मुफ्त सिलेंडर मिलने के किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले राज्य सरकार की आधिकारिक घोषणा और योजना की शर्तें जांचनी चाहिए। केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेश के आधार पर किसी योजना को लागू मानना ठीक नहीं होगा।
LPG उपभोक्ता इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
नवंबर की शुरुआत से पहले उपभोक्ता अपने गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी स्थिति जांच लें। शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन के बुकिंग अंतर को ध्यान में रखें। सिलेंडर की डिलीवरी के समय DAC कोड उपलब्ध रखें और पीएनजी कनेक्शन होने पर घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी करें।
इसके साथ ही 1 नवंबर को सिलेंडर की कीमतों में होने वाले संभावित बदलाव की जानकारी आधिकारिक माध्यम से लें। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से गैस बुकिंग, सब्सिडी और डिलीवरी के दौरान होने वाली अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
