अनंत सिंह की हुंकार, बोले- मेरी गलती बताइए, नीरज के साथ हो जाऊंगा, मैं नार्को टेस्ट को भी तैयार

अनंत सिंह

अनंत सिंह ने नीरज कुमार से विवाद पर सफाई दी। बोले- गलती बताइए, साथ हो जाऊंगा। नार्को टेस्ट की चुनौती और नीतीश कुमार पर भी दिया बयान।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नीरज कुमार को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। एक स्थानीय यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में अनंत सिंह ने कहा कि उनकी एक गलती बता दी जाए तो वह नीरज कुमार के साथ हो जाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए वह नार्को टेस्ट कराने को भी तैयार हैं।

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच लंबे समय से राजनीतिक अदावत रही है। दोनों ही भूमिहार समुदाय से आते हैं और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के दौरान यह टकराव खुलकर सामने आया था। अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जेडीयू ने उनके इस कदम को पार्टी विरोधी गतिविधि माना और छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। अब अनंत सिंह ने एक बार फिर पुराने विवाद को लेकर अपनी सफाई दी है और कहा है कि उन्होंने नीरज कुमार को पहली बार एमएलसी का टिकट दिलाने में भूमिका निभाई थी।

अनंत सिंह बोले- मेरी एक गलती बता दीजिए, नीरज के साथ हो जाऊंगा

इंटरव्यू में जब अनंत सिंह से नीरज कुमार के खिलाफ बगावत करने की वजह पूछी गई तो उन्होंने पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र किया। अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने जेडीयू में संघर्ष करके नीरज कुमार को एमएलसी का टिकट दिलाया था। उनका दावा है कि उन्होंने नीतीश कुमार और ललन सिंह को मनाकर नीरज कुमार के लिए टिकट की पैरवी की थी।

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अनंत सिंह के मुताबिक, नीरज कुमार चुनाव जीतने के बाद उन्हें पहचानने से भी इनकार करने लगे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच दूरी बढ़ती चली गई। अनंत सिंह का कहना है कि उन्होंने पार्टी के भीतर भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी और यह बात छिपाई नहीं थी कि वह नीरज कुमार के लिए वोट नहीं मांगेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर उनकी कोई गलती है तो उसे साफ-साफ बताया जाए। अनंत सिंह ने दावा किया कि गलती साबित होने पर वह नीरज कुमार के साथ हो जाएंगे। उनके इस बयान को पुराने विवाद में सुलह की एक सशर्त पेशकश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में इंटरव्यू के दौरान कोई स्वतंत्र प्रमाण पेश नहीं किया।

अनंत सिंह ने नार्को टेस्ट की चुनौती क्यों दी?

अनंत सिंह ने इंटरव्यू में विवाद को लेकर नार्को टेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जेडीयू की बैठक में उन्होंने सुझाव दिया था कि उनका और नीरज कुमार का नार्को टेस्ट करा लिया जाए। उनके अनुसार, इससे पता चल जाएगा कि दोनों में कौन सही बोल रहा है और कौन गलत।

नार्को टेस्ट का नाम लेकर अनंत सिंह ने अपने आरोपों को लेकर आक्रामक रुख दिखाया। उनका कहना था कि वह सच्चाई सामने लाने के लिए इस तरह की जांच के लिए भी तैयार हैं। हालांकि, नार्को टेस्ट अपने आप में किसी आरोप की अंतिम या निर्णायक कानूनी पुष्टि नहीं होता। ऐसे परीक्षण की प्रक्रिया और उसके परिणामों को लेकर कानूनी सीमाएं भी होती हैं।

अनंत सिंह के इस बयान से साफ है कि वह नीरज कुमार के साथ अपने विवाद को केवल चुनावी नाराजगी नहीं मानते, बल्कि इसे पुराने व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों से जोड़कर देख रहे हैं।

ललन सिंह का फोन आया था, अनंत सिंह ने बताई बातचीत

इंटरव्यू में अनंत सिंह ने जेडीयू की बैठक के बाद हुई एक बातचीत का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, बैठक के बाद ललन सिंह ने उन्हें फोन किया था। अनंत सिंह ने दावा किया कि ललन सिंह ने उनसे कहा कि नीरज कुमार के साथ उनका जो भी मामला है, उसे वे आपस में देखें, लेकिन इस विवाद में पार्टी का नाम नहीं लें।

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अनंत सिंह के इस दावे से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर भी इस विवाद को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि, ललन सिंह की ओर से इस बातचीत की पुष्टि या उसका विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

राजनीतिक तौर पर यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि अनंत सिंह कभी जेडीयू के प्रमुख नेताओं के करीबी माने जाते रहे हैं। अब पार्टी से निष्कासन के बाद उनका सार्वजनिक रूप से पुराने नेताओं और नीरज कुमार को लेकर बयान देना जेडीयू के अंदरूनी समीकरणों पर चर्चा बढ़ा सकता है।

अनंत सिंह बोले- जब तक जिंदा हूं, नीतीश कुमार ही नेता रहेंगे

नीरज कुमार से विवाद और जेडीयू से निष्कासन के बावजूद अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। उन्होंने कहा, “मैं जब तक जिंदा रहूंगा, नीतीश कुमार को नेता मानूंगा। नीतीश कुमार नहीं रहते तो बिहार ही नहीं रहता।”

इस बयान के जरिए अनंत सिंह ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि पार्टी से निष्कासित होने के बाद भी नीतीश कुमार को लेकर उनका सम्मान कम नहीं हुआ है। उन्होंने अपने राजनीतिक रिश्तों और पार्टी के मौजूदा फैसले के बीच अंतर रखा।

अनंत सिंह के लिए यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जेडीयू ने नीरज कुमार के विरोध को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में नीतीश कुमार को अपना नेता बताया। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या भविष्य में उनके और जेडीयू नेतृत्व के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश बची है।

जेडीयू से छह साल का निष्कासन, पत्नी नीलम देवी पर भी कार्रवाई

विधान परिषद चुनाव के दौरान नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह के रुख को जेडीयू ने अनुशासनहीनता माना था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। उनकी पत्नी नीलम देवी की सदस्यता भी वापस लेने की कार्रवाई की गई।

पार्टी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। उनके मुताबिक, जनता ही उनकी असली मालिक है और पार्टी को जो करना है, वह कर सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निष्कासन के बाद जेडीयू के किसी नेता ने उनसे फोन पर संपर्क नहीं किया।

अनंत सिंह ने पार्टी से निकाले जाने के बाद भी अपनी बात पर कायम रहने का संकेत दिया। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि फिलहाल वह अपने फैसले को गलत मानने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि, पार्टी की कार्रवाई और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है, यह आने वाले समय में साफ होगा।

सरकारी आवास खाली करने के नोटिस पर क्या बोले अनंत सिंह?

इंटरव्यू में अनंत सिंह से सरकारी आवास खाली करने के नोटिस को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि वह निर्धारित समय के भीतर आवास खाली कर देंगे और अपने गांव लदमा लौट जाएंगे।

उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि आवास खाली करने को लेकर वह फिलहाल कोई टकराव नहीं चाहते। उन्होंने इस मुद्दे पर किसी तरह की चुनौती देने के बजाय तय समय में प्रक्रिया पूरी करने की बात कही।

विधायकी गई तो क्या फिर चुनाव लड़ेंगे अनंत सिंह?

जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म करने से जुड़ी कार्रवाई भी शुरू होने की बात सामने आई है। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उपचुनाव की स्थिति बनती है तो क्या वह दोबारा चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने कोई सीधा फैसला नहीं सुनाया।

अनंत सिंह ने कहा कि पहले वह अपने क्षेत्र में जाएंगे और कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद ही तय करेंगे कि चुनाव लड़ना है या नहीं और किस पार्टी के साथ जाना है। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में फैसला जनता और कार्यकर्ताओं की राय जानने के बाद ही लिया जाएगा।

उनका यह रुख बताता है कि फिलहाल वह अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर इंतजार करना चाहते हैं। मोकामा में उनकी राजनीतिक पकड़ और समर्थकों की भूमिका इस फैसले में महत्वपूर्ण हो सकती है।

नीरज कुमार से सुलह होगी या बढ़ेगी सियासी दूरी?

अनंत सिंह के ताजा बयान ने जेडीयू के भीतर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर वह नीरज कुमार के साथ जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन इसके लिए अपनी गलती बताए जाने की शर्त भी रख रहे हैं। दूसरी ओर, उन्होंने नीतीश कुमार को जीवनभर अपना नेता मानने की बात दोहराई है।

अब देखना होगा कि नीरज कुमार और जेडीयू नेतृत्व अनंत सिंह के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या दोनों नेताओं के बीच पुरानी अदावत खत्म करने की कोई पहल होगी या यह विवाद आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल अनंत सिंह ने अपनी ओर से चुनौती भी दी है और सुलह का रास्ता भी खुला रखा है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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