महादेव ऑनलाइन बेटिंग केस में बड़ा मोड़, चंद्राकर की भारत वापसी, खुलेंगे कई राज?

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महादेव ऐप केस में बड़ा मोड़, सौरभ चंद्राकर ओमान से भारत लाया गया

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। महादेव ऑनलाइन बेटिंग केस में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ओमान से भारत लेकर आई है। लंबे समय से चल रही कार्रवाई के बाद उसकी भारत वापसी को इस मामले की जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सीबीआई उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश करने की तैयारी में है। अदालत में पेशी के बाद उससे पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

महादेव ऐप के जरिए देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाने के आरोपों की जांच कई एजेंसियां कर रही हैं। इस नेटवर्क में क्रिकेट, फुटबॉल समेत दूसरे खेलों पर ऑनलाइन दांव लगाए जाते थे। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, सट्टेबाजी के कारोबार को अलग-अलग पैनल और ब्रांच के माध्यम से संचालित किया जाता था। अब सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े लोगों, पैसों के लेन-देन और कथित वित्तीय गतिविधियों की कड़ियों को और विस्तार से खंगाल सकती हैं।

ओमान से भारत लाया गया महादेव ऐप केस का आरोपी

सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच एजेंसियां लंबे समय से प्रयास कर रही थीं। इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद उसे ओमान में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसके प्रत्यर्पण के लिए ओमान को प्रस्ताव भेजा था।

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भारत पहुंचने के बाद उसकी मेडिकल जांच कराए जाने और फिर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले जाने की प्रक्रिया बताई गई है। वहां उसे विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत में पेशी के दौरान जांच एजेंसी अपनी आगे की कार्रवाई और पूछताछ की जरूरत के संबंध में पक्ष रख सकती है। इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे, यह अदालत की प्रक्रिया और जांच से जुड़े तथ्यों पर निर्भर करेगा।

महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट कैसे करता था काम?

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऐप से जुड़े नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में कई पैनल और ब्रांच बनाए गए थे। इन पैनलों के माध्यम से लोगों को सट्टा लगाने की सुविधा दी जाती थी। जांच में टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर247 जैसे प्लेटफॉर्म का नाम भी सामने आया है।

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एजेंसियों का आरोप है कि यह नेटवर्क एक संगठित तरीके से काम करता था। अलग-अलग जगहों पर मौजूद पैनल और उनसे जुड़े लोगों के जरिए सट्टेबाजी का संचालन किया जाता था। इस तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनाई गई। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस कारोबार से हासिल रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था और उसे किन रास्तों से आगे भेजा जाता था।

फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए पैसे भेजने का आरोप

महादेव ऐप केस की जांच में पैसों के लेन-देन को लेकर भी कई अहम आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, सट्टेबाजी से हासिल रकम को कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। इस प्रक्रिया में किन लोगों और संस्थाओं की भूमिका थी, इसकी जांच की जा रही है।

जांच में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा। एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम कहां-कहां पहुंची, किन खातों का इस्तेमाल हुआ और नेटवर्क के संचालन में कौन-कौन लोग शामिल थे।

CBI और ED पहले ही दाखिल कर चुकी हैं चार्जशीट

महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में सीबीआई और ईडी दोनों अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सीबीआई इस मामले से जुड़े दो केस में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने भी सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।

ईडी की ओर से अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल पांच चार्जशीट में 74 इकाइयों को आरोपी बनाया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि जांच का दायरा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसियां कथित नेटवर्क से जुड़ी विभिन्न इकाइयों और लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

ईडी ने मार्च में बताया था कि उसने सौरभ चंद्राकर से जुड़ी करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। एजेंसी के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या में संपत्तियां दुबई में स्थित हैं। बुर्ज खलीफा में होल्डिंग्स का भी उल्लेख किया गया है। संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आए वित्तीय तथ्यों के आधार पर की गई है। इस संबंध में अंतिम स्थिति आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।

2024 में दुबई में भी हिरासत में लिया गया था चंद्राकर

सौरभ चंद्राकर को इससे पहले वर्ष 2024 में दुबई में भी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था। उस समय भारत की ओर से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया था, लेकिन भारत की प्रत्यर्पण संबंधी मांग स्वीकार नहीं होने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था। इसके बाद इंटरपोल के रेड नोटिस को वापस लेने के लिए दी गई उसकी अर्जी पर भी विचार हुआ।

इंटरपोल के कमीशन फॉर द कंट्रोल ऑफ फाइल्स ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी। आयोग ने मामले को वित्तीय अपराध से जुड़ा माना था, न कि राजनीतिक उत्पीड़न का मामला। इसके बाद उसके खिलाफ जारी रेड नोटिस बरकरार रहा। अब ओमान से भारत लाए जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला है।

रवि उप्पल की भूमिका भी जांच के दायरे में

महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट से जुड़े एक अन्य प्रमुख नाम रवि उप्पल का भी इस मामले में उल्लेख किया जाता रहा है। उसे इस नेटवर्क का सह-संस्थापक बताया गया है। जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2019 में भारत से बाहर जाने के बाद वह दुबई से सौरभ चंद्राकर के साथ नेटवर्क का संचालन करता था।

हालिया जानकारी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों की ओर से उसके खिलाफ प्रत्यर्पण प्रक्रिया बंद किए जाने के बाद वह वानुअतु चला गया है। इस घटनाक्रम से जांच एजेंसियों के सामने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कथित वित्तीय गतिविधियों की जांच की चुनौती बनी हुई है।

महादेव ऐप केस में अब आगे क्या होगा?

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद सबसे अहम प्रक्रिया रायपुर की विशेष अदालत में उसकी पेशी होगी। इसके बाद अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। सीबीआई उससे सिंडिकेट के संचालन, ऑनलाइन सट्टेबाजी के नेटवर्क, कथित वित्तीय लेन-देन और दूसरे आरोपियों से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर सकती है।

जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि नेटवर्क में अलग-अलग पैनल किस तरह काम करते थे और कथित तौर पर जुटाई गई रकम किन रास्तों से विदेश भेजी जाती थी। साथ ही, इस मामले में सामने आए अन्य नामों और संस्थाओं की भूमिका की जांच भी आगे बढ़ सकती है।

महादेव ऐप केस केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें कथित वित्तीय लेन-देन, हवाला, संपत्तियों और रिश्वत से जुड़े आरोप भी जांच का हिस्सा हैं। ऐसे में सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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