किशनगंज में DPO रूबी कुमारी के 4 ठिकानों पर EOU की रेड, 80% अधिक संपत्ति का मामला

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किशनगंज DPO रूबी कुमारी पर EOU की रेड, 4 ठिकानों पर छापेमारी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (किशनगंज)। बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। किशनगंज जिले में शिक्षा विभाग की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) रूबी कुमारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मंगलवार सुबह एक साथ चार ठिकानों पर छापेमारी शुरू की गई। यह कार्रवाई किशनगंज और कटिहार जिले में की जा रही है। प्रारंभिक जांच में रूबी कुमारी की घोषित और वैध आय की तुलना में करीब 80 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने की बात सामने आने के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने यह कदम उठाया है।

विशेष न्यायालय से सर्च वारंट मिलने के बाद EOU की अलग-अलग टीमों ने सुबह से ही तलाशी अभियान शुरू कर दिया। इस कार्रवाई में उनके आवास से लेकर सरकारी कार्यालय तक को जांच के दायरे में लिया गया है। जांच अधिकारियों की नजर बैंक खातों, जमीन-जायदाद के दस्तावेजों, निवेश, नकदी और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड पर है। छापेमारी की खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज हो गई है।

किशनगंज में DPO रूबी कुमारी के घर और कार्यालय पर छापा

आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम ने किशनगंज में रूबी कुमारी के किराए के मकान और शिक्षा विभाग के कार्यालय स्थित उनके चेंबर में एक साथ तलाशी शुरू की। दोनों स्थानों पर स्थानीय पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

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टीम के अधिकारी घर और कार्यालय में मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। तलाशी के दौरान बैंक पासबुक, जमीन से संबंधित कागजात, निवेश के दस्तावेज, फाइलें और कंप्यूटर सहित डिजिटल उपकरणों को खंगाला जा रहा है।

जांच एजेंसी का प्रयास है कि आय और संपत्ति के बीच के अंतर को प्रमाणों के आधार पर समझा जा सके। इसके लिए अधिकारियों की टीम वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।

किशनगंज के साथ कटिहार में भी EOU की कार्रवाई

इस छापेमारी का दायरा केवल किशनगंज तक सीमित नहीं है। आर्थिक अपराध इकाई ने पड़ोसी जिले कटिहार में भी रूबी कुमारी से जुड़े दो ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया है। इस तरह दोनों जिलों में कुल चार स्थानों पर EOU की टीमें जांच कर रही हैं।

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कार्रवाई के दौरान चारों ठिकानों पर बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया है। जांच अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों की वास्तविकता की पड़ताल करना है।

कटिहार में जिन स्थानों पर तलाशी ली जा रही है, वहां भी वित्तीय दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि किसी भी संभावित संपत्ति या निवेश का विवरण जांच से छूटने न पाए।

80 प्रतिशत अधिक संपत्ति का मामला क्या है?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात रूबी कुमारी की कथित आय से अधिक संपत्ति है। आर्थिक अपराध इकाई को उनके खिलाफ पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने से संबंधित शिकायतें मिली थीं।

इसके बाद एजेंसी ने गोपनीय तरीके से प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए वित्तीय तथ्यों के आधार पर उनकी वैध और घोषित आय की तुलना में करीब 80 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने की बात सामने आई।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करती है कि किसी सरकारी अधिकारी की कुल संपत्ति उसकी ज्ञात और वैध आय के अनुपात में है या नहीं। यदि संपत्ति और आय के बीच असामान्य अंतर मिलता है तो उसके स्रोतों की जांच की जाती है।

इसी आधार पर रूबी कुमारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद किशनगंज और कटिहार में एक साथ छापेमारी की कार्रवाई शुरू हुई।

हालांकि, 80 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आंकड़ा प्रारंभिक जांच से जुड़ा है। अंतिम स्थिति विस्तृत जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होगी।

जमीन, जेवरात और बैंक खातों की हो रही जांच

EOU की छापेमारी में केवल कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि संपत्ति के भौतिक सत्यापन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की टीम जमीन के डीड, सोने-चांदी के जेवरात, नकदी और अन्य कीमती सामान का विवरण जुटा रही है।

इसके साथ ही बैंक खातों में जमा रकम, विभिन्न वित्तीय संस्थानों में किए गए निवेश और डिजिटल लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद रिकॉर्ड जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संपत्तियां कब खरीदी गईं, उनके लिए भुगतान कहां से किया गया और संबंधित रकम का स्रोत क्या था। यदि किसी संपत्ति का संबंध किसी अन्य व्यक्ति या परिजन से मिलता है तो उसके वित्तीय संबंधों की भी जांच की जा सकती है।

इस तरह की जांच में संपत्ति के दस्तावेजों के साथ आयकर विवरण, वेतन, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है।

सरकारी योजनाओं में अनियमितता के आरोपों की भी जांच

रूबी कुमारी के खिलाफ मिली शिकायतों में पद के कथित दुरुपयोग और सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी शामिल बताए जा रहे हैं। आर्थिक अपराध इकाई इन शिकायतों से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

शिक्षा विभाग में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी का पद प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस पद से जुड़े अधिकारियों को विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभानी होती है।

ऐसे में यदि किसी अधिकारी के खिलाफ सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कई स्तरों पर की जा सकती है। हालांकि, रूबी कुमारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

EOU की रेड के बाद शिक्षा विभाग में बढ़ी हलचल

किशनगंज में शिक्षा विभाग की एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में चर्चा तेज कर दी है। सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों की संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी को लेकर भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई की टीमें चारों ठिकानों पर तलाशी और दस्तावेजों के सत्यापन में जुटी हैं। छापेमारी पूरी होने के बाद बरामद संपत्ति, नकदी और दस्तावेजों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद जांच एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लेगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तलाशी के दौरान कितनी संपत्ति और महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आते हैं। क्या प्रारंभिक जांच में सामने आया 80 प्रतिशत का अंतर अंतिम जांच में भी कायम रहता है? इसका जवाब EOU की विस्तृत जांच और आधिकारिक खुलासे के बाद ही मिल सकेगा।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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