बिहार कांग्रेस कार्यालय में दिल्ली पुलिस का नोटिस, 5 नवंबर को पेश होने का निर्देश
बिहार कांग्रेस कार्यालय में दिल्ली पुलिस का नोटिस, 5 नवंबर को पेशी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना स्थित बिहार कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रविवार को स्पेशल सेल की टीम ने कार्यालय परिसर में एक नोटिस चस्पा किया। यह नोटिस बिहार कांग्रेस के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से जुड़े मोबाइल नंबर के पंजीकृत मालिक अमित कुमार मंडल के नाम जारी किया गया है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 5 नवंबर को दिल्ली स्थित स्पेशल सेल के काउंटर इंटेलिजेंस कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
नोटिस में मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और उससे इस्तेमाल किए गए मोबाइल हैंडसेट की जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही पुलिस ने बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल को संचालित करने वाले अधिकृत लोगों का ब्योरा भी तलब किया है। जांच के दायरे में जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन से जुड़ी जानकारी शामिल है।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश बताया है। वहीं, पुलिस की ओर से नोटिस जारी करने के पीछे चल रही जांच का विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सबकी नजर 5 नवंबर को होने वाली पेशी और मांगी गई जानकारी पर टिकी है।
बिहार कांग्रेस के सदाकत आश्रम में दिल्ली पुलिस का नोटिस
रविवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पटना के सदाकत आश्रम स्थित बिहार कांग्रेस कार्यालय में नोटिस चस्पा किया। नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत जारी किया गया है। इसमें अमित कुमार मंडल को जांच से संबंधित कुछ दस्तावेज और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
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पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान एक मोबाइल नंबर बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल से जुड़ा पाया गया। इसी नंबर के पंजीकृत मालिक के तौर पर अमित कुमार मंडल का नाम सामने आया है। उनसे संबंधित सिम कार्ड और उस नंबर के इस्तेमाल में आए मोबाइल फोन की जानकारी मांगी गई है।
नोटिस में कहा गया है कि 1 जुलाई 2025 से अब तक इस नंबर का इस्तेमाल जिन मोबाइल हैंडसेट में हुआ है, उनका विवरण उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि बिहार कांग्रेस के आधिकारिक एक्स अकाउंट का संचालन कौन करता है और इसके लिए किसे अधिकृत किया गया है।
बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल के छह महीने का रिकॉर्ड मांगा
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस में सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन से जुड़ी जानकारी पर विशेष जोर दिया गया है। पुलिस ने 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2025 तक @INCBihar एक्स हैंडल का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत लोगों की सूची मांगी है।
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इसका मतलब है कि जांच के दौरान केवल मोबाइल नंबर के पंजीकृत मालिक की जानकारी ही नहीं, बल्कि अकाउंट तक पहुंच रखने वाले लोगों और उसके संचालन की व्यवस्था को भी समझने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने इस अवधि में अकाउंट का इस्तेमाल करने वाले अधिकृत व्यक्तियों का नाम और उनसे संबंधित जरूरी विवरण देने को कहा है।
इसके अलावा नोटिस में जांच से जुड़ी अन्य उपयोगी जानकारी भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। नोटिस पर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के सब-इंस्पेक्टर देवल शेखियन के हस्ताक्षर हैं।
5 नवंबर को दिल्ली में पेश होने का निर्देश
नोटिस के अनुसार, अमित कुमार मंडल को 5 नवंबर को दिल्ली स्थित स्पेशल सेल के काउंटर इंटेलिजेंस कार्यालय में उपस्थित होना है। उन्हें मांगी गई जानकारी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 5 नवंबर होगा। उस दिन अमित कुमार मंडल पुलिस के सामने कौन-सी जानकारी रखते हैं और जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल नोटिस में मांगी गई जानकारी को जांच का हिस्सा बताया गया है। इसे किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने या दोष तय होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
धारा 94 के तहत जारी नोटिस के जरिए जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेज या अन्य आवश्यक जानकारी मांग सकती है। इस मामले में पुलिस ने मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
कांग्रेस ने कार्रवाई पर उठाए सवाल, गृह मंत्री पर लगाया आरोप
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद बिहार कांग्रेस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसका विरोध किया। कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन डॉ. अजय कुमार पासवान की ओर से जारी विज्ञप्ति में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के बयान को शामिल किया गया।

राजेश राम ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री के इशारे पर कांग्रेस कार्यालयों में पुलिस भेजकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सदाकत आश्रम परिसर में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए इसकी निंदा की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने कार्रवाई के लिए रविवार का दिन क्यों चुना। उनके मुताबिक, उस समय बिहार कांग्रेस के अधिकतर नेता और कार्यकर्ता दिल्ली में मौजूद थे। पार्टी ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर पेश किया है।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे की जांच और नोटिस जारी करने का आधार अलग विषय है। पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आने पर ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और साफ होगी।
सदाकत आश्रम की कार्रवाई से बिहार की राजनीति में चर्चा
सदाकत आश्रम बिहार कांग्रेस का प्रमुख प्रदेश कार्यालय है। यहां दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से नोटिस चस्पा किए जाने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर और अधिकृत संचालकों की जानकारी मांग रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में तीन प्रमुख सवाल सामने हैं। पहला, बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल से जुड़ा मोबाइल नंबर किसके इस्तेमाल में था? दूसरा, जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच अकाउंट को किन लोगों ने संचालित किया? तीसरा, दिल्ली पुलिस की जांच में इस सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल नंबर की भूमिका क्या है?
इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और मांगे गए रिकॉर्ड से सामने आ सकते हैं। फिलहाल बिहार कांग्रेस ने कार्रवाई का विरोध किया है, जबकि नोटिस में निर्धारित तारीख पर संबंधित व्यक्ति को दिल्ली में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
अब 5 नवंबर की पेशी पर टिकी नजर
पटना के सदाकत आश्रम में नोटिस चस्पा होने के बाद बिहार कांग्रेस और दिल्ली पुलिस के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है। 5 नवंबर को होने वाली पेशी के बाद जांच की दिशा और मांगी गई जानकारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
फिलहाल इतना साफ है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल से जुड़े मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, मोबाइल हैंडसेट और अकाउंट संचालकों की जानकारी जुटाना चाहती है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि मांगी गई जानकारी से जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पुलिस इस पर क्या कदम उठाती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
