पटना से मां-बेटी और भाई लापता, 38 दिन बाद भी सुराग नहीं, ड्राइवर पर अपहरण का आरोप
पटना से मां-बेटी और भाई लापता, 38 दिन बाद भी सुराग नहीं
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना के फुलवारीशरीफ इलाके से एक विवाहिता, उसकी दो साल की बेटी और 20 वर्षीय भाई के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। तीनों 24 सितंबर 2026 को धुपारचक गांव से कार से पुनपुन स्थित ससुराल जाने के लिए निकले थे, लेकिन न तो ससुराल पहुंचे और न ही मायके लौटे। घटना के 38 दिन बीत जाने के बाद भी परिवार को उनकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। परिजनों ने गांव के ही एक युवक प्रिंस कुमार पर तीनों को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया है।
लापता लोगों की पहचान निशु कुमारी, उनकी दो साल की बेटी प्रियांशी और 20 वर्षीय भाई आयुष कुमार के रूप में हुई है। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्ची और आयुष की सुरक्षा को लेकर है। परिजनों का कहना है कि इतने दिनों बाद भी तीनों का पता नहीं चलना कई आशंकाएं पैदा कर रहा है। उन्होंने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द बरामदगी की मांग की है।
पटना के धुपारचक गांव से एक साथ निकले थे तीनों
परिजनों के मुताबिक, निशु कुमारी की शादी वर्ष 2023 में पुनपुन के लखनपाल गांव में रंटू सिंह के परिवार में हुई थी। 24 सितंबर को शाम करीब 4:30 बजे निशु अपनी बेटी प्रियांशी और भाई आयुष के साथ प्रिंस कुमार की आर्टिगा कार से ससुराल जाने के लिए निकली थीं। प्रिंस निजी तौर पर गाड़ी चलाता है।
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परिवार को उम्मीद थी कि तीनों कुछ समय में ससुराल पहुंच जाएंगे। लेकिन देर शाम तक जब निशु वहां नहीं पहुंचीं तो मायके वालों ने उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की। फोन बंद मिला। इसके बाद आयुष के मोबाइल पर भी कॉल किया गया, लेकिन उसका फोन भी बंद आने लगा।
पहले परिवार ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और परिचितों से जानकारी जुटाई। जब कहीं से कोई खबर नहीं मिली तो उनकी चिंता बढ़ गई। इसके बाद लापता तीनों की तलाश शुरू की गई और पुलिस को सूचना दी गई।
मुगलसराय रेलवे स्टेशन की पार्किंग में मिली कार
इस मामले में 25 सितंबर को एक अहम जानकारी सामने आई। परिजनों के अनुसार, प्रिंस के चचेरे भाई ने उन्हें बताया कि कार मुगलसराय रेलवे स्टेशन की पार्किंग में खड़ी है। बताया गया कि प्रिंस ने अपने भाई राहुल को संदेश भेजकर वहां से कार की चाबी लेने और गाड़ी पटना लाने के लिए कहा था।
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कार का मुगलसराय रेलवे स्टेशन की पार्किंग में मिलना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। परिवार के मन में सवाल है कि यदि तीनों पटना से पुनपुन जाने के लिए निकले थे तो कार मुगलसराय कैसे पहुंची? वहां कार छोड़ने के पीछे क्या वजह थी और उसके बाद तीनों किस दिशा में गए, इसकी जानकारी अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
परिजनों का कहना है कि कार की लोकेशन बाद में दिल्ली में भी मिलने की जानकारी उन्हें दी गई थी। इस संबंध में जांच अधिकारी विजय कुमार ने उन्हें बताया था कि मुगलसराय के बाद तीनों की लोकेशन दिल्ली में मिली थी। हालांकि, इसके बाद सभी मोबाइल फोन बंद हो गए। दिल्ली में लोकेशन मिलने की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि और उसका पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।
पटना पुलिस की जांच पर परिवार ने उठाए सवाल
परिवार का आरोप है कि तीनों के मोबाइल नंबर और कुछ संदिग्ध नंबर पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। परिजनों के मुताबिक, जांच के दौरान मोबाइल लोकेशन और कार से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जरूरत है।
मनोज कुमार और उनकी पत्नी रीना देवी का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से थाने और पुलिस अधिकारियों के पास जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें ऐसी जानकारी नहीं मिल रही है, जिससे तीनों का पता चल सके। परिवार ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में जितनी तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी, वैसी उन्हें दिखाई नहीं दे रही है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि फिरौती की मांग नहीं होने की बात कहकर मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, फिरौती की मांग नहीं होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि लापता लोगों के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई है। परिवार चाहता है कि हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जाए।
घर से करीब 8 लाख के गहने लेकर निकली थी निशु
इस मामले में एक और अहम जानकारी सामने आई है। परिजनों के मुताबिक, निशु अपने साथ करीब आठ लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के गहने लेकर निकली थीं। परिवार को आशंका है कि गहनों का मामला भी घटना से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी तरह की पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार के लिए गहनों से ज्यादा महत्वपूर्ण तीनों की सुरक्षित वापसी है। खासकर दो साल की बच्ची प्रियांशी की सुरक्षा को लेकर माता-पिता और रिश्तेदार बेहद परेशान हैं। 20 वर्षीय आयुष भी उसी दिन से लापता है। तीनों के एक साथ गायब होने और मोबाइल फोन बंद होने के कारण मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
कार, मोबाइल और संदिग्ध नंबरों की जांच से खुल सकते हैं राज
लापता लोगों की तलाश में कार की आवाजाही, मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन और संबंधित नंबरों की जांच अहम साबित हो सकती है। परिजनों का कहना है कि पुलिस के पास वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर BR01KC4898 और तीनों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं। वे चाहते हैं कि इन जानकारियों के आधार पर जांच तेज की जाए।
जांच में यह पता लगाना जरूरी है कि मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर कार किस समय पहुंची, उसे वहां किसने पार्क किया और उसके बाद तीनों कहां गए। दिल्ली में लोकेशन मिलने की बात की भी तकनीकी आधार पर पुष्टि होनी चाहिए। इसके अलावा, प्रिंस कुमार और उससे जुड़े लोगों से पूछताछ के संबंध में पुलिस की कार्रवाई भी मामले में अहम हो सकती है।
फुलवारी शरीफ थाना पुलिस ने कहा- जांच जारी
मामले को लेकर फुलवारी शरीफ थाना प्रभारी ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस छानबीन कर रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक तीनों के बारे में कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
वहीं, परिजनों ने वरीय पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच होनी चाहिए, ताकि निशु, प्रियांशी और आयुष का जल्द पता लगाया जा सके।
38 दिन से जारी इंतजार ने परिवार की बेचैनी बढ़ा दी है। अब उनकी उम्मीद पुलिस की जांच पर टिकी है। सवाल यह है कि पटना से निकले तीनों लोग आखिर कहां गायब हो गए? मुगलसराय में मिली कार और दिल्ली की बताई गई लोकेशन के बीच क्या संबंध है? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी मांग है कि तीनों को सुरक्षित खोजकर घर वापस लाया जाए।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
