शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल, बड़े पैमाने पर अधिकारियों का ट्रांसफर, 10 जिलों में बदले DEO

शिक्षा विभाग

बिहार शिक्षा विभाग ने 10 जिलों के DEO और 9 DPO का तबादला किया है। 34 करोड़ की अवैध निकासी के मामले के बीच यह बदलाव चर्चा में है।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और विभाग के स्तर पर हलचल तेज हो गई है। शिक्षकों के वेतन भुगतान, मकान किराया भत्ता और एरियर के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य के 10 जिलों में जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की जिम्मेदारियां बदली गई हैं, जबकि नौ जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) का भी तबादला किया गया है। इस बदलाव के तहत पटना से लेकर सीवान, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और नवादा तक कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस प्रशासनिक बदलाव को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं की जांच और वसूली की प्रक्रिया चल रही है। विभाग के अपर मुख्य सचिव सीके अनिल की समीक्षा के दौरान 34 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का मामला सामने आया था। बताया गया है कि इसमें से करीब 29 करोड़ रुपये वापस कराए जा चुके हैं। ऐसे में अधिकारियों के तबादले को विभाग में जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

शिक्षा विभाग में 10 जिलों के DEO बदले

शिक्षा विभाग की ओर से किए गए फेरबदल में पटना को नया जिला शिक्षा पदाधिकारी मिला है। मुख्यालय में तैनात सरस्वती कुमारी को पटना का नया DEO बनाया गया है। वहीं, पटना के मौजूदा जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) में पदस्थापित किया गया है।

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इसके अलावा पूर्वी चंपारण के जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी और नवादा के DEO दीपक कुमार को भी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति भेजा गया है। सीवान के जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह को मुख्यालय स्थित योजना एवं अनुश्रवण कोषांग में सहायक निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है।

सीतामढ़ी के जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी को सीवान का नया DEO बनाया गया है। परीक्षा समिति के उप सचिव मुकेश कुमार को भागलपुर और दिनेश कुमार पासवान को सीतामढ़ी का जिला शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।

माध्यमिक शिक्षा के उपनिदेशक प्रफुल्ल कुमार मिश्रा को पूर्वी चंपारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि सहायक निदेशक सुभाष कुमार को नवादा का नया जिला शिक्षा पदाधिकारी बनाया गया है। इन बदलावों के बाद संबंधित जिलों में शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी नए अधिकारियों के हाथों में होगी।

नौ जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों का भी तबादला

जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ-साथ शिक्षा विभाग ने नौ जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) का भी स्थानांतरण किया है। इस सूची में कई जिलों के अधिकारियों को नई जगह भेजा गया है।

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गोपालगंज के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी विनय कुमार सुमन को खगड़िया भेजा गया है। गया में तैनात के आनंद कुमार को मुंगेर की जिम्मेदारी दी गई है। नालंदा के डीपीओ विकास कुमार डीएन का तबादला औरंगाबाद किया गया है।

इसी तरह सीवान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सैयद तारिक सज्जाद को मधेपुरा भेजा गया है, जबकि बक्सर के डीपीओ रजनीश कुमार साहू को भागलपुर में पदस्थापित किया गया है। नालंदा के डीपीओ भोला कुमार कर्ण को गोपालगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुमार अभिजीत को सीवान से पूर्वी चंपारण भेजा गया है। वहीं, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सहायक निदेशक राजीव कुमार साह और रवि कुमार को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बनाकर बक्सर में पदस्थापित किया गया है।

विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया है। अब इन अधिकारियों को नई जगह पर कार्यभार संभालना होगा।

शिक्षा विभाग में 34 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला

अधिकारियों के तबादले के बीच शिक्षा विभाग में सामने आई वित्तीय अनियमितता का मामला भी चर्चा में है। विभागीय समीक्षा के दौरान वेतन, मकान किराया भत्ता और एरियर के नाम पर 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है।

विभागीय जानकारी के अनुसार, इस मामले में शिक्षक, लिपिक, परिचारी और अन्य कर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। आरोप है कि अलग-अलग मदों में नियमों के विरुद्ध राशि निकाली गई। मामला सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित कर्मियों से अवैध रूप से निकाली गई रकम वापस लेने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़ी राशि सीधे सार्वजनिक धन से संबंधित होती है। यदि वेतन, भत्ते या एरियर के नाम पर गलत तरीके से भुगतान किया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना विभाग के लिए जरूरी होगा।

सीके अनिल के आने के बाद शिक्षा विभाग में बढ़ी समीक्षा

हाल ही में आईएएस अधिकारी सीके अनिल को शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। उनके कार्यभार संभालने के बाद विभागीय कामकाज और वित्तीय मामलों की समीक्षा तेज हुई है। इसी समीक्षा के दौरान करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया।

उपलब्ध विभागीय जानकारी के मुताबिक, कुल 34.11 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अवैध रूप से निकाली गई थी। राहत की बात यह है कि अब तक लगभग 29 करोड़ रुपये वापस कराए जा चुके हैं। हालांकि, शेष राशि की वसूली अभी बाकी है। विभाग की ओर से बाकी रकम की वसूली और संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम की निकासी किन प्रक्रियागत खामियों के कारण संभव हुई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी। विभागीय जांच में इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।

तबादलों से क्या बदलेगा शिक्षा विभाग का कामकाज?

बिहार के शिक्षा विभाग में एक साथ इतने अधिकारियों के तबादले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर देखा जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी जिलों में शिक्षा व्यवस्था के संचालन, योजनाओं की निगरानी, स्कूलों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और विभागीय निर्देशों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में नए अधिकारियों के आने से जिलों में लंबित कार्यों, वित्तीय मामलों और योजनाओं की समीक्षा की उम्मीद की जा रही है। खासकर वेतन भुगतान, भत्तों और एरियर से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना विभाग के सामने बड़ी चुनौती होगी।

हालांकि, केवल तबादलों से व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए जरूरी है कि वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और सरकारी धन की वसूली समय पर पूरी की जाए। साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों को मिलने वाले वैध भुगतान में किसी तरह की देरी या परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अब कार्रवाई और जवाबदेही पर टिकी नजर

शिक्षा विभाग में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद अब निगाहें नए पदस्थापित अधिकारियों के कामकाज और वित्तीय अनियमितताओं पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। एक तरफ 10 जिलों में नए जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जिम्मेदारी मिली है, तो दूसरी तरफ नौ डीपीओ के तबादले से जिला स्तर पर प्रशासनिक ढांचे में बदलाव हुआ है।

करीब 29 करोड़ रुपये की वापसी के बाद भी शेष राशि की वसूली और दोषियों पर कार्रवाई का सवाल बना हुआ है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और नई जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी जिलों में शिक्षा व्यवस्था को कितना प्रभावी बना पाते हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से संवाददाता की रिपोर्ट

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