पटना में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का अल्टीमेटम, 7 नवंबर से कचरा उठना होगा बंद

पटना

पटना नगर निगम के सफाईकर्मियों ने 6 नवंबर तक वेतन भुगतान की मांग की है। भुगतान नहीं होने पर 7 नवंबर से सफाई और कचरा उठाने का काम बंद होगा।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना की सफाई व्यवस्था पर दीपावली और छठ से पहले संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर निगम के कर्मचारियों और सफाई मजदूरों को समय पर वेतन और पेंशन नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी देते हुए नगर निगम प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी महासंघ ने साफ कहा है कि यदि 6 नवंबर तक लंबित वेतन का भुगतान नहीं हुआ तो 7 नवंबर से शहर में सफाई का काम बंद कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में सड़कों, गलियों और मोहल्लों से कचरा उठाने का काम प्रभावित हो सकता है।

महासंघ ने वेतन भुगतान की मांग को लेकर नगर आयुक्त के कार्यालय का घेराव करने की भी चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। त्योहारों के समय परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

इस चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान शहर में सफाई व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। घाटों, सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में साफ-सफाई की जरूरत रहती है। यदि सफाईकर्मी काम बंद करते हैं तो इसका सीधा असर आम लोगों और त्योहारों की तैयारियों पर पड़ सकता है।

पटना में सफाईकर्मियों को 6 नवंबर तक वेतन देने का अल्टीमेटम

नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी महासंघ ने प्रशासन को 6 नवंबर तक का समय दिया है। महासंघ के अध्यक्ष के अनुसार, 4 नवंबर तक निगम के कई कर्मचारियों को वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं किया गया था। इस वजह से कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।

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संघ का कहना है कि कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाने में कोई कमी नहीं की, लेकिन उन्हें मेहनत का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है। नियमित वेतन नहीं मिलने से उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ।

महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर वेतन नहीं मिला तो 7 नवंबर से सफाईकर्मी काम पर नहीं आएंगे। इसके साथ ही नगर आयुक्त के कार्यालय का घेराव कर लंबित भुगतान की मांग उठाई जाएगी। यानी अब निगम प्रशासन के पास कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई करने के लिए सीमित समय बचा है।

निजी एजेंसी के सफाई मजदूरों का सितंबर-अक्टूबर का वेतन बकाया

सफाई व्यवस्था में निजी एजेंसियों के तहत काम करने वाले मजदूरों की परेशानी भी गंभीर बताई जा रही है। महासंघ का आरोप है कि इन कर्मचारियों को सितंबर और अक्टूबर महीने का वेतन नहीं मिला है। इससे उन मजदूरों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है, जो रोजाना शहर की सफाई और कचरा उठाने जैसे जरूरी काम करते हैं।

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संघ के नेताओं के मुताबिक, अगस्त महीने में भी कई सफाई मजदूरों को पूरा वेतन नहीं मिला था। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को उनकी पूरी मजदूरी देने के बजाय मनमाने तरीके से केवल तीन से चार हजार रुपये का भुगतान किया गया। मजदूरों का कहना है कि इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना संभव नहीं है।

सफाईकर्मियों की नाराजगी का एक बड़ा कारण भुगतान में कथित भेदभाव भी है। महासंघ के नेताओं का आरोप है कि अन्य ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जबकि सफाई मजदूरों को कई महीनों से उनका पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। संघ ने निगम प्रशासन से इस मामले में जवाब देने और भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है।

हालांकि, भुगतान में देरी और ठेकेदारों को राशि दिए जाने से जुड़े आरोप महासंघ की ओर से लगाए गए हैं। निगम प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

त्योहारों से पहले कर्मचारियों की बढ़ी आर्थिक परेशानी

दीपावली और छठ बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल हैं। इन अवसरों पर परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं। घर की साफ-सफाई, पूजा की सामग्री, कपड़े, राशन और बच्चों की जरूरतों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। ऐसे समय में वेतन नहीं मिलने से सफाई कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

महासंघ के नेताओं का कहना है कि कई कर्मचारियों को घर का किराया, भोजन, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च जुटाने में परेशानी हो रही है। नियमित आमदनी नहीं होने के कारण कुछ मजदूर पहले ही कर्ज लेने को मजबूर हो चुके हैं। त्योहार नजदीक आने के बावजूद बकाया भुगतान नहीं मिलने से परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

सफाईकर्मियों के लिए यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि घर की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा सवाल बन गया है। रोजाना काम करने के बाद भी जब मजदूरी समय पर नहीं मिलती तो कर्मचारियों के सामने आर्थिक और मानसिक दबाव दोनों बढ़ते हैं। संघ का कहना है कि त्योहारों के मौके पर कर्मचारियों को राहत देने के बजाय भुगतान में देरी उनकी परेशानी बढ़ा रही है।

पटना की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है सीधा असर

यदि 7 नवंबर से सफाईकर्मी काम बंद करते हैं तो पटना की नगर सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। शहर में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है, जिसे उठाने और निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सफाईकर्मियों पर होती है। काम बंद होने की स्थिति में कचरा सड़कों, गलियों और बाजारों में जमा हो सकता है।

इसका असर केवल शहर की सुंदरता पर नहीं, बल्कि आम लोगों की सुविधा और स्वच्छता पर भी पड़ सकता है। कचरा लंबे समय तक जमा रहने से दुर्गंध और गंदगी की समस्या बढ़ सकती है। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों और प्रमुख बाजारों में परेशानी अधिक हो सकती है।

दीपावली और छठ के दौरान पटना में सफाई व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। छठ घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास के इलाकों की सफाई भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि कर्मचारियों की हड़ताल होती है तो त्योहारों की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका है।

नगर आयुक्त के घेराव की भी तैयारी

महासंघ ने केवल काम बंद करने की चेतावनी नहीं दी है, बल्कि वेतन भुगतान की मांग को लेकर नगर आयुक्त के कार्यालय का घेराव करने की बात भी कही है। संघ के नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों को बार-बार आश्वासन देने के बजाय बकाया राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।

महासंघ ने निगम प्रशासन से मांग की है कि नियमित कर्मचारियों का लंबित वेतन और पेंशन जल्द जारी किया जाए। साथ ही निजी एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले सफाई मजदूरों को भी उनका बकाया पारिश्रमिक दिलाया जाए। संघ का कहना है कि यदि 6 नवंबर तक भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई करेगा या पटना को त्योहारों के बीच सफाई संकट का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल कर्मचारियों ने अपनी समयसीमा तय कर दी है। 6 नवंबर तक वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति में 7 नवंबर से सफाई व्यवस्था ठप करने का अल्टीमेटम दिया गया है। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब निगम प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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