सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए 2 जरूरी काम, 31 दिसंबर तक डेडलाइन, जानें पूरा मामला

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बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के 2 जरूरी काम, 31 दिसंबर तक डेडलाइन

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए जरूरी खबर है। अब बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके दस्तावेज और बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने पर भी शिक्षा विभाग ने जोर दिया है। राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना और बैंक खाता खुलवाना अनिवार्य करने की दिशा में अभियान चलाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए 31 दिसंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है। यानी अगले करीब दो महीने में स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके यहां नामांकित बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र और बैंक खाते की सुविधा उपलब्ध हो।

शिक्षा विभाग की ओर से 5 नवंबर 2026 को जारी निर्देश के बाद अब सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें बच्चों के दस्तावेजों की स्थिति की जानकारी जुटाने के साथ बैंक शाखाओं और ग्राम पंचायत के मुखिया से भी संपर्क करना होगा। विभाग ने इस काम में स्कूल प्रशासन के अलावा बैंक प्रबंधकों और पंचायत प्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी निभाने को कहा है।

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इस पहल का उद्देश्य बच्चों को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचाना है। खासकर छात्रवृत्ति और दूसरी आर्थिक सहायता के भुगतान में बैंक खाते की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अभिभावकों को भी अपने बच्चों के दस्तावेजों की स्थिति समय रहते जांच लेनी चाहिए।

सरकारी स्कूलों के बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र जरूरी

शिक्षा विभाग के निर्देश के मुताबिक, राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र की एक प्रति स्कूल के रिकॉर्ड में रखना अनिवार्य होगा। जिन बच्चों का अभी तक जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना है, उनके अभिभावकों को इसे बनवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

जन्म प्रमाण पत्र बच्चों की पहचान और उम्र से जुड़ा महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है। स्कूल में नामांकन से लेकर आगे की पढ़ाई और कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक इसकी जरूरत पड़ सकती है। बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया में भी यह दस्तावेज उपयोगी होता है। इसी वजह से विभाग ने स्कूलों को बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत स्तर की व्यवस्था के तहत होती है। इसके लिए अभिभावक पंचायत सचिव या पंचायत सेवक से संपर्क कर सकते हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगर निकाय के माध्यम से जन्म प्रमाण पत्र बनवाया जाता है।

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जिन अभिभावकों के बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र अब तक नहीं बना है, उन्हें स्कूल के प्रधानाध्यापक से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। इससे समयसीमा के भीतर दस्तावेज तैयार कराने में मदद मिल सकती है।

स्कूल के हर बच्चे का बैंक खाता खुलवाने का निर्देश

शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों का बैंक खाता खुलवाने पर भी जोर दिया है। विभाग का मानना है कि बच्चों के नाम पर बैंक खाता उपलब्ध रहने से सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थी तक पहुंचाई जा सकती है।

खास तौर पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से मिलने वाली छात्रवृत्ति और अन्य आर्थिक सहायता के लिए बैंक खाता जरूरी है। यदि बच्चे के नाम पर खाता उपलब्ध नहीं है तो सरकारी राशि भेजने में परेशानी हो सकती है। इस व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए विभाग ने सभी सरकारी विद्यालयों को बच्चों के बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा है।

आदेश के अनुसार, बच्चों का बैंक खाता सिंगल या ज्वाइंट दोनों तरह से खुलवाया जा सकता है। सिंगल खाते में बच्चा स्वयं खाताधारक होगा, जबकि ज्वाइंट खाते में अभिभावक को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि, विभाग ने खाता सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंक में खुलवाने का निर्देश दिया है।

इससे उन बच्चों को विशेष लाभ मिल सकता है, जिन्हें छात्रवृत्ति या अन्य सरकारी सहायता मिलती है। बैंक खाते के माध्यम से राशि सीधे पहुंचने पर भुगतान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी और बीच में आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं।

प्रधानाध्यापकों को बैंक मैनेजर से करना होगा संपर्क

इस अभियान को पूरा कराने की मुख्य जिम्मेदारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई है। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी प्रधानाध्यापक अपने क्षेत्र की नजदीकी बैंक शाखा के प्रबंधक से संपर्क स्थापित करें। इसके बाद विद्यालय में नामांकित बच्चों के खाते खुलवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

प्रधानाध्यापकों को सबसे पहले यह पता करना होगा कि उनके स्कूल में कितने बच्चों के पास बैंक खाता है और कितने बच्चे अभी इस सुविधा से वंचित हैं। इसके आधार पर बैंक शाखा के साथ समन्वय बनाकर खाता खोलने की कार्रवाई की जा सकेगी।

विभाग ने छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों के बैंक खाते खुलवाने पर विशेष जोर दिया है। इसका मकसद यह है कि किसी भी पात्र बच्चे को केवल बैंक खाता नहीं होने के कारण सरकारी सहायता मिलने में परेशानी न हो।

इस व्यवस्था से स्कूलों की भूमिका भी पहले से अधिक व्यापक हो जाएगी। अब उन्हें पढ़ाई और उपस्थिति के साथ बच्चों के जरूरी दस्तावेज तथा सरकारी योजनाओं से जुड़ी बैंकिंग सुविधा पर भी ध्यान देना होगा।

जन्म प्रमाण पत्र के लिए मुखिया से संपर्क करेंगे स्कूल

बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शिक्षा विभाग ने ग्राम पंचायत स्तर पर भी समन्वय बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को अपने क्षेत्र के पंचायत मुखिया से संपर्क करना होगा।

स्कूलों में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित कर्मियों के सहयोग से प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

विभाग की इस पहल से स्कूल और पंचायत के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में कई बार अभिभावकों को दस्तावेज बनवाने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि स्कूल स्तर पर बच्चों की सूची तैयार कर पंचायत के साथ साझा की जाती है तो इस प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है।

हालांकि, प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया संबंधित सक्षम कार्यालय और निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरी होगी। स्कूलों की भूमिका मुख्य रूप से बच्चों की पहचान करने और संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने की होगी।

31 दिसंबर 2026 तक पूरा करना होगा स्कूल अभियान

शिक्षा विभाग ने जन्म प्रमाण पत्र और बैंक खाता खुलवाने के इस अभियान को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2026 की अंतिम तारीख तय की है। इसका मतलब है कि सभी सरकारी विद्यालयों को इस समयसीमा के भीतर बच्चों के दस्तावेज और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े काम पूरे कराने की दिशा में कार्रवाई करनी होगी।

यह आदेश बिहार शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पाण्डेय की ओर से जारी किया गया है। विभाग ने निर्देश की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को भेजने के साथ इसे विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए भी कहा है।

अब स्कूलों को अपने यहां नामांकित बच्चों की स्थिति की समीक्षा करनी होगी। जिन बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उनके अभिभावकों को इसकी जानकारी देनी होगी। इसी तरह बैंक खाता नहीं रखने वाले बच्चों की सूची बनाकर बैंक शाखाओं के सहयोग से खाते खुलवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

अभिभावक अभी से तैयार रखें जरूरी दस्तावेज

शिक्षा विभाग के इस निर्देश के बाद अभिभावकों को भी सक्रिय होने की जरूरत है। उन्हें सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बना है या नहीं और बैंक खाता उपलब्ध है या नहीं। यदि इनमें से कोई दस्तावेज नहीं है तो संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया समझनी चाहिए।

जन्म प्रमाण पत्र के लिए पंचायत या नगर निकाय के संबंधित कार्यालय से जानकारी ली जा सकती है। बैंक खाता खुलवाने के लिए नजदीकी सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंक से आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर शिक्षा विभाग की यह पहल सरकारी स्कूलों के बच्चों को दस्तावेजी रूप से मजबूत बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि राज्य के सभी सरकारी विद्यालय 31 दिसंबर 2026 तक इस अभियान को कितनी तेजी से पूरा कर पाते हैं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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