दिल्ली में कपिल सिब्बल से मिले लालू-तेजस्वी, नौकरी-जमीन केस पर नजर, क्या हैं मायने?
दिल्ली में लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने कपिल सिब्बल से मुलाकात की। नौकरी के बदले जमीन मामले में कानूनी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। बिहार की राजनीति से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की एक मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है। दोनों नेता सोमवार देर रात दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के आवास पहुंचे। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सबसे अधिक चर्चा नौकरी के बदले जमीन मामले को लेकर हो रही है, जिसमें लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्य आरोपी हैं।
सूत्रों के अनुसार, लालू और तेजस्वी यादव की कपिल सिब्बल के साथ मुलाकात के दौरान इस मामले की कानूनी पैरवी और आगे की रणनीति को लेकर बातचीत हुई। हालांकि, मुलाकात में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में इस बैठक को लेकर सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दिल्ली में कपिल सिब्बल से क्यों मिले लालू-तेजस्वी?
लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की कपिल सिब्बल से मुलाकात को सामान्य राजनीतिक मुलाकात के बजाय कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह नौकरी के बदले जमीन से जुड़ा मामला है, जिसकी सुनवाई दिल्ली की अदालत में चल रही है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: NDA में गठबंधन का सियासी खेल?JDU की सीट पर BJP का कब्जा
कपिल सिब्बल देश के वरिष्ठ वकीलों में गिने जाते हैं और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक तथा संवैधानिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं। ऐसे में लालू और तेजस्वी का उनके आवास पहुंचना इस चर्चा को बल दे रहा है कि परिवार इस मामले में कानूनी पहलुओं को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कपिल सिब्बल इस मामले में औपचारिक रूप से लालू परिवार की ओर से पैरवी कर रहे हैं या मुलाकात केवल कानूनी सलाह और विचार-विमर्श के लिए हुई थी। इसलिए इस बैठक को किसी नई कानूनी नियुक्ति या रणनीति की आधिकारिक घोषणा मानना जल्दबाजी होगी।
नौकरी के बदले जमीन मामला क्या है?
नौकरी के बदले जमीन मामला, जिसे लैंड फॉर जॉब केस भी कहा जाता है, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़ा एक चर्चित कथित भ्रष्टाचार और धनशोधन का मामला है। यह मामला उस अवधि से संबंधित है, जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में रेल मंत्री थे।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस अवधि में भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप-डी के पदों पर कई लोगों की नियुक्तियां की गईं। इसके बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों की जमीन कथित तौर पर लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनी ए.के. इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हस्तांतरित कराई गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जमीन का हस्तांतरण कथित तौर पर बाजार मूल्य से कम कीमत पर हुआ और इसका संबंध रेलवे में नौकरी दिलाने से था। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं, जिनका न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।
दिल्ली की अदालत में क्या चल रहा है मामला?
इस प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रहे हैं। सीबीआई का मामला कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से संबंधित है, जबकि ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कार्रवाई की है।
विशेष अदालत में ईडी के धनशोधन मामले में आरोप तय करने के बिंदु पर सुनवाई महत्वपूर्ण चरण में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईडी ने 16 मार्च को आरोप तय करने के संबंध में अपनी दलीलें पूरी की थीं। इसके बाद अदालत में आगे की सुनवाई और दलीलों को लेकर प्रक्रिया जारी रही।
विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने ईडी की ओर से नए सिरे से दलीलें रखने के लिए समय मांगे जाने के बाद इस संबंध में सुनवाई का अवसर दिया था। इससे पहले विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने आरोप तय करने के संबंध में आदेश सुरक्षित रख चुके थे। बाद में मामले में नए सिरे से दलीलें सुनने की प्रक्रिया सामने आई।
यही वजह है कि दिल्ली में लालू और तेजस्वी की कपिल सिब्बल से मुलाकात को इस कानूनी घटनाक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीबीआई मामले में 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय
नौकरी के बदले जमीन मामले में सीबीआई की कार्रवाई भी अहम रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 9 जनवरी को विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों समेत 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप तय करने का आदेश दिया था।
इस मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सामने आए हैं। उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को भी बाद में मामले में आरोपी बनाया गया।
ईडी की ओर से दाखिल आरोप-पत्र में अमित कात्याल, रेलवे के पूर्व कर्मचारी हृदयानंद चौधरी और ए.के. इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड तथा एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का भी उल्लेख किया गया है। इन कंपनियों के निदेशक के रूप में शरीकुल बारी का नाम सामने आया है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कथित लेनदेन के जरिए जमीन का हस्तांतरण कराया गया। दूसरी तरफ, आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने और आरोपों का बचाव करने का अधिकार है। अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
दिल्ली की मुलाकात के बिहार की राजनीति में क्या मायने?
लालू और तेजस्वी यादव की कपिल सिब्बल से मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब नौकरी के बदले जमीन मामले में कानूनी प्रक्रिया राजद परिवार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। इस मुलाकात के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
बिहार में राजद की राजनीति का बड़ा चेहरा लालू प्रसाद यादव हैं, जबकि तेजस्वी यादव पार्टी के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में पिता-पुत्र की एक साथ दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ता से मुलाकात को पार्टी के भविष्य और परिवार से जुड़े कानूनी मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस बैठक का एक पहलू यह भी है कि किसी बड़े कानूनी मामले में आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर बचाव पक्ष के लिए हर कानूनी विकल्प और दस्तावेज का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत करना किसी भी पक्ष की सामान्य कानूनी तैयारी का हिस्सा हो सकता है।
क्या आने वाले दिनों में बढ़ेगी कानूनी और राजनीतिक हलचल?
फिलहाल लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की कपिल सिब्बल से मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन नौकरी के बदले जमीन मामले की संवेदनशीलता और इसमें परिवार के कई सदस्यों के आरोपी होने के कारण इस बैठक पर सबकी नजर है।
अब सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात केवल कानूनी सलाह तक सीमित थी या इसके जरिए मामले में आगे की पैरवी को लेकर कोई बड़ी रणनीति तैयार की गई है? इसका जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो सकेगा।
इतना जरूर है कि दिल्ली में हुई इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले समय में अदालत की सुनवाई और राजद नेतृत्व की कानूनी तैयारियां इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
